सरकारी स्कूलों में अब पहले से आठवीं तक के बच्चों की चार बार होगी परीक्षाएं, विभाग का आदेश जारी
पटना। बिहार सरकार शिक्षा प्रणाली में सुधार लाने के लिए लगातार नए कदम उठा रही है। इसी क्रम में शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव एस सिद्धार्थ ने एक नया आदेश जारी किया है, जिसके अनुसार राज्य के सभी सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों की अब साल में चार बार परीक्षाएं होंगी। यह नई व्यवस्था आगामी शैक्षणिक सत्र 2025-26 से लागू की जाएगी।
चार मुख्य परीक्षाएं होंगी
नई परीक्षा प्रणाली के तहत छात्रों को अब चार मुख्य परीक्षाओं से गुजरना होगा। इनमें प्रथम त्रैमासिक परीक्षा, अर्धवार्षिक परीक्षा, द्वितीय त्रैमासिक परीक्षा और वार्षिक परीक्षा शामिल हैं। इसका उद्देश्य बच्चों की शैक्षणिक प्रगति का निरंतर मूल्यांकन करना और उन्हें पढ़ाई के प्रति नियमित बनाए रखना है।
मासिक मूल्यांकन भी अनिवार्य
इन चार प्रमुख परीक्षाओं के अलावा अब कक्षा 1 से 8 तक के छात्रों के लिए हर महीने मासिक परीक्षा भी आयोजित की जाएगी। यह व्यवस्था पहले केवल कक्षा 9वीं और 11वीं में लागू थी, लेकिन अब इसे प्राथमिक और माध्यमिक कक्षाओं तक विस्तारित किया जा रहा है। मासिक मूल्यांकन के माध्यम से छात्रों की सीखने की गति और समझ को हर महीने परखा जाएगा।
केंद्रीकृत प्रणाली के तहत परीक्षा
इन सभी परीक्षाओं का आयोजन केंद्रीकृत प्रणाली के तहत किया जाएगा। इसका अर्थ है कि राज्य के सभी विद्यालयों में एक ही समय पर परीक्षा होगी। परीक्षा के प्रश्न पत्र और समय सारणी राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) द्वारा निर्धारित किए जाएंगे। इससे परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और समानता बनी रहेगी।
पहली मासिक परीक्षा की तारीख तय
शैक्षणिक सत्र 2025-26 की पहली मासिक परीक्षा 28 अप्रैल से 30 अप्रैल के बीच आयोजित की जाएगी। परीक्षा दो पालियों में होगी – पहली पाली सुबह 7 बजे से 9 बजे तक और दूसरी पाली सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक। यह तय समय-सारणी सभी स्कूलों में लागू होगी।
उद्देश्य छात्रों की सतत प्रगति सुनिश्चित करना
शिक्षा विभाग के अनुसार, इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य छात्रों का निरंतर और नियमित मूल्यांकन करना है। इससे न केवल छात्रों की पढ़ाई में रुचि बनी रहेगी बल्कि वे समय-समय पर अपनी कमजोरी और मजबूती को पहचानकर सुधार भी कर सकेंगे। यह प्रणाली उन्हें परीक्षा के प्रति मानसिक रूप से तैयार रखने में भी मदद करेगी। बिहार सरकार की यह पहल शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता सुधार की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। नियमित परीक्षाओं से छात्रों की पढ़ाई पर नजर रखना आसान होगा और समय रहते आवश्यक सुधार किए जा सकेंगे। इससे न केवल बच्चों की पढ़ाई मजबूत होगी, बल्कि स्कूलों की शैक्षणिक गतिविधियों में भी सुधार आएगा।


