26 को मुख्यमंत्री ने बुलाई कैबिनेट बैठक, सीएम के इस्तीफे से पहले होगी अंतिम मीटिंग, कई प्रस्तावों पर नजर
पटना। बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा 26 मार्च को मंत्रिमंडल की बैठक बुलाए जाने की खबर ने सियासी गलियारों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया है। यह बैठक ऐसे समय में प्रस्तावित है जब मुख्यमंत्री के पद छोड़ने की अटकलें लगातार जोर पकड़ रही हैं। माना जा रहा है कि यह बैठक उनके कार्यकाल की अंतिम मंत्रिपरिषद बैठक भी हो सकती है, जिसके बाद राज्य की राजनीति एक नए मोड़ पर पहुंच सकती है।
कैबिनेट बैठक का महत्व और समय
सूत्रों के अनुसार, यह बैठक मुख्यमंत्री की ‘समृद्धि यात्रा’ समाप्त होने के बाद आयोजित की जाएगी। इस बैठक को केवल सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत के रूप में भी समझा जा रहा है। माना जा रहा है कि इस बैठक में कई अहम प्रस्तावों पर मुहर लग सकती है, जो आगामी सत्ता परिवर्तन से पहले सरकार के अंतिम फैसले हो सकते हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि जब भी कोई सरकार अपने कार्यकाल के अंत के करीब होती है, तो ऐसी बैठकों का महत्व और बढ़ जाता है। इस बार भी स्थिति कुछ ऐसी ही दिखाई दे रही है, जहां फैसलों के साथ-साथ भविष्य की राजनीति की दिशा भी तय हो सकती है।
इस्तीफे की अटकलें और उसके कारण
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे की चर्चाएं तब से तेज हो गई हैं, जब से वे राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं। संविधान के अनुसार, उन्हें एक निश्चित समय सीमा के भीतर किसी एक पद को छोड़ना होगा। हालांकि उनके पास मुख्यमंत्री पद छोड़ने के लिए कुछ समय उपलब्ध है, लेकिन राजनीतिक परिस्थितियां संकेत दे रही हैं कि वे जल्द ही यह निर्णय ले सकते हैं। सूत्रों की मानें तो मंत्रिमंडल की बैठक के बाद उनके इस्तीफे की घोषणा भी संभव है। यही कारण है कि यह बैठक केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी बेहद संवेदनशील मानी जा रही है।
उत्तराधिकारी को लेकर चर्चा
राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर भी चर्चा तेज है कि मुख्यमंत्री के बाद राज्य की कमान किसके हाथों में जाएगी। पिछले कुछ समय में नीतीश कुमार ने कई मौकों पर अपने संभावित उत्तराधिकारी को लेकर संकेत दिए हैं, हालांकि उन्होंने कभी खुलकर किसी नाम की घोषणा नहीं की। यह अनिश्चितता भी इस बैठक को और अधिक महत्वपूर्ण बना देती है, क्योंकि बैठक के बाद राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदल सकते हैं। संभावना जताई जा रही है कि राज्य में नई सरकार का गठन हो सकता है, जिसमें नेतृत्व की भूमिका बदल सकती है।
रामनवमी से पहले बदलाव की संभावना
सूत्रों के हवाले से यह भी जानकारी सामने आई है कि रामनवमी से पहले ही बिहार में सत्ता परिवर्तन हो सकता है। यदि ऐसा होता है, तो यह राज्य की राजनीति में एक बड़ा बदलाव होगा। त्योहार से पहले होने वाला यह संभावित परिवर्तन सामाजिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर प्रभाव डाल सकता है। ऐसे में सभी की निगाहें 26 मार्च की बैठक पर टिकी हैं, क्योंकि वहीं से आने वाले दिनों की राजनीतिक तस्वीर स्पष्ट हो सकती है।
पिछली बैठक के फैसले और वर्तमान संदर्भ
इससे पहले 20 फरवरी 2026 को हुई मंत्रिपरिषद बैठक में सरकार ने 35 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी थी। इनमें सोनपुर में नए हवाई अड्डे के निर्माण का निर्णय भी शामिल था, जिसे राज्य के विकास की दिशा में एक बड़ा कदम माना गया। पिछली बैठक में लिए गए फैसलों ने यह संकेत दिया था कि सरकार विकास योजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाना चाहती है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि 26 मार्च की बैठक में कौन-कौन से प्रस्ताव सामने आते हैं और उनका राज्य के भविष्य पर क्या असर पड़ता है।
नई सरकार की संभावनाएं
राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार, मुख्यमंत्री के इस्तीफे के बाद राज्य में नई सरकार के गठन की संभावना है। यह भी कहा जा रहा है कि इस बार सत्ता की बागडोर भारतीय जनता पार्टी के हाथों में जा सकती है। हालांकि इस बारे में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। यदि ऐसा होता है, तो बिहार की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू होगा, जिसमें नीतियों और प्राथमिकताओं में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। 26 मार्च को होने वाली मंत्रिपरिषद बैठक केवल एक नियमित सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति के लिए निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है। इस बैठक के बाद लिए जाने वाले फैसले न केवल वर्तमान सरकार के भविष्य को तय करेंगे, बल्कि राज्य की आगामी राजनीतिक दिशा भी निर्धारित करेंगे। अब सबकी नजरें इस बैठक पर टिकी हैं, जहां से यह स्पष्ट होगा कि क्या सच में नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे और बिहार को एक नया नेतृत्व मिलने जा रहा है।


