पटना में इंस्टाग्राम रील को लेकर पति-पत्नी में विवाद, दोनों महिला आयोग पहुंचे, 18 फरवरी को अगली सुनवाई
- पत्नी का आरोप, मोबाइल चलाने पर मारपीट करते हैं, पति बोला- मोबाइल छोड़ने पर ही साथ रहूंगा
पटना। राजधानी पटना में सोशल मीडिया, खासकर इंस्टाग्राम रील, एक दंपती के वैवाहिक जीवन में गंभीर विवाद की वजह बन गई है। मामला इतना बढ़ गया कि पति और पत्नी दोनों अपनी शिकायतें लेकर बिहार राज्य महिला आयोग के कार्यालय पहुंचे। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए हैं और आयोग ने पूरे मामले की सुनवाई करते हुए अगली तारीख 18 फरवरी तय की है।
सोशल मीडिया से शुरू हुआ घरेलू विवाद
यह मामला दानापुर इलाके के एक युवा दंपती से जुड़ा है। पति की उम्र करीब 28 साल और पत्नी की उम्र 24 साल बताई जा रही है। पत्नी का कहना है कि उसे सोशल मीडिया पर रील बनाने का शौक है, लेकिन उसका पति इस बात को लेकर उससे लगातार झगड़ा करता है। पति का आरोप है कि पत्नी के सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने की वजह से उसे दोस्तों और रिश्तेदारों के ताने सुनने पड़ते हैं, जिससे उसे अपमान महसूस होता है।
शादी के शुरुआती दिनों से बिगड़ते रिश्ते
महिला ने आयोग के सामने अपनी आपबीती रखते हुए बताया कि उसकी शादी 30 नवंबर 2020 को हुई थी। शादी के बाद कुछ महीनों तक सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन धीरे-धीरे रिश्तों में खटास आने लगी। बिना किसी ठोस वजह के झगड़े होने लगे। महिला का कहना है कि वह अक्सर मायके चली जाती थी, इस उम्मीद में कि कुछ समय बाद हालात सुधर जाएंगे, लेकिन हर बार लौटने पर वही तनाव और झगड़े उसका इंतजार करते थे।
ससुराल पक्ष पर मानसिक प्रताड़ना के आरोप
पत्नी का आरोप है कि पति के साथ-साथ सास, ससुर और देवर भी उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित करते थे। छोटी-छोटी बातों पर उसे गालियां दी जाती थीं। शादी के शुरुआती दो वर्षों तक बच्चा नहीं होने पर उसे लगातार ताने सुनने पड़े। बाद में तीन साल के बाद एक बेटी का जन्म हुआ, लेकिन इसके बावजूद हालात में कोई खास सुधार नहीं हुआ।
रील बनाने का शौक बना विवाद की जड़
महिला का कहना है कि उसे शादी से पहले से ही सोशल मीडिया का शौक था। जब भी वह उदास या परेशान होती थी, तो इंस्टाग्राम या फेसबुक के लिए कभी-कभार वीडियो बनाकर पोस्ट कर देती थी। लोगों के लाइक और कमेंट्स देखकर उसे अच्छा महसूस होता था। रील बनाने के लिए वह थोड़ा सज-संवर लेती थी, लेकिन यही बात पति को नागवार गुजरती थी। काजल, पाउडर या लिपस्टिक लगाने पर भी पति उसे मारपीट का शिकार बनाता था।
आर्थिक तंगी और जिम्मेदारियों का दबाव
महिला ने यह भी आरोप लगाया कि उसका पति कोई स्थायी नौकरी नहीं करता है। कभी-कभार छोटी-मोटी मजदूरी कर लेता है, लेकिन घर की आर्थिक जिम्मेदारियां मुख्य रूप से उसी पर आ गई हैं। बेटी अब बड़ी हो रही है और जल्द ही स्कूल जाने लगेगी, ऐसे में खर्च बढ़ने वाला है। जब वह पति से काम करने और कमाने की बात करती है, तो वह उल्टा झगड़ा करने लगता है।
बुनियादी सुविधाओं की कमी का दर्द
महिला ने आयोग को यह भी बताया कि उसके ससुराल में शौचालय तक नहीं है। उसे शौच के लिए घर से करीब तीन किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। कई बार मोबाइल की रोशनी में शौच करना पड़ता है। इस समस्या को लेकर उसने प्रखंड स्तर, जिला स्तर और यहां तक कि मुख्यमंत्री के जनता दरबार में भी शिकायत की। जांच के बाद अधिकारियों ने शौचालय बनाने का निर्देश दिया था, लेकिन आज तक उस पर अमल नहीं हुआ।
पति की दलील और शर्त
वहीं पति ने आयोग के सामने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उसकी पत्नी की जरूरतें और शौक उसकी आर्थिक स्थिति से मेल नहीं खाते। उसका घर कच्चा है और पत्नी वहां रहना नहीं चाहती। वह बार-बार मायके चली जाती है और घर की बातों को नहीं मानती। पति का कहना है कि पत्नी दिनभर सोशल मीडिया में लगी रहती है और रील व फोटो बनाकर पोस्ट करती है, जिन्हें उसके दोस्त भी देखते हैं और उसे चिढ़ाते हैं। इसी वजह से कई बार उसका गुस्सा काबू से बाहर हो गया और उसने हाथ उठा लिया। पति ने साफ कहा कि वह पत्नी को तभी साथ रखेगा, जब वह मोबाइल फोन और सोशल मीडिया छोड़ देगी।
महिला आयोग की भूमिका और सलाह
बिहार राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष ने बताया कि सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की बातें ध्यान से सुनी गईं। आयोग का मानना है कि दोनों पति-पत्नी अभी कम उम्र के हैं और उनकी सोच पूरी तरह परिपक्व नहीं हुई है। उन्हें समझाया गया है कि दिखावटी दुनिया से दूरी बनाकर परिवार और बच्चे के भविष्य पर ध्यान दें। आयोग ने दोनों को आपसी समझ से समस्या सुलझाने की सलाह दी है।
अगली सुनवाई की तारीख तय
महिला आयोग ने इस मामले में अगली सुनवाई 18 फरवरी को तय की है। तब तक दोनों पक्षों को अपने व्यवहार पर विचार करने और किसी सकारात्मक समाधान की दिशा में कदम बढ़ाने की उम्मीद जताई गई है। यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव किस तरह निजी रिश्तों को प्रभावित कर रहा है और आपसी संवाद की कमी कैसे घरेलू विवाद को और गहरा बना देती है।


