January 5, 2026

बिहार में आयुष्मान कार्ड के लिए चलेगा अभियान, घर-घर पहुंचेगी टीम, डेटाबेस होगा अपडेट

पटना। बिहार सरकार ने आयुष्मान भारत–प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत लाभार्थियों तक स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच को और प्रभावी बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब आयुष्मान कार्ड बनाने की प्रक्रिया को तेज, सरल और पारदर्शी बनाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान के तहत टीम घर-घर जाकर पात्र लाभार्थियों का आयुष्मान कार्ड बनाएगी और साथ ही डेटाबेस को भी अपडेट किया जाएगा।
योजना को गति देने का फैसला
राज्य सरकार ने यह निर्णय उन लाखों लाभार्थियों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए लिया है, जो पात्र होने के बावजूद अब तक आयुष्मान कार्ड नहीं बनवा पाए हैं। अब तक कार्ड निर्माण की प्रक्रिया में ऑनलाइन आवेदन, दस्तावेज अपलोड और विभिन्न स्तरों पर सत्यापन जैसी जटिलताएं सामने आ रही थीं। इन कारणों से कई जरूरतमंद परिवार योजना का लाभ नहीं उठा पा रहे थे। सरकार का मानना है कि घर-घर जाकर कार्ड बनाने से इन बाधाओं को काफी हद तक दूर किया जा सकेगा।
प्राइवेट एजेंसियों की भूमिका
इस अभियान को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सरकार ने चयनित प्राइवेट एजेंसियों को जिम्मेदारी सौंपी है। राज्य को उत्तर बिहार, दक्षिण बिहार और मध्य बिहार के तीन हिस्सों में बांटकर कार्य किया जाएगा, ताकि पूरे राज्य में संतुलित और सुचारू तरीके से अभियान चल सके। एजेंसियों के प्रशिक्षित कर्मी गांवों और शहरी इलाकों में जाकर पात्र लाभार्थियों की पहचान करेंगे। मौके पर ही आवश्यक कागजात की जांच और प्रक्रिया पूरी कर लाभार्थियों को आयुष्मान कार्ड सौंपा जाएगा।
लाभार्थियों को होगी बड़ी राहत
इस नई व्यवस्था से लाभार्थियों को सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि उन्हें अब कार्ड बनवाने के लिए कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। पहले लोगों को ऑनलाइन आवेदन करने, दस्तावेज जुटाने और कई बार तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। अब घर बैठे कार्ड मिलने से खासकर ग्रामीण इलाकों, बुजुर्गों और कमजोर वर्गों को बड़ी राहत मिलेगी। सरकार का उद्देश्य है कि कोई भी पात्र परिवार केवल प्रक्रिया की जटिलता के कारण योजना से वंचित न रहे।
आंकड़ों से झलकती चुनौती
बिहार में आयुष्मान योजना के तहत करीब 1.69 करोड़ परिवार और लगभग 8.45 करोड़ लाभार्थी चिन्हित हैं। इसके बावजूद अब तक केवल 4.12 करोड़ आयुष्मान कार्ड ही बन पाए हैं। इसका अर्थ यह है कि लगभग आधे लाभार्थी अभी भी कार्ड से वंचित हैं। कार्ड वितरण की इस धीमी रफ्तार को सरकार ने गंभीरता से लिया है और इसी कारण बड़े पैमाने पर विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है।
कैशलेस इलाज की सुविधा
आयुष्मान कार्ड के माध्यम से लाभार्थियों को सालाना पांच लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया जाता है। राज्य सरकार ने इसके लिए 725 निजी नर्सिंग होम और अस्पतालों के साथ-साथ 433 सरकारी अस्पतालों की सूची तैयार की है। इन अस्पतालों में लाभार्थी बिना किसी अग्रिम भुगतान के इलाज करा सकेंगे। यह सुविधा गंभीर बीमारियों के इलाज में आर्थिक बोझ को कम करने में बेहद सहायक साबित हो रही है।
डेटाबेस अपडेट करने पर जोर
सरकार की इस पहल का एक महत्वपूर्ण पहलू डेटाबेस को अपडेट करना भी है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम-2013 के तहत तैयार लाभार्थियों की सूची में कई जगह बदलाव की जरूरत महसूस की जा रही थी। घर-घर जाकर कार्ड बनाने की प्रक्रिया के दौरान वास्तविक लाभार्थियों की पहचान होगी और गलत या अपूर्ण प्रविष्टियों को दुरुस्त किया जाएगा। इससे योजना में पारदर्शिता बढ़ेगी और लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचेगा।
स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की दिशा
सरकार का मानना है कि आयुष्मान योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। जब अधिक से अधिक लोगों के पास आयुष्मान कार्ड होगा, तो वे समय पर इलाज कराने के लिए आगे आएंगे। इससे न केवल गंभीर बीमारियों की पहचान और उपचार समय पर होगा, बल्कि सरकारी और निजी स्वास्थ्य संस्थानों की जवाबदेही भी बढ़ेगी।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों पर समान फोकस
यह अभियान ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में समान रूप से चलाया जाएगा। अक्सर देखा गया है कि ग्रामीण इलाकों में जानकारी और संसाधनों की कमी के कारण लोग योजनाओं से वंचित रह जाते हैं। घर-घर जाकर कार्ड बनाने से इस अंतर को पाटने में मदद मिलेगी। शहरी झुग्गी-बस्तियों और दूर-दराज के इलाकों में भी लाभार्थियों तक सीधी पहुंच सुनिश्चित की जाएगी।
योजना के व्यापक प्रभाव
राज्य सरकार की यह पहल केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं है, बल्कि यह सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है। आयुष्मान योजना के व्यापक क्रियान्वयन से गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को स्वास्थ्य संबंधी आर्थिक संकट से राहत मिलेगी। इससे राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ेगी और लोगों का सरकारी योजनाओं पर भरोसा मजबूत होगा।
भविष्य की राह
घर-घर आयुष्मान कार्ड अभियान के सफल होने से बिहार में स्वास्थ्य बीमा कवरेज का दायरा काफी बढ़ सकता है। सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से शत-प्रतिशत पात्र लाभार्थियों को योजना का लाभ मिलेगा। यह कदम बिहार को एक मजबूत और समावेशी स्वास्थ्य व्यवस्था की ओर ले जाने में अहम भूमिका निभा सकता है।

 

You may have missed