February 11, 2026

बिहार में अब विधायक फंड से होगी कब्रिस्तानों की घेराबंदी, सम्राट चौधरी ने सदन में की घोषणा

पटना। बिहार विधानसभा के पांचवें दिन की कार्यवाही के दौरान बुधवार को सदन में जोरदार हंगामा देखने को मिला। मुख्य रूप से कब्रिस्तानों की घेराबंदी और गन्ना किसानों के भुगतान से जुड़े मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। कार्यवाही के दौरान जहां एक ओर विपक्ष ने सरकार की मंशा और नीतियों पर सवाल खड़े किए, वहीं दूसरी ओर सरकार की ओर से इन विषयों पर स्पष्ट जवाब देने की कोशिश की गई। सदन में सबसे अधिक विवाद कब्रिस्तानों की घेराबंदी के मुद्दे को लेकर हुआ। विपक्षी दल के सदस्यों ने इस विषय को लेकर सरकार पर भेदभाव और प्राथमिकताओं को लेकर आरोप लगाए। इसी क्रम में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के विधायक मो. सरवर आलम ने सरकार से सवाल किया कि कब्रिस्तानों की सुरक्षा और घेराबंदी के लिए अब तक ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए। इस पर जवाब देते हुए बिहार के गृह मंत्री और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सदन को बताया कि राज्य सरकार ने इस दिशा में एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। सम्राट चौधरी ने घोषणा की कि अब राज्य के कब्रिस्तानों की घेराबंदी विधायक निधि से की जाएगी। इसके लिए सरकार प्रावधानों में बदलाव कर रही है ताकि जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र के कब्रिस्तानों की सुरक्षा के लिए सीधे तौर पर राशि का उपयोग कर सकें। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य सभी समुदायों के धार्मिक और सामाजिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है और इस फैसले से जमीनी स्तर पर समस्याओं का समाधान होगा। उनके इस बयान के बाद भी विपक्षी सदस्य शांत नहीं हुए और सदन में शोरगुल जारी रहा। कब्रिस्तान घेराबंदी के मुद्दे के बाद सदन की कार्यवाही शुरू होते ही गन्ना किसानों से जुड़ा सवाल उठाया गया। जनता दल (यूनाइटेड) के विधायक मंजीत सिंह ने सरकार का ध्यान गन्ना किसानों की ओर दिलाते हुए कहा कि उन्हें समय पर भुगतान नहीं मिल पा रहा है, जिससे किसान आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चीनी मिलों द्वारा भुगतान में देरी के कारण किसान कर्ज और परेशानियों में डूबते जा रहे हैं। इस सवाल पर संबंधित विभाग के मंत्री ने सदन में जवाब देते हुए कहा कि सरकार किसानों की समस्याओं को लेकर गंभीर है। उन्होंने बताया कि अब तक बड़े पैमाने पर गन्ना किसानों को उनकी फसल की राशि का भुगतान किया जा चुका है और शेष भुगतान की प्रक्रिया भी जारी है। मंत्री ने आश्वासन दिया कि सरकार अगले पंद्रह दिनों के भीतर सभी लंबित भुगतानों को पूरा करने के लिए प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हालांकि, मंत्री के जवाब के दौरान जब विधायक दोबारा सवाल करने लगे तो सदन का माहौल और अधिक गर्म हो गया। इसी बीच मुख्यमंत्री ने हस्तक्षेप करते हुए सवाल पूछने के तरीके और समय को लेकर टिप्पणी की, जिससे विपक्षी सदस्य और अधिक आक्रोशित हो गए। इसके बाद सदन में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया और कार्यवाही बाधित होती दिखी। बिहार विधानसभा का यह दिन महत्वपूर्ण घोषणाओं और तीखे राजनीतिक टकराव का गवाह बना। कब्रिस्तानों की घेराबंदी को लेकर विधायक निधि से खर्च करने की घोषणा जहां सरकार के नए कदम के रूप में सामने आई, वहीं गन्ना किसानों के भुगतान का मुद्दा एक बार फिर यह दर्शाता है कि राज्य में कृषि से जुड़े सवाल कितने संवेदनशील और अहम हैं। सदन में हुए हंगामे के बावजूद यह स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में इन दोनों विषयों पर राजनीति और नीतिगत फैसलों को लेकर बहस जारी रहने वाली है।

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