चैत्र नवरात्र आज से शुरू, कलश स्थापना के साथ नौ दिनों की पूजा का शुभारंभ
- चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर हिंदू नववर्ष का भी आरंभ, शुभ योगों का विशेष संयोग
- सुबह 06:51 बजे के बाद से पूरे दिन पूजा का शुभ समय, श्रद्धालुओं में उत्साह
पटना। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के पावन अवसर पर आज से चैत्र नवरात्र का शुभारंभ हो गया है। इसी के साथ हिंदू नववर्ष की शुरुआत भी हो गई है, जिसे लेकर पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह का माहौल है। इस वर्ष नवरात्र की शुरुआत विशेष शुभ योगों में हो रही है, जिससे इसका धार्मिक महत्व और भी बढ़ गया है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, आज उत्तरभाद्रपद नक्षत्र और शुक्ल योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। गुरुवार के दिन पड़ने वाली प्रतिपदा तिथि का आरंभ सुबह 06 बजकर 51 मिनट से हो चुका है। इसी समय के बाद से नवरात्र की पूजा, संकल्प, पाठ और मंत्रजाप की विधिवत शुरुआत की जा सकती है। श्रद्धालु पूरे दिन शुभ मुहूर्त में देवी की आराधना कर सकते हैं। नवरात्र के प्रथम दिन कलश स्थापना का विशेष महत्व माना जाता है। इसे घट स्थापना भी कहा जाता है, जिसके साथ नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व का विधिवत आरंभ होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कलश में सृष्टि के सभी देवताओं का वास होता है। इसमें ब्रह्मा, विष्णु, रुद्र, नवग्रह, सभी पवित्र नदियां, सागर, सप्तद्वीप, षोडश मातृकाएं और चौसठ योगिनियों सहित समस्त देवी-देवताओं का निवास माना जाता है। धर्मशास्त्रों में उल्लेख है कि नवरात्र के दौरान कलश की पूजा करने से सुख, समृद्धि, धन, वैभव, शांति और पारिवारिक उन्नति प्राप्त होती है। साथ ही रोग और कष्टों का नाश होता है। इस कारण श्रद्धालु पूरे विधि-विधान के साथ कलश स्थापना कर माता दुर्गा की आराधना करते हैं। नवरात्र के नौ दिनों में देवी दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। पहले दिन शैलपुत्री, दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन चंद्रघंटा, चौथे दिन कुष्मांडा, पांचवें दिन स्कंदमाता, छठे दिन कात्यायनी, सातवें दिन कालरात्रि, आठवें दिन महागौरी और नौवें दिन सिद्धिदात्री की उपासना की जाती है। इन सभी स्वरूपों की पूजा से श्रद्धालुओं को शक्ति, ज्ञान, सुख और शांति की प्राप्ति होती है। धार्मिक दृष्टि से नवरात्र का समय आत्मशुद्धि, साधना और देवी कृपा प्राप्त करने का सर्वोत्तम अवसर माना जाता है। इस दौरान भक्त उपवास रखते हैं, दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं और विशेष पूजा-अर्चना के माध्यम से देवी को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं। आज के दिन विभिन्न शुभ मुहूर्त भी बन रहे हैं, जिनमें पूजा करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। वृष लग्न मुहूर्त सुबह 08 बजकर 52 मिनट से 10 बजकर 49 मिनट तक रहेगा। गुलिक काल सुबह 09 बजकर 06 मिनट से 10 बजकर 33 मिनट तक है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 38 मिनट से 12 बजकर 24 मिनट तक रहेगा, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके अलावा चर, लाभ और अमृत मुहूर्त सुबह 10 बजकर 33 मिनट से दोपहर 02 बजकर 57 मिनट तक रहेगा, जबकि सिंह लग्न मुहूर्त दोपहर 03 बजकर 21 मिनट से 05 बजकर 35 मिनट तक रहेगा। श्रद्धालु इन सभी शुभ समयों में पूजा-अर्चना कर माता दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। मंदिरों में विशेष सजावट की गई है और भक्तों की भीड़ उमड़ने लगी है। घर-घर में भी कलश स्थापना कर नवरात्र का शुभारंभ किया गया है। चैत्र नवरात्र का यह पर्व श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक है, जो लोगों के जीवन में सकारात्मकता और नई शुरुआत का संदेश लेकर आता है।


