बिहार के राज्यकर्मियों का महंगाई भत्ता चार फ़ीसदी बढ़ा, सरकार ने लगाई मोहर
- कैबिनेट बैठक में 40 एजेंडों पर मुहर लगी: विशेष राज्य के दर्जा के लिए अनुरोध प्रस्ताव पारित, भूमिहीन परिवारों को मिलेगा 1 लाख रूपये का लाभ
- सीएम बोले- लोगों के हित को ध्यान में रखते हुये केन्द्र बिहार को शीघ्र विशेष राज्य का दर्जा दे
पटना। बिहार की राजधानी पटना में बुधवार को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक बुलाई गई। इस कैबिनेट की बैठक में बिहार सरकार ने राज्य कर्मियों को बड़ी सौगात दी। जानकारी के मुताबिक केंद्र सरकार की तर्ज पर राज्य सरकार ने भी राज्य कर्मियों के महंगाई भत्ते में चार फ़ीसदी के इजाफे के प्रस्ताव पर मोहर लगा दी। डीए को 42 फीसदी से 46 प्रतिशत कर दी गई है। 1 जुलाई 2023 के प्रभाव से यह लाभ दिया जाएगा। इसका मतलब यह है कि राज्य सरकार के कर्मी दिसंबर महीने के वेतन में एरियर के साथ बढ़े महंगाई भत्ते का लाभ ले सकेंगे। इसके साथ-साथ कैबिनेट की बैठक में राज्य सरकार ने बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया है।
बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने के लिए अनुरोध प्रस्ताव पारित
कैबिनेट बैठक में बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने के लिए केन्द्र सरकार से अनुरोध करने का प्रस्ताव पारित किया गया है। इसके साथ ही बिहार के सरकारी सेवकों के लिए सरकार ने महंगाई भत्ता मे इंजाफ़ा किया है। इस बात की जानकारी मुख्यमंत्री ने अपने सोशल मीडिया हैंडल से दी। सीएम नीतीश ने सोशल मीडिया पोस्ट पर लिखते हुए बताया कि बुधवार को कैबिनेट की बैठक में बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने के लिए केन्द्र सरकार से अनुरोध करने का प्रस्ताव पारित किया गया है। मेरा अनुरोध है कि बिहार के लोगों के हित को ध्यान में रखते हुये केन्द्र सरकार बिहार को शीघ्र विशेष राज्य का दर्जा दे। हमलोग बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की माँग वर्ष 2010 से ही कर रहे हैं। इसके लिए 24 नवम्बर, 2012 को पटना के गाँधी मैदान में तथा 17 मार्च, 2013 को दिल्ली के रामलीला मैदान में बिहार को विशेष राज्य के दर्जे के लिए अधिकार रैली भी की थी। हमारी माँग पर तत्कालीन केन्द्र सरकार ने इसके लिए रघुराम राजन कमेटी भी बनाई थी जिसकी रिपोर्ट सितम्बर, 2013 में प्रकाशित हुई थी परन्तु उस समय भी तत्कालीन केन्द्र सरकार ने इसके बारे में कुछ नहीं किया। मई, 2017 में भी हमलोगों ने विशेष राज्य का दर्जा देने के लिए केन्द्र सरकार को पत्र लिखा था। सीएम ने फेसबुक पर पोस्ट करते हुए लिखा है कि देश में पहली बार बिहार में जाति आधारित गणना का काम कराया गया है। जाति आधारित गणना के सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक स्थिति के आंकड़ों के आधार पर अनुसूचित जाति के लिये आरक्षण सीमा को 16 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति के लिये आरक्षण की सीमा को 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 2 प्रतिशत, अत्यंत पिछड़ा वर्ग के लिये आरक्षण की सीमा को 18 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत तथा पिछड़ा वर्ग के लिये आरक्षण की सीमा को 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है अर्थात सामाजिक रूप से कमजोर तबकों के लिये आरक्षण सीमा को 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 65 प्रतिशत कर दिया गया है। सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिये 10 प्रतिशत आरक्षण पूर्ववत लागू रहेगा। अर्थात इन सभी वर्गो के लिए कुल आरक्षण की सीमा को बढ़ाकर 75 प्रतिशत कर दिया गया है। जाति आधारित गणना में सभी वर्गों को मिलाकर बिहार में लगभग 94 लाख गरीब परिवार पाये गये हैं, उन सभी परिवार के एक सदस्य को रोजगार हेतु 2 लाख रूपये तक की राशि किश्तों में उपलब्ध करायी जायेगी।
63,850 आवासहीन एवं भूमिहीन परिवारों को मिलेगा 1 लाख रूपये का लाभ
बुधवार की कैबिनेट बैठक में बिहार सरकार ने जातीय गणना की रिपोर्ट के आधार पर राज्य के वैसे लोग जिनके पास अपना घर नहीं है उनके लिए भी प्रस्ताव पारित किया। जानकारी के मुताबिक, राज्य के 63,850 आवासहीन एवं भूमिहीन परिवारों को जमीन क्रय के लिए दी जा रही 60 हजार रूपये की राशि की सीमा को बढ़ाकर 1 लाख रूपये कर दिया गया है। साथ ही इन परिवारों को मकान बनाने के लिए 1 लाख 20 हजार रूपये दिये जायेंगे। जो 39 लाख परिवार झोपड़ियों में रह रहे हैं उन्हें भी पक्का मकान मुहैया कराया जायेगा। जिसके लिए प्रति परिवार 1 लाख 20 हजार रूपये की दर से राशि उपलब्ध करायी जायेगी। सतत् जीविकोपार्जन योजना के अन्तर्गत अत्यंत निर्धन परिवारों की सहायता के लिए अब 01 लाख रूपये के बदले 02 लाख रूपये दिये जायेंगे। इन योजनाओं के क्रियान्वयन में लगभग 2 लाख 50 हजार करोड़ रूपये की राशि व्यय होगी।
सीएम बोले- लोगों के हित को ध्यान में रखते हुये केन्द्र बिहार को शीघ्र विशेष राज्य का दर्जा दे
वहीं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने फेसबुक पर लंबा पोस्ट करते हुए कहा कि बिहार सरकार ने देश में पहली बार जातीय गणना कराकर इतिहास रचा। वहीं अब गणना की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में आरक्षण का दायरा भी बढ़ाया गया है और अन्य योजनाओं को भी सुचारू रूप से चलाया जाएगा इसके लिए केंद्र के सहयोग से दी जाने वाली राशि से योजनाओं के समय पूर्ति में 5 सालों का वक्त निर्धारित किया गया है लेकिन अगर बिहार सरकार को विशेष राज्य का दर्जा केंद्र सरकार की ओर से मिल जाएगा तो यह काम तकरीबन दो सालों में पूरा होने की संभावनाएं हैं। मुख्यमंत्री ने कहा की हमलोग बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की माँग वर्ष 2010 से ही कर रहे हैं। इसके लिए 24 नवम्बर, 2012 को पटना के गाँधी मैदान में तथा 17 मार्च, 2013 को दिल्ली के रामलीला मैदान में बिहार को विशेष राज्य के दर्जे के लिए अधिकार रैली भी की थी। हमारी माँग पर तत्कालीन केन्द्र सरकार ने इसके लिए रघुराम राजन कमेटी भी बनाई थी जिसकी रिपोर्ट सितम्बर, 2013 में प्रकाशित हुई थी परन्तु उस समय भी तत्कालीन केन्द्र सरकार ने इसके बारे में कुछ नहीं किया। मई, 2017 में भी हमलोगों ने विशेष राज्य का दर्जा देने के लिए केन्द्र सरकार को पत्र लिखा था। आज कैबिनेट की बैठक में बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने हेतु केन्द्र सरकार से अनुरोध करने का प्रस्ताव पारित किया गया है। मेरा अनुरोध है कि बिहार के लोगों के हित को ध्यान में रखते हुये केन्द्र सरकार बिहार को शीघ्र विशेष राज्य का दर्जा दे।
अब 60 हजार तक का फोन खरीद सकते हैं कर्मचारी
सरकारी सेवकों को मोबाइल खरीदारी के दाम में इजाफा किया गया है। कर्मचारी अब अधिकतम 60 हजार रुपए के फोन खरीद सकते हैं। विभागाध्यक्ष यानी अखिल भारतीय सेवाओं के सभी ऑफिसर को 50 हजार रुपए, वेतनमान 12,13, और 14 तक के ऑफिसर को 25 हजार रुपए और वेतन स्तर 9 से 11 तक के पदाधिकारी को 15 हजार रुपए तक का फोन मिलेगा।
बस की खरीदारी पर पांच लाख रुपए का अनुदान
बिहार सरकार बस की खरीदारी पर पांच लाख रुपए का अनुदान देगी। हर प्रखंड में 7 बसों के लिए अनुदान दिया जाएगा। एससी, ईबीसी और ओबीसी के दो दो और जनरल वर्ग के एक लाभुक को अनुदान दिया जाएगा। बिहार में कुल 3 हजार 6 सौ बस खरीदी जाएगी।
पिछली बैठक में आरक्षण बढ़ाने पर फैसला
पिछले सप्ताह हुई कैबिनेट की बैठक में सरकार ने पिछड़ा, अति पिछड़ा और एससी-एसटी को दी जाने वाली आरक्षण की सीमा 50% से 65% करने का फैसला लिया था। जातीय गणना की रिपोर्ट जारी होने के बाद नीतीश सरकार का यह बड़ा फैसला था। इसी कारण पिछली बैठक में डीए पर फैसला नहीं हो पाया। कैबिनेट की बैठक को लेकर मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग की ओर से पहले ही लेटर जारी किया जा चुका था। सभी मंत्रियों को इसकी सूचना भी दी गई है और संबंधित विभाग को तैयारी के लिए भी निर्देश दिया गया। कैबिनेट की बैठक में डीए सहित नौकरी रोजगार को लेकर भी सरकार बड़ा फैसला लिया गया।


