राज्यसभा जाने की तैयारी में मुख्यमंत्री, बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत

  • नामांकन के बाद समयसीमा का संकेत, अप्रैल मध्य तक इस्तीफे और नए मुख्यमंत्री पर फैसला संभव
  • एनडीए में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें तेज, कई नाम चर्चा में

पटना। बिहार की राजनीति एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर खड़ी नजर आ रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद राज्य में सत्ता परिवर्तन को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। हाल ही में विधानसभा परिसर में राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल करने पहुंचे मुख्यमंत्री ने अनौपचारिक बातचीत में यह संकेत दिया कि वे “एक महीना पांच दिन” तक बिहार में रहेंगे, जिससे राजनीतिक हलकों में समयसीमा को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। राजनीतिक जानकार इस बयान को 10 अप्रैल तक की अवधि से जोड़कर देख रहे हैं। 9 अप्रैल को उन राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, जिनकी सीटों पर हाल ही में चुनाव हुआ था और जिनमें नीतीश कुमार भी विजयी घोषित किए गए हैं। इसके बाद घटनाक्रम तेजी से आगे बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, 12 अप्रैल के आसपास मुख्यमंत्री दिल्ली जा सकते हैं और 13 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ग्रहण कर सकते हैं। इसके बाद वे वापस बिहार लौटेंगे और 14 या 15 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। उसी दिन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के विधायक दल की बैठक के बाद नए मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा होने की संभावना है। हालांकि, अभी तक किसी भी दल की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। नामांकन के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, विजय कुमार सिन्हा और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। इससे इस राजनीतिक घटनाक्रम की गंभीरता और महत्व का अंदाजा लगाया जा सकता है। इस बीच मुख्यमंत्री अपने निर्धारित कार्यक्रमों में व्यस्त हैं। 26 मार्च को नालंदा और पटना में समृद्धि यात्रा का समापन, 27 मार्च को रामनवमी कार्यक्रम में भागीदारी, 31 मार्च को नालंदा अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति के साथ उपस्थिति और 4 अप्रैल को मोतिहारी में केंद्रीय विश्वविद्यालय के कार्यक्रम में भागीदारी तय है। कानूनी प्रावधानों के अनुसार, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के तहत किसी व्यक्ति को एक साथ दो सदनों की सदस्यता रखने की अनुमति नहीं है। ऐसे में नीतीश कुमार को 14 दिनों के भीतर बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा देना अनिवार्य होगा। यदि वे ऐसा नहीं करते हैं, तो उनकी राज्यसभा की सदस्यता स्वतः समाप्त हो सकती है। नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर भी इस बदलाव के साथ एक नए दौर में प्रवेश कर सकता है। वर्ष 2006 से लगातार विधान परिषद के सदस्य रहे नीतीश ने मुख्यमंत्री रहते हुए कभी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा और परिषद के माध्यम से ही राजनीति करते रहे। अब राज्यसभा में जाने के साथ उनका यह लंबा सफर समाप्त होता दिख रहा है। राजनीतिक गलियारों में नए मुख्यमंत्री के नाम को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। इसके अलावा संजीव चौरसिया, नित्यानंद राय और मंगल पांडेय के नाम भी संभावित दावेदारों में शामिल हैं। कुछ चर्चाओं में अत्यंत पिछड़ा वर्ग से किसी नए चेहरे को आगे लाने की संभावना भी जताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, भारतीय जनता पार्टी पहली बार बिहार में मुख्यमंत्री पद संभाल सकती है। नए नेता के चयन के लिए केंद्रीय नेतृत्व की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है और अंतिम निर्णय विधायक दल की बैठक में लिया जाएगा। यह भी चर्चा है कि मुख्यमंत्री के इस्तीफे से पहले विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जा सकता है, जिसमें उनके कार्यकाल के लिए आभार व्यक्त किया जाएगा, जैसा कि अन्य राज्यों में पहले भी देखा गया है। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। फिलहाल, सभी की नजर आने वाले दिनों पर टिकी है, जब बिहार की राजनीति में संभावित बदलाव की तस्वीर स्पष्ट होगी।

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