January 31, 2026

कर्नाटक में सीएम पद को लेकर टकराव, शिवकुमार बोले- हमेशा प्रदेश अध्यक्ष नहीं रहूंगा, अब फ्रंटलाइन में आकर लीड करूंगा

बेंगलुरु। कर्नाटक कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन और मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही संभावित खींचतान एक बार फिर चर्चा में है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने हाल ही में दिए एक बयान से संकेत दिया है कि वे जल्द ही प्रदेश अध्यक्ष पद छोड़ सकते हैं। उनके इस बयान ने पार्टी के भीतर फिर से यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन की तैयारी चल रही है।
इंदिरा गांधी जयंती कार्यक्रम में बयान से बढ़ी हलचल
बेंगलुरु में आयोजित एक कार्यक्रम में शिवकुमार ने कहा कि वे इस पद पर हमेशा नहीं रह सकते। उन्होंने उल्लेख किया कि वे साढ़े पांच साल से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हैं और मार्च तक उनका कार्यकाल छह वर्ष का हो जाएगा। शिवकुमार ने कहा कि अब दूसरे नेताओं को भी अवसर मिलना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे नेतृत्व में बने रहेंगे और फ्रंट लाइन से पार्टी का काम आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने कार्यकर्ताओं को आश्वस्त करते हुए कहा कि वे पार्टी के साथ मजबूती से बने रहेंगे, चाहे पद पर रहें या नहीं।
सीएम पद को लेकर खींचतान की अटकलें
शिवकुमार का यह बयान ऐसे समय आया है जब कर्नाटक में सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर तनाव की चर्चा पहले से ही जारी है। कांग्रेस सरकार ने मई 2023 में सत्ता संभाली थी और अब लगभग डेढ़ साल का समय पूरा होने वाला है। चुनाव के वक्त दोनों नेताओं के बीच सीएम पद को लेकर लंबी बातचीत हुई थी। पार्टी का ‘वन मैन, वन पोस्ट’ नियम सिद्धारमैया के पक्ष में गया और वे मुख्यमंत्री बने। उस समय खबरें थीं कि रोटेशनल सीएम का फॉर्मूला लागू किया गया है जिसके तहत दोनों नेता ढाई-ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री बनेंगे। यह अवधि इसी महीने पूरी हो रही है, जिससे अटकलें फिर गर्म हो गई हैं।
सिद्धारमैया का मजबूत संकेत
दूसरी तरफ मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने भी स्पष्ट संकेत दिया है कि वह अपना कार्यकाल जारी रखना चाहते हैं।
बेंगलुरु में एक समारोह में उन्होंने कहा कि जब वे पहली बार वित्त मंत्री बने थे तब उनके बारे में तंज कसा गया था, लेकिन उन्होंने चुनौती स्वीकार की और अब तक 16 बजट पेश कर चुके हैं। वे अगले वर्ष 17वां बजट पेश करने की तैयारी में हैं। सिद्धारमैया के इस बयान को उनके समर्थक उनके कार्यकाल जारी रखने के संकेत के रूप में देख रहे हैं।
दिल्ली में हुई मुलाकातों ने बढ़ाई चर्चाएं
हाल ही में सिद्धारमैया और शिवकुमार दोनों ने दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की। हालांकि पार्टी नेताओं ने इसे सामान्य मुलाकात बताया, लेकिन सूत्रों का कहना है कि बैठक में मंत्रिमंडल विस्तार और नेतृत्व परिवर्तन पर भी चर्चा हुई। यदि कांग्रेस हाईकमान कैबिनेट में फेरबदल को मंजूरी देता है, तो यह इस बात का संकेत हो सकता है कि सिद्धारमैया अपना कार्यकाल पूरा करेंगे और नेतृत्व परिवर्तन फिलहाल दूर है। इससे शिवकुमार की सीएम बनने की संभावना कम हो सकती है।
कांग्रेस में अंदरूनी राजनीति और संभावनाएँ
कई कांग्रेस नेताओं का मानना है कि शिवकुमार की महत्वाकांक्षाएँ अब भी मजबूत हैं। चुनाव अभियान में उनकी सक्रियता, पार्टी के संगठन में उनकी भूमिका और मजबूत कैडर आधार उन्हें सीएम पद के दावेदारों में शीर्ष पर रखता है। हालांकि, सिद्धारमैया भी लंबे समय से पार्टी की राजनीति में प्रमुख चेहरे रहे हैं और उनका सामाजिक आधार मजबूत है, जिससे नेतृत्व परिवर्तन आसान नहीं दिखता। पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि शिवकुमार 2024 लोकसभा चुनावों तक प्रदेश अध्यक्ष पद पर बने रहेंगे। अब जब लोकसभा चुनाव बीत चुके हैं, तो नेतृत्व में बदलाव की चर्चा फिर तेज हो गई है।
भविष्य की दिशा क्या होगी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस हाईकमान फिलहाल स्थिर सरकार को तवज्जो देगा और किसी बड़े बदलाव से बचना चाहेगा। कर्नाटक कांग्रेस सरकार अपने पांच वर्ष के कार्यकाल में ढाई साल पूरा करने वाली है और ऐसे चरण में नेतृत्व परिवर्तन जोखिम भरा माना जाता है। हालांकि, पार्टी के भीतर कुछ धड़ों का मानना है कि रोटेशनल फॉर्मूला लागू होना चाहिए, जबकि दूसरे नेता इसे अव्यवहारिक बताते हैं। कर्नाटक में कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति एक बार फिर गति पकड़ चुकी है। शिवकुमार का पद छोड़ने का संकेत और सिद्धारमैया का बजट के प्रति उत्साह, दोनों ही अपने-अपने राजनीतिक संदेश दे रहे हैं। अभी नेतृत्व परिवर्तन को लेकर कोई निश्चित निर्णय नहीं हुआ है, लेकिन बदलते राजनीतिक माहौल और हाईकमान की भूमिका आने वाले महीनों में स्पष्ट कर देगी कि कर्नाटक में सत्ता की कमान किसके हाथ में रहेगी।

You may have missed