विधानसभा में ईडब्ल्यूएस में उम्र छूट पर बहस, विजय चौधरी बोले- केंद्र ने अधिनियम बनाया, वहां ऐसा कोई प्रावधान नहीं
पटना। बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सोमवार को प्रश्नकाल में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के अभ्यर्थियों को उम्र सीमा में छूट देने का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। सदन में इस विषय पर हुई चर्चा के दौरान सरकार और सत्तापक्ष के बीच कानूनी सीमाओं और सामाजिक अपेक्षाओं को लेकर स्पष्ट मतभेद भी सामने आए। प्रश्न उठाने वाले विधायक ने जहां इसे समय की मांग बताया, वहीं सरकार की ओर से केंद्र के कानून का हवाला देते हुए फिलहाल किसी भी तरह की छूट से इनकार किया गया।
प्रश्नकाल में उठा ईडब्ल्यूएस का मुद्दा
जेडीयू विधायक देवेश कांत सिंह ने प्रश्नकाल के दौरान सरकार से सीधा सवाल किया कि क्या बिहार में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्र-छात्राओं को सरकारी नौकरियों और प्रतियोगी परीक्षाओं में उम्र सीमा में छूट देने पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य के हजारों ऐसे युवा हैं, जो आर्थिक तंगी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण समय पर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी नहीं कर पाते और उम्र सीमा पार कर जाने की वजह से अवसर से वंचित हो जाते हैं।
आर्थिक परिस्थितियों का दिया हवाला
देवेश कांत सिंह ने सदन में कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के युवाओं को पढ़ाई के साथ-साथ आजीविका के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है। कई बार उन्हें छोटी उम्र में ही काम करना शुरू करना पड़ता है, जिससे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पीछे छूट जाती है। उन्होंने कहा कि जब अन्य सामाजिक वर्गों को आरक्षण और आयु सीमा में छूट का लाभ दिया जाता है, तो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए भी इस तरह के प्रावधान पर गंभीरता से विचार होना चाहिए।
अन्य राज्यों का उदाहरण
विधायक ने अपने सवाल को और मजबूत करते हुए गुजरात और राजस्थान जैसे राज्यों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन राज्यों में भी ईडब्ल्यूएस वर्ग को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चा हुई है। ऐसे में बिहार सरकार को भी इस दिशा में पहल करनी चाहिए। उनका कहना था कि अगर राज्य सरकार चाहे तो केंद्र सरकार से इस विषय पर बात कर सकती है और जरूरत पड़ने पर प्रस्ताव भेज सकती है।
सरकार का स्पष्ट जवाब
इस सवाल का जवाब देते हुए सामान्य प्रशासन विभाग के प्रभारी मंत्री विजय चौधरी ने सदन में सरकार का पक्ष स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से संबंधित मूल अधिनियम केंद्र सरकार द्वारा बनाया गया है। इस अधिनियम में उम्र सीमा में छूट का कोई प्रावधान नहीं है। मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार केवल केंद्र द्वारा बनाए गए कानून के अनुरूप नियमावली बनाकर उसे लागू कर सकती है, लेकिन उसमें अपने स्तर पर संशोधन या बदलाव करने का अधिकार राज्य के पास नहीं है।
कानूनी सीमाओं का हवाला
विजय चौधरी ने सदन को बताया कि ईडब्ल्यूएस से जुड़ा कानून संवैधानिक प्रावधानों और केंद्र सरकार के अधिनियम के तहत लागू किया गया है। इसलिए राज्य सरकार की भूमिका सीमित है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि फिलहाल बिहार सरकार अपने स्तर पर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को आयु सीमा में छूट देने का कोई निर्णय नहीं ले सकती। ऐसा कोई भी फैसला केंद्र सरकार के स्तर पर संशोधन के बाद ही संभव होगा।
संभावनाओं पर अध्ययन की बात
हालांकि मंत्री ने यह भी कहा कि सदन में उठाए गए इस मुद्दे को सरकार पूरी तरह नजरअंदाज नहीं कर रही है। उन्होंने बताया कि सरकार इस विषय पर संभावनाओं का अध्ययन कर सकती है। अगर भविष्य में केंद्र सरकार इस संबंध में कोई संशोधन करती है या दिशा-निर्देश जारी करती है, तो बिहार सरकार उस पर विचार करने के लिए तैयार रहेगी।
अन्य राज्यों की स्थिति पर असमंजस
विजय चौधरी ने यह भी स्पष्ट किया कि अभी तक सरकार के पास ऐसी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है, जिससे यह साबित हो कि किसी अन्य राज्य ने ईडब्ल्यूएस वर्ग को आयु सीमा में छूट दी हो। उन्होंने कहा कि अक्सर इस तरह के विषयों पर राजनीतिक चर्चाएं होती हैं, लेकिन कानूनी रूप से लागू प्रावधानों की स्थिति अलग होती है। सरकार किसी भी फैसले से पहले सभी तथ्यों और कानूनों को ध्यान में रखेगी।
सदन में दिखी गंभीरता
इस मुद्दे पर सदन में हुई चर्चा से यह साफ हो गया कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के युवाओं की समस्याएं अब राजनीतिक विमर्श का अहम हिस्सा बनती जा रही हैं। कई विधायकों ने अनौपचारिक बातचीत में माना कि प्रतियोगी परीक्षाओं में उम्र सीमा एक बड़ा मुद्दा है, खासकर उन युवाओं के लिए जिनकी सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियां कठिन हैं।
युवाओं की उम्मीद और सरकार की मजबूरी
एक तरफ जहां ईडब्ल्यूएस वर्ग के युवा आयु सीमा में छूट को अपने लिए राहत के तौर पर देखते हैं, वहीं सरकार कानूनी मजबूरियों का हवाला देकर फिलहाल कोई ठोस आश्वासन नहीं दे पा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मुद्दे पर केंद्र सरकार स्तर पर चर्चा होती है, तो आने वाले समय में इसमें बदलाव की संभावना बन सकती है।
आगे की राह
फिलहाल बिहार विधानसभा में हुई इस बहस का नतीजा यह रहा कि सरकार ने अपनी सीमाएं स्पष्ट कर दी हैं, लेकिन मुद्दे को पूरी तरह बंद भी नहीं किया है। आने वाले समय में यदि अन्य राज्य या केंद्र सरकार इस दिशा में कोई पहल करते हैं, तो बिहार सरकार के लिए भी इस पर निर्णय लेना आसान हो सकता है। बजट सत्र के दौरान ईडब्ल्यूएस वर्ग को उम्र सीमा में छूट का मुद्दा उठना यह संकेत देता है कि आर्थिक आधार पर अवसरों की समानता को लेकर राजनीति में नई बहस शुरू हो चुकी है। अभी भले ही कानूनी अड़चनों के कारण कोई फैसला न हो पाया हो, लेकिन यह विषय भविष्य में फिर से सदन के एजेंडे में लौट सकता है।


