विधान परिषद में राबड़ी और नीतीश की भिड़ंत, सीएम बोले- सब अनाप-शनाप कपड़ा पहनकर आया, दूसरों की भी बात सुनो
पटना। बिहार विधान परिषद में मानसून सत्र के पांचवें दिन शुक्रवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और विपक्ष की नेता राबड़ी देवी के बीच जमकर बहस हुई। सदन की शुरुआत से ही माहौल तनावपूर्ण था, लेकिन जैसे ही विपक्ष ने मुख्यमंत्री के खिलाफ नारेबाजी शुरू की, स्थिति और बिगड़ गई।
काले कपड़ों पर मुख्यमंत्री की आपत्ति
सदन में विपक्षी दलों के कई नेता काले कपड़े पहनकर पहुंचे थे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसी बात को लेकर आपत्ति जताई और अपनी सीट से उठकर राबड़ी देवी की ओर इशारा करते हुए कहा कि “सब अनाप-शनाप कपड़ा पहनकर आए हो”। उन्होंने कहा कि “हाय-हाय नहीं, ये सब घाय-घाय है।” मुख्यमंत्री का यह बयान सीधे तौर पर राबड़ी देवी और उनके समर्थकों को निशाना बनाकर दिया गया था।
राबड़ी देवी का पलटवार
नीतीश कुमार की टिप्पणी पर राबड़ी देवी भी पीछे नहीं रहीं। उन्होंने जवाब में कहा कि मुख्यमंत्री को जनता के बीच जाकर अपनी जवाबदेही देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्ष सवाल पूछ रहा है, लेकिन मुख्यमंत्री केवल टालने की कोशिश कर रहे हैं। राबड़ी ने यह भी कहा कि सदन में सरकार की जिम्मेदारी है कि वह विपक्ष की बातों को सुने, न कि उनकी वेशभूषा पर टिप्पणी करे।
अध्यक्ष को करना पड़ा हस्तक्षेप
जैसे-जैसे बहस तीखी होती गई, सदन का माहौल और अधिक अराजक होता चला गया। मुख्यमंत्री और विपक्ष के बीच की तीखी बहस ने पूरे सदन को विवादों की आग में झोंक दिया। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि विधान परिषद के अध्यक्ष अवधेश नारायण सिंह को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने सदन को दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया ताकि माहौल शांत किया जा सके।
लगातार बढ़ रहा टकराव
यह पहली बार नहीं है जब बिहार विधानसभा और परिषद में ऐसा दृश्य देखने को मिला हो। मानसून सत्र की शुरुआत से ही सदन का माहौल गरमाया हुआ है। बीते गुरुवार को सदन में गाली-गलौज से लेकर धक्का-मुक्की और हाथापाई तक की नौबत आ चुकी है। ‘SIR’ और मतदाता पुनरीक्षण जैसे मुद्दों पर सत्तापक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं और कोई भी पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहा।
विपक्ष का प्रदर्शन और आगे भी जारी रहने के आसार
शुक्रवार को भी विपक्ष ने संकेत दिए हैं कि उनका विरोध और तीव्र होगा। विपक्ष सरकार से पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहा है। उनका आरोप है कि सरकार सदन में विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। वहीं सत्ता पक्ष विपक्ष पर सदन को बाधित करने और अनुशासनहीनता का आरोप लगा रहा है। बिहार विधान परिषद का यह सत्र न सिर्फ राजनीतिक असहमति का प्रतीक बन गया है, बल्कि लोकतांत्रिक मर्यादाओं पर भी सवाल खड़े करता है। वेशभूषा को लेकर उठे विवाद ने यह दिखा दिया कि सत्ता और विपक्ष के बीच संवाद की जगह अब आरोप-प्रत्यारोप और कटाक्ष ने ले ली है। अब देखना यह होगा कि क्या अगले दिनों में सदन में कोई ठोस चर्चा हो सकेगी या हंगामे का यह दौर जारी रहेगा।


