मध्य पूर्व संकट में युद्धविराम पर गतिरोध, ईरान ने रखीं सख्त शर्तें

  • हमले रोकने और नेताओं की सुरक्षा की गारंटी के बिना बातचीत से इनकार
  • अमेरिका की परमाणु कार्यक्रम रोकने की मांग, ईरान ने प्रतिबंध हटाने पर दिया जोर

नई दिल्ली। मध्य पूर्व में जारी भीषण संघर्ष के बीच संभावित युद्धविराम को लेकर स्थिति और जटिल होती जा रही है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी प्रकार के दबाव में आकर समझौता करने को तैयार नहीं है और शांति वार्ता के लिए उसने कई सख्त शर्तें रख दी हैं। इस कारण अमेरिका और इजरायल के साथ जारी टकराव के बीच तत्काल समाधान की संभावना फिलहाल कमजोर नजर आ रही है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान की सबसे प्रमुख मांग यह है कि अमेरिका और इजरायल उसके सैन्य ठिकानों, ऊर्जा ढांचे और परमाणु संयंत्रों पर हो रहे हवाई तथा मिसाइल हमलों को तुरंत बंद करें। तेहरान का कहना है कि जब तक ये हमले जारी रहेंगे, तब तक किसी भी प्रकार की शांति वार्ता संभव नहीं है। ईरानी नेतृत्व को यह भी आशंका है कि आमने-सामने की वार्ता एक जाल साबित हो सकती है। उन्हें डर है कि बातचीत के बहाने उनके शीर्ष नेताओं को निशाना बनाया जा सकता है। इसी कारण ईरान ने वार्ता में शामिल होने से पहले अपने नेताओं की सुरक्षा की ठोस गारंटी की मांग की है। इसके साथ ही ईरान ने अमेरिका से आर्थिक प्रतिबंधों में राहत की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई है। लगातार युद्ध और प्रतिबंधों के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव है। तेहरान चाहता है कि तेल निर्यात और ऊर्जा क्षेत्र पर लगाए गए कड़े प्रतिबंधों को हटाया जाए या उनमें ढील दी जाए। दूसरी ओर, अमेरिका की मांग है कि ईरान अपने परमाणु संवर्धन कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त करे और क्षेत्र में सक्रिय उसके सहयोगी समूहों को समर्थन देना बंद करे। अमेरिका का मानना है कि यह कदम क्षेत्रीय स्थिरता के लिए आवश्यक है। हालांकि, ईरान इन मांगों को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा विषय मानता है और इन्हें पूरी तरह स्वीकार करने को तैयार नहीं है। ईरान के लिए परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सहयोगी उसके सुरक्षा ढांचे का अहम हिस्सा हैं। ईरान ने सार्वजनिक रूप से भी अपना कड़ा रुख स्पष्ट किया है। हाल ही में विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि ईरान ने कभी युद्धविराम की मांग नहीं की है और वह अपनी रक्षा के लिए आवश्यक समय तक संघर्ष जारी रखने के लिए तैयार है। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों पक्षों के बीच मांगों में काफी अंतर है, जिससे किसी त्वरित शांति समझौते की संभावना बेहद कम हो गई है। जहां एक ओर अमेरिका और उसके सहयोगी ईरान पर दबाव बनाए रखना चाहते हैं, वहीं ईरान अपनी शर्तों पर ही बातचीत करने पर अड़ा हुआ है। सूत्रों के अनुसार, अमेरिका ने मध्यस्थों के माध्यम से एक बहु-सूत्रीय संघर्ष विराम प्रस्ताव भी भेजा है और कुछ देशों ने बातचीत की मेजबानी करने की पेशकश की है। हालांकि इन प्रयासों के बावजूद दोनों पक्षों के बीच भरोसे की कमी बनी हुई है। इसी बीच, अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति भी बढ़ा दी है। पहले से तैनात हजारों सैनिकों के अलावा अतिरिक्त सैन्य इकाइयों की तैनाती की जा रही है, जिससे यह संकेत मिलता है कि स्थिति अभी और तनावपूर्ण हो सकती है। ईरान ने अमेरिका के उन दावों का भी खंडन किया है, जिनमें कहा गया था कि दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका अपनी रणनीतिक स्थिति को बेहतर दिखाने के लिए इस तरह के दावे कर रहा है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि जब तक सैन्य अभियान जारी रहेगा, तब तक वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी। मध्य पूर्व में मौजूदा हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। युद्धविराम की संभावनाएं फिलहाल दूर नजर आ रही हैं और दोनों पक्षों के बीच जारी टकराव क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है।

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