February 10, 2026

पटना में अतिक्रमण हटाने में पुलिस और लोगों की झड़प, कई लोग घायल, पुलिस टीम पर पथराव

पटना। राजधानी पटना में अतिक्रमण हटाने के दौरान एक बार फिर हालात बेकाबू हो गए। कंकड़बाग इलाके में मेदांता अस्पताल के समीप सोमवार को चलाए जा रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान प्रशासनिक टीम और स्थानीय लोगों के बीच तीखी झड़प हो गई। इस दौरान पुलिस पर पथराव किया गया, जिसमें कई पुलिसकर्मी और स्थानीय लोग घायल हो गए। स्थिति को संभालने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल बुलाना पड़ा, जिसके बाद कहीं जाकर हालात पर काबू पाया जा सका।
अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत कार्रवाई
पटना नगर निगम और पुलिस की संयुक्त टीम शहर में चल रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत सोमवार को कंकड़बाग स्थित मेदांता अस्पताल के आसपास पहुंची थी। प्रशासन का कहना था कि सड़क किनारे और सरकारी जमीन पर अवैध रूप से झुग्गी-झोपड़ी बनाकर रहने से यातायात बाधित हो रहा था और आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। इसी वजह से इस इलाके को अभियान के लिए चिह्नित किया गया था।
शुरुआत में शांत, फिर बढ़ा तनाव
अभियान की शुरुआत में नगर निगम कर्मियों ने स्थानीय लोगों से अतिक्रमण हटाने की अपील की। मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने बताया कि अधिकारियों ने पहले कहा था कि लोग खुद अपनी झुग्गी-झोपड़ी हटा लें। कई परिवारों ने प्रशासन की बात मानते हुए अपने अस्थायी ढांचों को आंशिक रूप से हटाना भी शुरू कर दिया। हालांकि कुछ ही देर बाद जब जेसीबी और अन्य उपकरणों से तोड़फोड़ की प्रक्रिया तेज की गई, तो लोगों में नाराजगी फैल गई।
स्थानीय लोगों का आरोप, बिना व्यवस्था हटाया जा रहा
झुग्गी में रहने वाले लोगों का कहना है कि उन्हें हटाने से पहले न तो कोई ठोस सूचना दी गई और न ही पुनर्वास की कोई स्पष्ट योजना बताई गई। कई लोगों ने आरोप लगाया कि वे वर्षों से वहां रह रहे हैं और अचानक इस कार्रवाई से उनके सामने रहने और रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। इसी आक्रोश के चलते लोगों ने प्रशासन का विरोध करना शुरू कर दिया।
पुलिस और लोगों के बीच झड़प
विरोध के दौरान स्थिति तेजी से तनावपूर्ण हो गई। देखते ही देखते पुलिस और स्थानीय लोगों के बीच नोकझोंक शुरू हो गई, जो बाद में झड़प में बदल गई। आरोप है कि कुछ उपद्रवी तत्वों ने पुलिस टीम पर पथराव शुरू कर दिया। पथराव में कई पुलिसकर्मी घायल हो गए, जबकि कुछ स्थानीय लोगों को भी चोटें आईं। अफरा-तफरी के बीच लोग इधर-उधर भागते नजर आए और इलाके में दहशत का माहौल बन गया।
अतिरिक्त बल बुलाकर संभाले गए हालात
स्थिति बिगड़ती देख आसपास के थानों से अतिरिक्त पुलिस बल को मौके पर बुलाया गया। भारी संख्या में पुलिस की तैनाती के बाद धीरे-धीरे हालात पर काबू पाया गया। पुलिस ने मेदांता अस्पताल और आसपास के इलाकों में सुरक्षा घेरा मजबूत कर दिया, ताकि कोई नई अप्रिय घटना न हो। घायल पुलिसकर्मियों और स्थानीय लोगों को नजदीकी अस्पतालों में इलाज के लिए भेजा गया।
इलाके में तनाव, बढ़ाई गई गश्त
घटना के बाद कंकड़बाग और आसपास के क्षेत्रों में तनाव का माहौल बना हुआ है। पुलिस ने एहतियात के तौर पर इलाके में गश्त बढ़ा दी है। अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है और किसी भी तरह की अराजकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मेदांता अस्पताल के आसपास भी पुलिस की तैनाती की गई है, ताकि मरीजों और उनके परिजनों को किसी तरह की परेशानी न हो।
नगर निगम का पक्ष
नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पूरी तरह नियमानुसार की जा रही है। उनके मुताबिक, इस इलाके में अवैध निर्माण की शिकायतें लगातार मिल रही थीं और यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही थी। निगम का दावा है कि कार्रवाई से पहले लोगों को सूचना दी गई थी। अधिकारियों ने यह भी कहा कि जिन लोगों के पास वैध दस्तावेज होंगे, उनके मामलों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा।
पुलिस कर रही जांच
पुलिस ने पथराव और सरकारी कार्य में बाधा डालने के मामले में जांच शुरू कर दी है। कुछ लोगों की पहचान की जा रही है और वीडियो फुटेज के आधार पर उपद्रवियों को चिन्हित किया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि झड़प कैसे और किन परिस्थितियों में हिंसक रूप ले गई।
पुनर्वास और संवाद की जरूरत
इस घटना ने एक बार फिर अतिक्रमण हटाने के दौरान पुनर्वास और संवाद के महत्व को उजागर किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच बेहतर संवाद और वैकल्पिक व्यवस्था पहले से तय हो, तो इस तरह की हिंसक घटनाओं से बचा जा सकता है। अतिक्रमण हटाने की जरूरत और लोगों की मजबूरी के बीच संतुलन बनाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। कंकड़बाग में हुई यह झड़प न सिर्फ प्रशासनिक कार्रवाई की कठिनाइयों को दिखाती है, बल्कि यह भी बताती है कि बिना भरोसे और पुनर्वास के अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई अक्सर टकराव का रूप ले लेती है। फिलहाल हालात नियंत्रण में हैं, लेकिन इलाके में तनाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

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