January 16, 2026

दयानिधि मारन पर दिलीप जायसवाल का हमला, कहा- नफरत फैलाने वालों के लिए बने विशेष बाल सुधार गृह

पटना। डीएमके सांसद दयानिधि मारन के हालिया बयान को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। बिहार सरकार में मंत्री और भाजपा नेता दिलीप जायसवाल ने मारन के बयान पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे समाज को बांटने वाला और देश की एकता के लिए घातक करार दिया है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि ऐसे नेताओं के लिए विशेष “सुधार गृह” बनाए जाने चाहिए, जिनकी जुबान पर कोई नियंत्रण नहीं है और जो लगातार नफरत व वैमनस्य फैलाने वाले बयान देते हैं। पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान दिलीप जायसवाल ने बेहद सख्त लहजे में कहा कि लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मतलब यह नहीं है कि कोई भी जनप्रतिनिधि किसी राज्य, भाषा या समुदाय के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करे। उन्होंने कहा कि जो नेता भाषाई और क्षेत्रीय आधार पर समाज को बांटने की कोशिश करते हैं, उन्हें चिह्नित कर कम से कम तीन महीने के लिए विशेष सुधार गृह में भेजा जाना चाहिए, ताकि उनके व्यवहार और सोच में बदलाव आ सके। मंत्री जायसवाल ने तर्क दिया कि देश के विकास और सामाजिक सौहार्द के लिए यह बेहद जरूरी है कि नेताओं की भाषा और आचरण में मर्यादा हो। उन्होंने कहा, “जब तक ऐसे नेताओं की सोच नहीं बदलेगी, तब तक समाज में जहर फैलता रहेगा। सुधार गृह जैसा कड़ा कदम ही राजनीति में शुचिता और अनुशासन ला सकता है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि हर जनप्रतिनिधि की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि वह अपने शब्दों के असर को समझे और समाज को जोड़ने की भाषा बोले। महाराष्ट्र का उदाहरण देते हुए दिलीप जायसवाल ने कहा कि क्षेत्रवाद और भाषा के नाम पर राजनीति करने का अंजाम देश पहले भी देख चुका है। उन्होंने ठाकरे बंधुओं का नाम लेते हुए कहा कि जिस तरह वहां क्षेत्रीय पहचान और भाषा को लेकर समाज में विभाजन पैदा किया गया, उसका नतीजा आज सबके सामने है। जायसवाल ने चेतावनी भरे स्वर में कहा कि जो भी राजनीतिक दल या नेता इस तरह की राजनीति करेगा, उसे जनता नकार देगी। “जो हाल महाराष्ट्र में हुआ, वही हाल हर उस जगह होगा, जहां क्षेत्रवाद और भाषाई वैमनस्य को बढ़ावा दिया जाएगा,” उन्होंने कहा। अपने बयान के दौरान दिलीप जायसवाल ने देश की एकता और अखंडता पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कुछ नेता बिना सोचे-समझे किसी भी राज्य या समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि इस दिशा में एक प्रभावी और सख्त व्यवस्था बनाई जाए, ताकि कोई भी जनप्रतिनिधि देश की एकता से खिलवाड़ न कर सके। इसी क्रम में मंत्री जायसवाल ने बिहार के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक उपलब्धि का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि भाजपा नेता नितिन नवीन को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। जायसवाल के अनुसार, 19 जनवरी को नामांकन की प्रक्रिया पूरी होगी और 20 जनवरी को इसकी औपचारिक घोषणा की जाएगी। उन्होंने इसे बिहार के लिए गौरव का क्षण बताते हुए कहा कि इससे राज्य की राजनीतिक प्रतिष्ठा राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होगी। मंत्री ने मीडिया कर्मियों से अपील की कि नफरत फैलाने वाले बयानों के खिलाफ एक राष्ट्रीय बहस छेड़ी जाए। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते ऐसे नेताओं पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो इसका सीधा असर देश की सामाजिक एकता पर पड़ेगा। दिलीप जायसवाल के मुताबिक, सुधार गृह जैसी अवधारणा भले ही कठोर लगे, लेकिन मौजूदा हालात में यही राजनीति को सही दिशा में ले जाने का एकमात्र उपाय है। फिलहाल, दयानिधि मारन के बयान और उस पर दिलीप जायसवाल की तीखी प्रतिक्रिया ने सियासी माहौल को गर्मा दिया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और बयानबाजी होने की संभावना है, लेकिन इतना तय है कि भाषाई मर्यादा और राजनीतिक शुचिता को लेकर बहस एक बार फिर केंद्र में आ गई है।

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