राबड़ी देवी का सरकार पर हमला, कहा- बिहार में बेटियां सुरक्षित नहीं, सदन में दबाई जा रही विपक्ष की आवाज
पटना। बिहार में कानून-व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सियासत गरमा गई है। गुरुवार को बिहार विधान परिषद के बाहर नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान विपक्ष ने राज्य में बढ़ती हत्या, दुष्कर्म और बलात्कार की घटनाओं को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला और सदन के भीतर इन मुद्दों पर चर्चा की मांग की।
विधान परिषद के बाहर विपक्ष का प्रदर्शन
बिहार विधान परिषद की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही विपक्षी नेता परिसर के बाहर एकत्रित हो गए। हाथों में तख्तियां लेकर और नारेबाजी करते हुए उन्होंने सरकार पर जनता की सुरक्षा में विफल रहने का आरोप लगाया। विपक्ष का कहना था कि राज्य में अपराध की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन सरकार स्थिति को गंभीरता से लेने के बजाय उपलब्धियों का ढोल पीट रही है।
बिहार में बेटियां सुरक्षित नहीं: राबड़ी देवी
प्रदर्शन के दौरान राबड़ी देवी ने कहा कि बिहार के हालात बेहद चिंताजनक हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में बेटियां सुरक्षित नहीं हैं और खुलेआम उन्हें धमकियां दी जा रही हैं। रेप, हत्या और बलात्कार की घटनाओं में लगातार इजाफा हो रहा है। इसके बावजूद सरकार यह मानने को तैयार नहीं है कि कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। राबड़ी देवी ने कहा कि विपक्ष इन मुद्दों को सड़क से लेकर सदन तक उठाता रहेगा और सरकार को जवाब देने के लिए मजबूर करेगा।
सदन में विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप
नेता प्रतिपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार सदन के भीतर विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि जब भी विपक्ष कानून-व्यवस्था या जनहित से जुड़े मुद्दे उठाता है, तो उसे बोलने नहीं दिया जाता। राबड़ी देवी ने साफ शब्दों में कहा कि विपक्ष किसी भी दबाव में झुकने वाला नहीं है और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात उठाता रहेगा।
मैट्रिक परीक्षा की छात्रा का मामला उठाया
राबड़ी देवी ने हाल ही में सामने आए एक हृदयविदारक मामले का जिक्र करते हुए सरकार और शिक्षा प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने बताया कि मैट्रिक परीक्षा के दौरान एक छात्रा को कुछ मिनट देर से पहुंचने के कारण परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं दिया गया। इसके बाद छात्रा ने आत्महत्या कर ली। नेता प्रतिपक्ष ने इस घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया और सवाल उठाया कि क्या नियम इतने कठोर हैं कि दो-चार या पांच मिनट की देरी पर किसी छात्र को परीक्षा देने से रोक दिया जाए। उन्होंने मांग की कि जिन लोगों ने छात्रा को परीक्षा केंद्र में प्रवेश से रोका, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
शराबबंदी पर भी गरमाई राजनीति
इसी दिन बिहार विधानमंडल के भीतर शराबबंदी को लेकर भी सियासी माहौल गरमाया रहा। राष्ट्रीय जनता दल के विधान परिषद सदस्य सुनील कुमार ने सरकार और सत्ता पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि बिहार में शराबबंदी के बावजूद शराब आसानी से उपलब्ध है और यह कानून सिर्फ कागजों तक सीमित रह गया है।
सत्ता पक्ष पर लगाए गंभीर आरोप
सुनील कुमार ने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष के कई मंत्री और विधायक रोजाना शराब का सेवन करते हैं। उन्होंने यहां तक कहा कि बिहार विधानमंडल परिसर में भी शराब की बोतलें खुलती हैं। हालांकि उन्होंने किसी का नाम लेने से परहेज किया। उनके इस बयान के बाद सदन के भीतर हंगामा तेज हो गया और सत्ता पक्ष ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।
शराबबंदी से समानांतर कारोबार का दावा
आरजेडी सदस्य ने यह भी आरोप लगाया कि शराबबंदी कानून लागू कर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने करीब 25 हजार करोड़ रुपये का एक समानांतर अवैध कारोबार खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि बीते दस वर्षों में राज्य की स्थिति गंभीर रूप से बिगड़ी है और बिहार अब ‘उड़ता पंजाब’ जैसी हालत की ओर बढ़ रहा है। सुनील कुमार का दावा था कि छोटे-छोटे बच्चे तक सूखे नशे की चपेट में आ रहे हैं, लेकिन सरकार आंख मूंदकर बैठी हुई है।
सरकार की चुप्पी पर सवाल
विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाया कि जब शराबबंदी और अपराध जैसे गंभीर मुद्दे सामने हैं, तो सरकार इन पर खुलकर जवाब क्यों नहीं दे रही है। उनका कहना था कि सत्ता पक्ष हर बार विपक्ष के सवालों को राजनीतिक बताकर टाल देता है, जबकि जमीनी हकीकत इससे कहीं ज्यादा गंभीर है।
राजनीतिक माहौल और आगे की रणनीति
गुरुवार के घटनाक्रम के बाद बिहार की राजनीति में एक बार फिर टकराव की स्थिति साफ नजर आई। विपक्ष का कहना है कि वह आने वाले दिनों में भी कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा, शिक्षा व्यवस्था और शराबबंदी जैसे मुद्दों को लेकर आंदोलन जारी रखेगा। वहीं सत्ता पक्ष की ओर से अभी तक इन आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राबड़ी देवी और विपक्ष के अन्य नेताओं के बयानों ने बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। राज्य में सुरक्षा, शिक्षा और नशे के मुद्दे एक बार फिर केंद्र में आ गए हैं। अब देखना यह होगा कि सरकार इन आरोपों का किस तरह जवाब देती है और सदन के भीतर इन मुद्दों पर क्या रुख अपनाया जाता है।


