पक्षियों के संरक्षण के लिए बिहार में 2022 में होगी पक्षियों की गिनती, जानिए पूरा मामला

पटना। बिहार में पहली बार वृहत पक्षी गणना की जाएगी। इसकी शुरुआत फरवरी 2022 से की जानी है। इसके लिए हर जिले में कम से कम छह बर्ड वाचर तैयार किये जा रहे हैं। दो साल में गणना पूरा करने का लक्ष्य है। वहीं, नवंबर के पहले हफ्ते से प्रवासी पक्षियों की गणना और अध्ययन शुरू कर दिया गया है। जानकारी के अनुसार,प्रवासी पक्षियों के आने के चालू मौसम (अक्टूबर के अंतिम हफ्ते से मार्च तक) में छह हजार से अधिक प्रवासी पक्षियों के वृहत अध्ययन का लक्ष्य रखा गया है। उन पक्षियों की रिंगिंग भी की जाएगी। बिहार सरकार के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के आदेश पर सभी विशेषज्ञ जिलों में ऐसे लोगों की पहचान कर रहे हैं, जो पक्षीविज्ञान में डिग्रीधारी के साथ ही ऐसे कामों में रुचि रखने वाले हों।

बिहार में हैं 400 से अधिक प्रजातियों के पक्षी

बिहार सरकार ने जनवरी में ‘बर्डस ऑफ बिहार’ नाम की दो पुस्तकें प्रकाशित की हैं। इनमें काफी हद तक पक्षियों की प्रजातियों को संकलित करने का प्रयास किया गया है। इसके अनुसार सूबे में 400 से अधिक प्रजातियों के पक्षी पाये जाते हैं। जबकि, ‘ई-बर्ड इंडिया’के अनुसार सूबे में 73 फैमिली की 339 प्रजातियां पायी जाती हैं। लेकिन, अबतक सूबे में वृहत तरीके से पक्षी गणना नहीं हुई है।

बिहार में काफी घट गए है प्रवासी पक्षी

वर्ष 2010-11 तक सूबे में पांच लाख से अधिक प्रवासी पक्षियां बिहार आते थे। इनमें अकेले बेगूसराय की काबर झील में सवा से डेढ़ लाख पक्षी आते थे। लेकिन, अब पूरे सूबे में बमुश्किल 50 हजार तो काबर झील में 10 हजार के आसपास पक्षियां आते हैं। शिकारियों की संख्या बढ़ना, फसलचक्र बदलना, रासायनिक कीटनाशकों का अधिक उपयोग इसके कारक हैं। वहीं दूसरी ओर, जलस्रोतों में पानी का तान अधिक रहने के बाद अचानक सूख जाना एक महत्वपूर्ण कारण है।

You may have missed