January 31, 2026

29 को अपने पैतृक गांव पहुंचेंगे मुख्यमंत्री, पिता की पुण्यतिथि पर देंगे श्रद्धांजलि, शुरू हुई तैयारियां

पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 29 नवंबर को अपने पैतृक गांव कल्याणबिगहा पहुंचेंगे, जहां उनके पिता और प्रख्यात वैद्य कविराज राम लखन सिंह की 48वीं पुण्यतिथि मनाई जाएगी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री अपने बड़े भाई सतीश कुमार और बेटे निशांत कुमार के साथ उपस्थित रहकर अपने पिता को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। कार्यक्रम को लेकर गांव में तैयारियां जोरों पर हैं और लोग इस दिन के लिए उत्सुकता से प्रतीक्षा कर रहे हैं।
वाटिका परिसर में शुरू हुई साफ-सफाई और सजावट
पुण्यतिथि समारोह की तैयारियों के तहत कविराज राम लखन सिंह वाटिका परिसर में सफाई अभियान शुरू कर दिया गया है। बराह पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि कमलेश कुमार उर्फ पिंटू यादव ने बताया कि मुख्यमंत्री के आगमन को देखते हुए वाटिका परिसर को भव्य रूप से सजाने की तैयारी की जा रही है। परिसर के प्रवेश द्वार से लेकर मुख्य मंच तक हर व्यवस्था को व्यवस्थित और आकर्षक बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। वाटिका में कविराज राम लखन सिंह की आदमकद प्रतिमा स्थापित है, जहां मुख्यमंत्री पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। इस विशेष अवसर पर सुरक्षा व्यवस्था, मंच सज्जा, बैठने की जगह और श्रद्धांजलि समारोह की अन्य व्यवस्थाओं को लेकर भी तैयारी की जा रही है।
एक कुशल वैद्य और स्वतंत्रता सेनानी की स्मृति में आयोजन
स्थानीय ग्रामीणों और परिवारजनों ने बताया कि कविराज राम लखन सिंह का निधन 29 नवंबर 1978 को हुआ था। वे न केवल एक प्रसिद्ध वैद्य थे, बल्कि एक स्वतंत्रता सेनानी के रूप में देश की आजादी के लिए भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। बख्तियारपुर में रहते हुए उन्होंने अपना जीवन समाजसेवा, दवा-इलाज और लोगों की मदद के लिए समर्पित कर दिया था। उनकी ख्याति दूर-दूर तक फैली हुई थी और वे अपनी चिकित्सा क्षमता और सेवा भाव के लिए विशेष रूप से जाने जाते थे। ग्रामीण बताते हैं कि वे बिना स्वार्थ के लोगों की सहायता करते थे और कई गंभीर रोगियों का इलाज कर उन्हें जीवनदान देते थे। यही कारण है कि आज भी गांव और आसपास के क्षेत्रों में लोग उन्हें श्रद्धाभाव से याद करते हैं।
वाटिका परिसर में स्थापित परिवार की प्रतिमाएं
कविराज राम लखन सिंह वाटिका केवल एक स्मारक स्थल नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के परिवार के प्रति सम्मान और प्रेम का प्रतीक बन चुकी है। यहां स्व. राम लखन सिंह के अलावा मुख्यमंत्री की मां और पत्नी की भी आदमकद प्रतिमाएं स्थापित हैं। यह वाटिका स्थानीय लोगों के लिए आस्था और भावनाओं का केंद्र है, जहां वे समय-समय पर श्रद्धा अर्पित करने आते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस स्थल से जुड़ी हर स्मृति मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पारिवारिक मूल्यों और संस्कारों को दर्शाती है, और यही कारण है कि उनकी हर यात्रा को लोग विशेष महत्व देते हैं।
स्थानीय प्रशासन और पंचायत की तैयारियां
मुख्यमंत्री के आगमन को ध्यान में रखते हुए स्थानीय प्रशासन ने भी तैयारियां तेज कर दी हैं। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है और पुलिस बल की तैनाती की योजना बनाई जा रही है। पंचायत प्रतिनिधियों के साथ मिलकर प्रशासन ने कार्यक्रम स्थल के आसपास की सड़कों की मरम्मत, प्रकाश व्यवस्था और यातायात प्रबंधन पर भी ध्यान देना शुरू कर दिया है। पंचायत प्रतिनिधि कमलेश कुमार ने बताया कि इस वर्ष भी गांव में बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की उम्मीद है। हर साल की तरह इस बार भी श्रद्धांजलि समारोह में आसपास के गांवों से लोग शामिल होंगे। कार्यक्रम को शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित बनाने के लिए स्वयंसेवकों की टीम भी तैयार की जा रही है।
गांव में दिख रहा उत्साह और श्रद्धा का माहौल
कल्याणबिगहा में कविराज राम लखन सिंह की पुण्यतिथि न केवल एक पारिवारिक आयोजन है, बल्कि गांव के लोगों के लिए भावनाओं का दिन है। ग्रामीण कहते हैं कि उनका योगदान और जीवन मूल्यों ने पूरे इलाके को प्रेरित किया है। मुख्यमंत्री की उपस्थिति से यह आयोजन और भी विशेष हो जाता है। गांव में इन दिनों घर-घर में कार्यक्रम की चर्चा है और लोग अपने-अपने स्तर से तैयारियों में सहयोग कर रहे हैं। ग्रामीणों का मानना है कि यह अवसर ना केवल श्रद्धांजलि अर्पित करने का है, बल्कि एक महान व्यक्तित्व के आदर्शों को याद करने का भी है।
29 नवंबर को उमड़ेगी भीड़, होंगे कई कार्यक्रम
पंचायत और प्रशासन ने संकेत दिया है कि 29 नवंबर को वाटिका परिसर में सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों का भी आयोजन किया जा सकता है। श्रद्धांजलि सभा के अलावा गांव में लोगों के लिए विशेष बैठकों और परिचर्चाओं पर भी विचार किया जा रहा है, जिनमें कविराज राम लखन सिंह के जीवन और योगदान पर बात की जाएगी। गांव के लोग उम्मीद कर रहे हैं कि मुख्यमंत्री का यह दौरा उनके लिए विकास और सुविधाओं की ओर भी नई संभावनाएं खोलेगा। फिलहाल गांव में तैयारियों की गति बढ़ गई है और लोग 29 नवंबर का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

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