दरभंगा में दसवीं की छात्रा ने की आत्महत्या, फांसी लगाकर दी जान
दरभंगा। जिले से एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जहां दसवीं कक्षा में पढ़ने वाली एक नाबालिग छात्रा ने आत्महत्या कर ली। यह घटना न सिर्फ एक परिवार की व्यक्तिगत त्रासदी है, बल्कि समाज में किशोरियों के सामने खड़ी मानसिक, सामाजिक और पारिवारिक चुनौतियों को भी उजागर करती है। मामले में परिजनों ने गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि पुलिस का कहना है कि जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी। यह मामला दरभंगा जिले के बिशनपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत हरचंदा गांव का है। मृतका की पहचान फूदन साह की पुत्री अंजली कुमारी के रूप में हुई है। अंजली दसवीं कक्षा की छात्रा थी और अपने माता-पिता के साथ गांव में रहती थी। परिजनों के अनुसार, अंजली पढ़ाई में सामान्य थी और रोजमर्रा के घरेलू जीवन में भी सहयोग करती थी। लेकिन बीते कुछ समय से वह मानसिक रूप से काफी परेशान नजर आ रही थी।
परिवार का आरोप और घटनाक्रम
मृतका के पिता फूदन साह ने बताया कि वे बुधवार की सुबह रोज की तरह सब्जी बेचने के लिए घर से बाहर गए थे। इसी दौरान गांव का एक युवक, जो रिश्ते में अंजली का भाई लगता था, अपने परिजनों के साथ उनके घर पहुंच गया। आरोप है कि उस युवक ने अंजली पर शादी करने का दबाव बनाया और घर में हंगामा किया। यह स्थिति अंजली के लिए असहनीय हो गई। परिजनों का कहना है कि इसी मानसिक आघात के चलते अंजली ने घर के अंदर गमछे से फंदा बनाकर आत्महत्या कर ली। परिवार का यह भी कहना है कि आरोपी युवक की उम्र करीब 33 वर्ष है और वह लंबे समय से अंजली पर एकतरफा प्रेम का दबाव बना रहा था। वह बार-बार फोन करके उसे परेशान करता था और घर से भागने तक का दबाव देता था। अंजली पांच भाई-बहनों में सबसे छोटी थी और लगातार मानसिक प्रताड़ना के कारण अंदर ही अंदर टूट चुकी थी।
पहले से की गई शिकायत का दावा
परिजनों ने यह भी दावा किया है कि आरोपी युवक की हरकतों को लेकर पहले भी थाने में आवेदन दिया गया था। उनका कहना है कि उन्होंने पुलिस को इस बारे में अवगत कराया था कि युवक उनकी नाबालिग बेटी को परेशान कर रहा है। हालांकि, उस समय मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी। परिजनों का मानना है कि यदि समय रहते सख्त कदम उठाया गया होता, तो शायद आज उनकी बेटी जिंदा होती।
पुलिस का पक्ष और प्रारंभिक जांच
इस मामले में बिशनपुर थानाध्यक्ष अरविंद कुमार ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची। कमरे से शव को बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि फिलहाल इस मामले में कोई लिखित शिकायत प्राप्त नहीं हुई है, जिसके कारण प्राथमिकी दर्ज नहीं की जा सकी है। थानाध्यक्ष के अनुसार, प्रारंभिक जांच में प्रेम-प्रसंग या छेड़छाड़ से जुड़ा कोई ठोस साक्ष्य सामने नहीं आया है। हालांकि, पुलिस किसी भी पहलू को नजरअंदाज नहीं कर रही है। आवेदन मिलने पर मामले की गंभीरता से जांच की जाएगी और यदि किसी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का यह भी कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
गांव और समाज में शोक का माहौल
घटना के बाद हरचंदा गांव में शोक का माहौल है। अंजली की मौत से गांव के लोग स्तब्ध हैं। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और मां का दुख देख आसपास के लोग भी भावुक हो उठे। गांव की महिलाएं इस घटना को समाज के लिए चेतावनी मान रही हैं और कह रही हैं कि नाबालिग लड़कियों पर किसी भी तरह का दबाव बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।
मानसिक प्रताड़ना और किशोरियों की स्थिति
यह घटना एक बार फिर इस बात की ओर इशारा करती है कि किशोर उम्र में मानसिक दबाव, सामाजिक डर और बदनामी की आशंका बच्चों को किस कदर तोड़ सकती है। नाबालिग लड़कियां अक्सर अपनी परेशानी खुलकर कह नहीं पातीं और भीतर ही भीतर घुटती रहती हैं। ऐसे मामलों में परिवार, समाज और प्रशासन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। दरभंगा की यह घटना केवल एक आत्महत्या का मामला नहीं है, बल्कि यह समाज के सामने कई सवाल खड़े करती है। क्या नाबालिगों की शिकायतों को पर्याप्त गंभीरता से लिया जा रहा है, क्या मानसिक उत्पीड़न को समय रहते रोका जा सकता है और क्या परिवारों को बच्चों के मनोवैज्ञानिक हालात को समझने के लिए और सतर्क होने की जरूरत है। फिलहाल पुलिस जांच में जुटी हुई है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। लेकिन अंजली की मौत एक ऐसी त्रासदी बन गई है, जो लंबे समय तक लोगों को सोचने पर मजबूर करती रहेगी।


