कटघरे में मुख्यमंत्री : भाजपा ने पूछा- क्या नीतीश सरकार सिख, ईसाई और बौद्ध को अल्पंसख्यक नहीं मानती है, आयोग से क्यों किया गया दूर?
पटना। लंबे अरसे के बाद नीतीश सरकार ने अल्पसंख्यक आयोग का गठन किया है। इसमें अध्यक्ष समेत कुल 9 लोगों को शामिल किया गया है। सबसे खास बात यह कि 9 में 8 मुस्लिम समाज से हैं। वही अल्पसंख्यक समाज में सिख, ईसाई और बौद्ध भी शामिल है। वही नई कमेटी में अन्य अल्पसंख्यक समाज से सिर्फ एक जगह दी गई है। वही इस पर BJP ने कड़ी आपत्ति दर्ज की है। भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री नीतीश मिश्रा ने CM नीतीश से पूछा है कि क्या बिहार सरकार सिख, ईसाई और बौद्ध को अल्पंसख्यक नहीं मानती है? भाजपा के वरिष्ठ नेता व विधायक नीतीश मिश्रा ने कहा है कि अल्पसंख्यक आयोग समाज के अल्पसंख्यक वर्ग के हितों का प्रतिनिधित्व करता है। पूर्व में गठित बिहार अल्पसंख्यक आयोग में अल्पसंख्यक समुदाय के प्रायः सभी धर्मों को प्रतिनिधित्व मिलता था, किंतु वर्तमान में गठित आयोग में इन वर्गों का प्रतिनिधित्व नहीं होने से इनके हित निश्चित ही प्रभावित होंगे। यह आयोग के गठन की मूल भावना के विपरीत है। उन्होंने CM नीतीश से सवाल पूछा है कि क्या बिहार सरकार सिख, ईसाई और बौद्ध को अल्पंसख्यक नहीं मानती है ?
रियाजुल हक को बनाया गया है अध्यक्ष
बता दें की अल्पसंख्यक आयोग के पुर्नगठन में रियाजुल हक़ उर्फ़ राजू को अध्यक्ष बनाया गया है। जबकि, पूर्व विधायक नौशाद आलम को उपाध्यक्ष मनोनित किया गया है। मुज़फ्फर हुसैन राही, महताब आलम उर्फ़ काबुल अहमद, इफ़्तेख़ार खान, उर्फ़ मुन्ना त्यागी, डॉ। इकबाल समी, अफरोज खातून, मुर्तजा अली कैसर, यह सभी मुस्लिम समाज से हैं। मुकेश जैन को भी सदस्य मनोनीत किया गया है। सिर्फ मुकेश जैन ही मुस्लिम बिरादरी से अलग हैं।


