विधानसभा सत्र में विपक्षी विधायकों ने रोका अध्यक्ष का रास्ता, जमकर की नारेबाजी, मतदाता सूची पर जताया विरोध
पटना। बिहार विधानसभा का मानसून सत्र इस बार खासा तनावपूर्ण माहौल में शुरू हुआ है। सत्र के दूसरे दिन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही विपक्षी विधायकों ने सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार पर मतदाता सूची में धांधली का आरोप लगाते हुए विपक्ष ने विधानसभा परिसर में काला कपड़ा पहनकर प्रदर्शन किया और सरकार को “जनविरोधी” करार दिया।
अध्यक्ष का रास्ता रोककर जताया गया विरोध
मंगलवार को जब विधानसभा अध्यक्ष नंद किशोर यादव सदन में प्रवेश करने के लिए पहुंचे, तो विपक्षी सदस्यों ने उनके रास्ते को रोककर विरोध जताया। हाथों में पोस्टर लिए विपक्षी विधायक नारेबाजी करते हुए विधानसभा के मुख्य द्वार की सीढ़ियों पर बैठ गए, जिससे अध्यक्ष को अंदर जाने में कठिनाई हुई। यह दृश्य स्पष्ट रूप से बताता है कि विपक्ष सत्र की कार्यवाही को केवल विरोध के मंच के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।
मतदाता सूची को बताया लोकतंत्र के खिलाफ कदम
विपक्ष का आरोप है कि राज्य सरकार मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के नाम पर पक्षपात कर रही है। उनका कहना है कि खासतौर पर उन क्षेत्रों के मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं, जहां विपक्ष का प्रभाव अधिक है। इस वजह से विपक्ष इसे “लोकतंत्र के खिलाफ काला निर्णय” मान रहा है। काले कपड़े पहनकर विरोध जताना भी इसी प्रतीकवाद का हिस्सा बताया गया।
सदन के अंदर भी रहा गतिरोध
सत्र के पहले दिन सोमवार को ही विपक्ष ने सदन में आक्रामक रुख अपनाया था। उन्होंने वेल में आकर सरकार विरोधी नारे लगाए और मतदाता सूची में हेरफेर के आरोप लगाए। इसके चलते सदन की कार्यवाही बाधित हुई और स्थगित करनी पड़ी। यह साफ संकेत है कि विपक्ष सत्र के दौरान सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहता।
विपक्ष की मांग: निष्पक्ष जांच हो
विपक्ष ने यह मांग रखी है कि मतदाता सूची में हुए कथित पक्षपात की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। उनका तर्क है कि यदि यह प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं रही, तो आगामी विधानसभा चुनावों में इसका सीधा असर पड़ेगा और लोकतांत्रिक मूल्यों पर आघात होगा। यह भी आरोप लगाया गया कि प्रशासनिक स्तर पर एनडीए के इशारे पर काम किया जा रहा है, जिससे लोकतंत्र की नींव कमजोर हो रही है।
विधानसभा सत्र का शेष कार्यक्रम
इस बार का मानसून सत्र नीतीश सरकार के वर्तमान कार्यकाल का अंतिम सत्र माना जा रहा है और यह 25 जुलाई तक चलेगा। 23 जुलाई को राज्य सरकार कुछ विधेयक सदन में पेश करेगी। 24 जुलाई को अनुपूरक बजट पर चर्चा होगी, और फिर विनियोग विधेयक पारित कराया जाएगा। 25 जुलाई को गैर सरकारी संकल्पों पर चर्चा के साथ सत्र समाप्त होगा। सत्र के दौरान राज्यपाल द्वारा स्वीकृत अध्यादेशों की प्रतियाँ भी सदन में रखी जाएंगी, और विभिन्न समितियों की रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।
राजनीतिक संदेश और भविष्य की राह
विपक्ष का यह विरोध आगामी चुनावों की दृष्टि से बड़ा राजनीतिक संदेश दे रहा है। यह स्पष्ट है कि मतदाता सूची को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस विवाद को बातचीत से सुलझाती है या टकराव और गहराता है। जिस प्रकार से विपक्ष लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए है, उससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि आगामी दिनों में विधानसभा सत्र और भी अधिक गर्मा सकता है।


