विधानसभा में भाई वीरेंद्र का नीतीश पर तंज, कहा- मुख्यमंत्री जी समय पर दवा लीजिये, नहीं तो सब भूल जाएंगे
पटना। बिहार विधानसभा में गुरुवार को प्रश्नकाल के दौरान उस समय माहौल कुछ देर के लिए हास्यपूर्ण हो गया, जब राष्ट्रीय जनता दल के विधायक भाई वीरेंद्र और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बीच परिधान को लेकर हल्की नोकझोंक हो गई। हालांकि मूल मुद्दा दानापुर और मनेर क्षेत्र के पानी में आर्सेनिक की बढ़ती मात्रा से जुड़ा था, लेकिन चर्चा के दौरान हुए संवाद ने सदन में ठहाकों का माहौल बना दिया। दरअसल, राजद विधायक भाई वीरेंद्र अपने विधानसभा क्षेत्र मनेर तथा दानापुर के कुछ इलाकों में पेयजल में आर्सेनिक की मात्रा बढ़ने का सवाल उठा रहे थे। उन्होंने सरकार से इस संबंध में ठोस कार्रवाई की मांग की। इस पर लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के मंत्री ने जवाब देते हुए कहा कि नौ फरवरी को संबंधित क्षेत्रों के पानी की जांच कराई गई थी और जांच रिपोर्ट के अनुसार आर्सेनिक की मात्रा मानक से अधिक नहीं पाई गई है। मंत्री के जवाब पर असंतोष जताते हुए भाई वीरेंद्र ने कहा कि अधिकारियों ने मंत्री को गलत जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि वह स्वयं उस इलाके में रहते हैं और स्थिति से भलीभांति परिचित हैं। उनका कहना था कि जमीनी हकीकत और रिपोर्ट में अंतर है। इसी दौरान सदन में कुछ समय के लिए हल्की नोकझोंक की स्थिति बन गई। चर्चा के बीच माहौल तब बदला जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भाई वीरेंद्र के परिधान पर टिप्पणी कर दी। उन्होंने विधायक की ओर इशारा करते हुए उनके रंग-बिरंगे स्वेटर को लेकर हल्की टिप्पणी की। मुख्यमंत्री की इस टिप्पणी पर भाई वीरेंद्र ने भी तत्परता से जवाब देते हुए कटाक्ष किया कि यह कपड़ा तो आपने ही दिया है। उन्होंने कहा कि पिछली बार भी आपने ही दिया था और अब भूल गए। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि इसलिए समय पर दवा लेना चाहिए, नहीं तो सब भूल जाएंगे। भाई वीरेंद्र के इस जवाब पर सदन में ठहाके गूंज उठे और कुछ देर तक वातावरण हल्का-फुल्का बना रहा। उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी इस प्रसंग पर टिप्पणी करते हुए कहा कि विधायक अपने क्षेत्र में जिस जांच की मांग कर रहे हैं, वह कराई जाएगी। साथ ही उन्होंने मुस्कराते हुए यह भी कहा कि मुख्यमंत्री का आशय यह था कि अब इतनी ठंड नहीं है कि इतना अधिक गर्म कपड़ा पहना जाए। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान विधानसभा अध्यक्ष ने भी हस्तक्षेप करते हुए भाई वीरेंद्र से कहा कि आप स्वस्थ हैं न, जनता की चिंता सरकार कर लेगी। अध्यक्ष की टिप्पणी से भी सदन में हंसी का माहौल बना रहा। हालांकि हास्यपूर्ण माहौल के बावजूद मूल मुद्दा गंभीर था। दानापुर और मनेर क्षेत्र में पेयजल में आर्सेनिक की आशंका को लेकर स्थानीय लोगों में चिंता है। आर्सेनिक युक्त पानी से स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। विधायक ने मांग की कि प्रभावित इलाकों में दोबारा विस्तृत जांच कराई जाए और यदि आवश्यक हो तो शुद्ध पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया कि यदि किसी प्रकार की शिकायत या नई सूचना मिलती है तो संबंधित विभाग द्वारा दोबारा जांच कराई जाएगी। फिलहाल नौ फरवरी की जांच रिपोर्ट के आधार पर पानी में आर्सेनिक की मात्रा मानक के भीतर बताई गई है। विधानसभा की कार्यवाही के दौरान गंभीर विषयों के बीच इस प्रकार की नोकझोंक ने सदन के माहौल को कुछ देर के लिए हल्का जरूर किया, लेकिन साथ ही पेयजल गुणवत्ता जैसे अहम मुद्दे की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। अब यह देखना होगा कि सरकार इस विषय पर आगे क्या कदम उठाती है और क्षेत्र के लोगों की चिंताओं का समाधान किस प्रकार किया जाता है।


