February 25, 2026

पटना के चिड़ियाघर में पेड़ों पर लगे डिजिटल क्यूआर कोड, स्कैन करने पर मिलेगी सभी जानकारी

पटना। संजय गांधी जैविक उद्यान, जिसे आमतौर पर पटना जू के नाम से जाना जाता है, अब पर्यावरण शिक्षा और जागरूकता के क्षेत्र में एक अभिनव पहल के लिए चर्चा में है। यहां के पेड़ अब दर्शकों को अपनी पहचान खुद बताएंगे, वह भी डिजिटल तरीके से। पटना जू प्रशासन ने आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए पेड़ों पर डिजिटल क्यूआर कोड वाले बोर्ड लगाने की शुरुआत की है। इस प्रयास का उद्देश्य दर्शकों को प्रकृति से जोड़ना और पेड़ों की वैज्ञानिक जानकारी को सहज रूप से उपलब्ध कराना है।
क्यूआर कोड से मिलेगी पेड़ की पूरी जानकारी
जू प्रशासन ने बताया है कि इन बोर्डों पर एक विशेष क्यूआर कोड प्रिंट किया गया है, जिसे दर्शक अपने स्मार्टफोन से स्कैन कर सकते हैं। स्कैन करते ही एक लिंक खुलेगा, जिस पर क्लिक करने से संबंधित पेड़ की विस्तृत जानकारी मिल जाएगी। इस जानकारी में पेड़ का वैज्ञानिक नाम, उसकी वनस्पति श्रेणी, सामान्य बोलचाल में प्रचलित नाम, उसका प्राकृतिक स्वरूप, कहां-कहां पाया जाता है, जैसी सूचनाएं शामिल हैं। इसके साथ-साथ पेड़ के औषधीय गुण, पर्यावरण के लिए उसका महत्व और उससे जुड़े कुछ रोचक तथ्य भी दिए गए हैं। इस पहल से दर्शकों को न केवल ज्ञान मिलेगा, बल्कि वे पेड़ों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ सकेंगे।
200 पेड़ों पर लगाए गए बोर्ड, जून में पूरी योजना होगी पूरी
जू प्रशासन ने अब तक लगभग 200 पेड़ों पर ये डिजिटल बोर्ड लगा दिए हैं। पूरी योजना के अंतर्गत यह काम जून महीने में पूरा कर लिया जाएगा। इस पूरे प्रोजेक्ट की लागत लगभग 2 लाख रुपये है। यह कदम न केवल दर्शकों के लिए शिक्षाप्रद होगा, बल्कि पेड़-पौधों के संरक्षण और जैव विविधता की समझ को भी बढ़ावा देगा।
जू में हैं पेड़ों की 300 से अधिक प्रजातियाँ
पटना जू में हर्बल और अन्य पेड़-पौधों की 300 से अधिक प्रजातियों के करीब 65,000 पेड़-पौधे मौजूद हैं। केवल मुख्य रास्तों के किनारे ही 124 प्रजातियों के कुल 613 पेड़ लगे हैं। इनमें से कई पेड़ ऐसे हैं जो 50 वर्ष से भी अधिक पुराने हैं। इस प्रकार, पटना जू न केवल जीव-जंतुओं का आवास है, बल्कि यह एक समृद्ध वनस्पति संग्रहालय भी बन गया है।
विविध थीम गार्डन बढ़ा रहे जू की शोभा
पटना जू में पर्यावरणीय शिक्षा और सजावट के दृष्टिकोण से विभिन्न प्रकार के थीम आधारित गार्डन भी बनाए गए हैं। इनमें जल उद्यान, औषधीय वाटिका, गुलाब गार्डन, केना गार्डन, फर्न हाउस, कैक्टस हाउस, रॉक गार्डन और लत्तर गार्डन शामिल हैं। ये गार्डन न केवल देखने में आकर्षक हैं, बल्कि हर उम्र के दर्शकों को पेड़-पौधों की विविधता और उनके महत्व से अवगत भी कराते हैं।
शिक्षा और संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम
यह डिजिटल पहल आधुनिक तकनीक को पर्यावरणीय जागरूकता से जोड़ने का सफल प्रयास है। अब दर्शक पेड़ के सामने खड़े होकर महज एक स्कैन से उसके पूरे जीवन, उपयोगिता और पर्यावरणीय भूमिका को जान सकते हैं। यह प्रणाली खासतौर पर छात्रों, शोधकर्ताओं और प्रकृति प्रेमियों के लिए अत्यंत लाभकारी होगी। कुल मिलाकर, पटना जू की यह पहल पर्यावरणीय शिक्षा के क्षेत्र में एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करती है, जहां प्रकृति को समझने के लिए अब केवल किताबों की जरूरत नहीं, बल्कि एक स्मार्टफोन और कुछ जिज्ञासा काफी है। यह कदम न केवल पर्यावरण संरक्षण में योगदान देगा, बल्कि आम लोगों में हरियाली के प्रति जागरूकता भी बढ़ाएगा।

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