January 7, 2026

बिहार के 358 प्रखंडों को जल्द मिलेगी डिग्री कॉलेज की सौगात, तैयारी में लगा शिक्षा विभाग, भूमि आवंटन का काम शुरू

पटना। बिहार सरकार राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता और पहुंच को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। राज्य के जिन 358 प्रखंडों में अब तक डिग्री कॉलेज की सुविधा नहीं थी, वहां जल्द ही नए कॉलेजों की स्थापना की जाएगी। इस योजना पर तेजी से कार्य हो रहा है और शिक्षा विभाग ने आवश्यक तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसका उद्देश्य उच्च शिक्षा को राज्य के दूरदराज और पिछड़े क्षेत्रों तक पहुंचाना है, जिससे विद्यार्थियों को बेहतर अवसर मिल सकें।
बजट सत्र में की गई थी घोषणा
राज्य सरकार ने इस योजना की घोषणा बिहार विधानमंडल के बजट सत्र के दौरान की थी। इस घोषणा के बाद शिक्षा विभाग ने सक्रियता दिखाते हुए कार्य योजना पर अमल शुरू कर दिया है। सरकार की इस पहल को राज्य के उच्च शिक्षा ढांचे को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा।
जिलाधिकारियों को दिए गए निर्देश
शिक्षा विभाग ने सभी जिलों के जिलाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने जिलों में प्रस्तावित कॉलेजों के लिए उपयुक्त भूमि की पहचान करें। इस भूमि चिन्हीकरण की प्रक्रिया को प्राथमिकता पर रखा गया है ताकि कॉलेज निर्माण में किसी प्रकार की देरी न हो। विभाग ने जिलाधिकारियों से चिन्हित भूमि की रिपोर्ट भी तलब की है, जिससे योजना की प्रगति की समुचित समीक्षा की जा सके।
समीक्षा बैठक में हुई योजना की गहन चर्चा
हाल ही में शिक्षा मंत्री सुनील कुमार की अध्यक्षता में एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें योजना की प्रगति की विस्तृत जानकारी ली गई। इस बैठक में उच्च शिक्षा निदेशालय के अधिकारियों ने भाग लिया और उन्होंने बताया कि कितने प्रखंडों में अब तक कॉलेजों के लिए भूमि चिन्हित की जा चुकी है और कितने प्रखंडों में यह प्रक्रिया अभी जारी है। यह भी स्पष्ट किया गया कि जिन क्षेत्रों में भूमि की उपलब्धता में समस्या है, वहां वैकल्पिक स्थानों की तलाश की जा रही है।
उच्च शिक्षा के विस्तार की दिशा में कदम
यह पहल न केवल शिक्षा के विस्तार की दिशा में है, बल्कि यह युवाओं को उनके गांव-प्रखंड में ही उच्च शिक्षा की सुविधा देने की सोच को साकार करने की कोशिश है। इससे सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्र-छात्राओं को लाभ मिलेगा, जो अब तक संसाधनों के अभाव में उच्च शिक्षा से वंचित रह जाते थे।
स्थानीय रोजगार और विकास को मिलेगा बढ़ावा
इन कॉलेजों के निर्माण से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। निर्माण कार्य से लेकर शिक्षण और प्रशासनिक कार्यों में स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। इसके अलावा, आसपास के क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों में भी वृद्धि होगी, जिससे समग्र क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी। बिहार सरकार की यह योजना राज्य के शैक्षणिक भविष्य के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकती है। यदि समयबद्ध तरीके से इस पर कार्य हुआ और निर्धारित मानकों के अनुसार कॉलेजों की स्थापना हुई, तो यह राज्य के लाखों विद्यार्थियों के जीवन को नई दिशा दे सकती है। यह पहल दिखाती है कि सरकार शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए इसे हर वर्ग तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

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