भोजपुरी संगीत में हिंसा और हथियार का बढ़ता क्रेज: समाज के लिए खतरे की घंटी, बेखबर हुआ प्रशासन

बिहटा, (मोनू कुमार मिश्रा)। भोजपुरी भाषा और संस्कृति अपनी मिठास, जीवंतता और लोकजीवन की सहजता के लिए जानी जाती रही है। कभी यह गीत खेत–खलिहान, श्रम और प्रेम की भावनाओं को अभिव्यक्त करने का माध्यम थे। लेकिन वर्तमान समय में भोजपुरी संगीत की दिशा चिंताजनक रूप से बदलती दिख रही है। आज बड़ी संख्या में ऐसे गीत सामने आ रहे हैं, जिनमें अश्लीलता, हिंसा और हथियारों का खुला प्रदर्शन हो रहा है। यह प्रवृत्ति केवल संगीत की गुणवत्ता को गिरा नहीं रही, बल्कि समाज पर भी गहरा नकारात्मक असर डाल रही है।ताज़ा दौर में इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रहे भोजपुरी गानों पर नज़र डालें, तो साफ दिखता है कि युवा बंदूक, रायफल और गोली–बारूद जैसे प्रतीकों के साथ वीडियो बनाकर उन्हें बढ़ावा दे रहे हैं। “रोज घरेला आवे का थाना हमार” या “रेल दिया जाएगा, राइफल उठा लेंगे” जैसे गीत सीधे–सीधे हथियार संस्कृति को महिमामंडित कर रहे हैं। युवा पीढ़ी इन गानों से प्रभावित होकर हथियारों को ताकत और स्टेटस सिंबल के रूप में देखने लगी है। यह प्रवृत्ति न केवल सामाजिक संतुलन को बिगाड़ रही है बल्कि अपराध के प्रति एक खतरनाक आकर्षण भी पैदा कर रही है। समाजशास्त्रियों और शिक्षाविदों का मानना है कि मनोरंजन के नाम पर हिंसा और अपराध का ऐसा चित्रण समाज को गलत दिशा की ओर धकेल सकता है। संगीत और कला का उद्देश्य हमेशा से समाज को जोड़ना, सकारात्मक भावनाओं को जागृत करना और जीवन में आशा का संचार करना रहा है। लेकिन जब यही कला नकारात्मक प्रवृत्तियों का पोषण करने लगे, तो यह सामाजिक ताने–बाने के लिए खतरे का संकेत बन जाती है। युवाओं में अपराध की मानसिकता का पनपना और हथियारों को ‘हीरोइक’ मान लेना आने वाले समय में गंभीर सामाजिक समस्याओं को जन्म दे सकता है। स्थानीय लोगों का भी कहना है कि प्रशासन को इस दिशा में कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है। जिन गीतों में हिंसा, हथियार या अश्लीलता का प्रचार–प्रसार हो, उन पर रोक लगाई जानी चाहिए। साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस तरह के कंटेंट को मॉनिटर करने की भी सख्त जरूरत है। भोजपुरी संस्कृति की जड़ें बेहद गहरी और समृद्ध हैं। यदि इसे बचाना है, तो कलाकारों और श्रोताओं दोनों को मिलकर जिम्मेदारी लेनी होगी। कलाकारों को ऐसे गीतों की रचना करनी चाहिए, जो समाज को सही दिशा दें, और युवाओं को भी यह समझना होगा कि हथियार और हिंसा का दिखावा असली ताकत नहीं है। अंततः सवाल यही है कि जब संगीत और कला का उद्देश्य प्रेम, भाईचारा और जीवन की सुंदरता को व्यक्त करना है, तो भोजपुरी संगीत का बड़ा हिस्सा हिंसा और डर फैलाने वाला क्यों बन रहा है? यह समय है सोचने का और सही दिशा में कदम उठाने का, ताकि आने वाली पीढ़ी को एक सकारात्मक और रचनात्मक सांस्कृतिक धरोहर सौंपी जा सके।
