January 16, 2026

बीपीएससी शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाणपत्रों फिर से होगी गहन जांच, विभाग का निर्देश जारी

पटना। बिहार में शिक्षक बहाली की प्रक्रिया से गुजर चुके अभ्यर्थियों के लिए शिक्षा विभाग ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। बिहार लोक सेवा आयोग के माध्यम से नियुक्त हुए शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की दोबारा और गहन जांच कराने का निर्णय लिया गया है। बहाली के लगभग दो वर्ष बाद यह कदम उठाया गया है, जिसे शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और किसी भी तरह की अनियमितता को रोकने की दिशा में बड़ा फैसला माना जा रहा है। इस संबंध में जिला शिक्षा पदाधिकारी ने सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को पत्र जारी कर तत्काल प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है।
पारदर्शिता और सख्ती की मंशा
शिक्षा विभाग का कहना है कि यह जांच केवल औपचारिकता भर नहीं होगी। विभाग इस बार शिक्षकों के पूरे शैक्षणिक सफर को बारीकी से खंगालेगा। सरकार का मानना है कि अगर नियुक्ति प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर फर्जीवाड़ा हुआ है, तो उसे सामने लाना जरूरी है। इससे न केवल शिक्षा व्यवस्था की साख मजबूत होगी, बल्कि योग्य और ईमानदार शिक्षकों का भरोसा भी बढ़ेगा। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, यह जांच भविष्य में होने वाली बहालियों के लिए भी एक मिसाल बनेगी।
किन प्रमाणपत्रों की होगी जांच
इस सत्यापन प्रक्रिया के तहत शिक्षकों के मैट्रिक, इंटरमीडिएट, स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर के प्रमाणपत्रों की जांच की जाएगी। इसके साथ ही शिक्षक प्रशिक्षण से जुड़े दस्तावेज जैसे डीएलएड और बीएड भी जांच के दायरे में आएंगे। विभाग यह सुनिश्चित करना चाहता है कि सभी डिग्रियां और प्रमाणपत्र मान्यता प्राप्त बोर्ड, परिषद या विश्वविद्यालय से ही जारी हुए हों। यह भी देखा जाएगा कि नियुक्ति के समय ऑनलाइन पोर्टल पर जो दस्तावेज अपलोड किए गए थे, वही वास्तविक और वैध हैं या नहीं।
तय समय सीमा में दस्तावेज जमा करने का निर्देश
शिक्षा विभाग ने सभी बीपीएससी शिक्षकों को 16 जनवरी तक अपने-अपने प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय में प्रमाणपत्र जमा करने का निर्देश दिया है। शिक्षकों को यह भी साफ तौर पर बताया गया है कि केवल वही प्रमाणपत्र मान्य होंगे, जिन पर बीपीएससी का वॉटरमार्क लगा होगा। ये वही दस्तावेज हैं, जिन्हें नियुक्ति के समय आयोग के पोर्टल पर अपलोड किया गया था। नए या अलग से तैयार किए गए कागजात स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
निर्धारित फॉर्मेट में होगा सत्यापन
दस्तावेज जमा करने की प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाने के लिए शिक्षा विभाग ने एक निर्धारित फॉर्मेट भी तय किया है। शिक्षकों को उसी प्रारूप में अपने प्रमाणपत्रों की प्रतियां जमा करनी होंगी। इससे सत्यापन की प्रक्रिया में एकरूपता बनी रहेगी और किसी तरह की भ्रम की स्थिति नहीं होगी। विभाग ने यह भी संकेत दिया है कि समय सीमा के भीतर दस्तावेज नहीं देने वाले शिक्षकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
सभी चरणों के शिक्षक जांच के दायरे में
यह जांच केवल किसी एक चरण के तहत बहाल हुए शिक्षकों तक सीमित नहीं है। बीपीएससी शिक्षक नियुक्ति के तीनों चरण—टीआरई-1, टीआरई-2 और टीआरई-3—के अंतर्गत नियुक्त सभी शिक्षक इस प्रक्रिया में शामिल होंगे। शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि जिले में कार्यरत शत-प्रतिशत शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की जांच कराई जाएगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी स्तर पर कोई शिक्षक जांच से बाहर न रह जाए।
स्थानांतरण के बाद तैनात शिक्षक भी शामिल
जांच के दायरे में वे शिक्षक भी आएंगे, जो किसी अन्य जिले में बहाल हुए थे और बाद में स्थानांतरण के जरिए किसी दूसरे जिले में पदस्थापित हुए हैं। ऐसे शिक्षकों को भी वर्तमान जिले में ही अपने दस्तावेज जमा कराने होंगे। यानी शिक्षक चाहे जहां भी तैनात हो, उसके शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की जांच अनिवार्य रूप से होगी। इससे यह स्पष्ट होता है कि विभाग किसी भी तरह की ढील देने के मूड में नहीं है।
बोर्ड और विश्वविद्यालय से होगी पुष्टि
दस्तावेज जमा होने के बाद अगला चरण और भी महत्वपूर्ण होगा। शिक्षा विभाग सभी प्रमाणपत्रों को संबंधित बोर्ड, परिषद और विश्वविद्यालयों के पास सत्यापन के लिए भेजेगा। वहां से प्रमाणिकता की पुष्टि होने के बाद ही किसी शिक्षक की फाइल को पूरी तरह क्लियर माना जाएगा। अगर किसी शिक्षक का प्रमाणपत्र फर्जी या अमान्य पाया जाता है, तो उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
कड़ी कार्रवाई की चेतावनी
विभाग ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि फर्जी दस्तावेज मिलने की स्थिति में नौकरी रद्द की जा सकती है और कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है। शिक्षा विभाग का कहना है कि इस तरह की सख्ती जरूरी है ताकि शिक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह का समझौता न हो। इससे उन लोगों को भी कड़ा संदेश जाएगा, जो गलत तरीके से सरकारी नौकरी पाने की कोशिश करते हैं।
शिक्षा व्यवस्था पर पड़ेगा असर
शिक्षा विभाग का मानना है कि इस व्यापक जांच से न सिर्फ फर्जी शिक्षकों पर लगाम लगेगी, बल्कि पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी। योग्य और मेहनती शिक्षकों का मनोबल बढ़ेगा और छात्रों तथा अभिभावकों का भरोसा भी मजबूत होगा। बीपीएससी शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की यह गहन जांच अब तक की सबसे बड़ी सत्यापन प्रक्रियाओं में से एक मानी जा रही है, जिसके नतीजे आने वाले समय में बिहार की शिक्षा व्यवस्था की दिशा तय कर सकते हैं।

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