January 16, 2026

लैंड फॉर जॉब मामले में लालू परिवार के खिलाफ आरोप तय, कोर्ट ने 32 आरोपियों को किया बरी

नई दिल्ली/पटना। रेलवे में कथित जमीन के बदले नौकरी देने से जुड़े लैंड फॉर जॉब मामले में राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो की चार्जशीट पर सुनवाई करते हुए लालू प्रसाद यादव, उनके बेटे और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव तथा उनकी पत्नी राबड़ी देवी के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया है। इस फैसले के साथ ही अदालत ने मामले के कई अन्य आरोपियों को राहत भी दी है।
कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया
सीबीआई के विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने की अदालत ने शुक्रवार को यह स्पष्ट किया कि लालू परिवार और कुछ अन्य आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा चलाने के लिए प्रथम दृष्टया पर्याप्त आधार मौजूद हैं। अदालत ने इस मामले में कुल 52 आरोपियों में से 32 को बरी कर दिया, जबकि शेष आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया गया। इस फैसले के बाद अब लालू परिवार को नियमित ट्रायल का सामना करना होगा।
सुनवाई के दौरान अदालत का माहौल
शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत परिसर में काफी गहमागहमी देखने को मिली। लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को छोड़कर अन्य सभी आरोपी अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश हुए। इस दौरान तेजस्वी यादव के साथ उनके बड़े भाई और जदयू नेता तेज प्रताप यादव भी अदालत पहुंचे। मीडिया और राजनीतिक हलकों की निगाहें इस सुनवाई पर टिकी हुई थीं, क्योंकि यह मामला लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है।
क्या है लैंड फॉर जॉब मामला
लैंड फॉर जॉब मामला उस समय का है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र की यूपीए सरकार में रेल मंत्री थे। आरोप है कि उनके कार्यकाल के दौरान रेलवे में ग्रुप डी के पदों पर भर्ती के लिए कई उम्मीदवारों से नौकरी के बदले जमीन ली गई। यह जमीन कथित तौर पर लालू परिवार के सदस्यों और उनके करीबी लोगों के नाम पर बहुत कम कीमत पर रजिस्ट्री कराई गई। जांच एजेंसियों का कहना है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से नियमों के खिलाफ थी और इसमें सरकारी पद का दुरुपयोग किया गया।
सीबीआई की जांच और आरोप
इस मामले की आपराधिक जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो कर रही है। सीबीआई का दावा है कि रेलवे में भर्ती की प्रक्रिया के दौरान पारदर्शिता का पालन नहीं किया गया और निजी लाभ के लिए सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल किया गया। जांच एजेंसी ने चार्जशीट में आरोप लगाया है कि जमीन देने वालों को रेलवे में नौकरी दिलाई गई और बदले में उन्हें आर्थिक लाभ पहुंचाया गया।
ईडी की अलग जांच भी जारी
इस पूरे मामले में केवल सीबीआई ही नहीं, बल्कि प्रवर्तन निदेशालय भी सक्रिय है। ईडी इस केस के मनी लॉन्ड्रिंग पहलू की अलग से जांच कर रही है। एजेंसी का मानना है कि जमीन के लेन-देन से जुड़े पैसों का इस्तेमाल अवैध तरीके से किया गया और इसे वैध दिखाने की कोशिश की गई। ईडी की जांच अभी जारी है और आने वाले समय में इसमें और भी कार्रवाई हो सकती है।
राजनीतिक हलकों में हलचल
अदालत के इस फैसले के बाद बिहार और राष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दल इस फैसले को भ्रष्टाचार के खिलाफ न्यायिक कार्रवाई के रूप में देख रहे हैं, जबकि राजद इसे राजनीतिक प्रतिशोध का मामला बता रहा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि लालू परिवार को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है और अदालत में वे अपना पक्ष मजबूती से रखेंगे।
राजद की प्रतिक्रिया
राजद नेताओं ने अदालत के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि आरोप तय होना दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं है। पार्टी का कहना है कि ट्रायल के दौरान सच्चाई सामने आएगी और लालू परिवार को न्याय मिलेगा। तेजस्वी यादव ने भी संकेत दिए हैं कि वे कानूनी प्रक्रिया पर भरोसा रखते हैं और अदालत में पूरी मजबूती के साथ अपना पक्ष रखेंगे।
आगे की कानूनी प्रक्रिया
अब आरोप तय होने के बाद इस मामले में नियमित सुनवाई और गवाहों के बयान दर्ज किए जाएंगे। अभियोजन पक्ष को अपने आरोप साबित करने होंगे, जबकि बचाव पक्ष को उनका खंडन करने का मौका मिलेगा। यह मुकदमा लंबा चल सकता है और इसका असर बिहार की राजनीति पर भी पड़ सकता है। लैंड फॉर जॉब मामला अब एक नए चरण में प्रवेश कर चुका है। अदालत द्वारा आरोप तय किए जाने से यह साफ हो गया है कि लालू परिवार के खिलाफ कानूनी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। आने वाले महीनों में इस मामले की सुनवाई और फैसले पर न केवल न्यायिक बल्कि राजनीतिक नजरें भी टिकी रहेंगी।

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