चंडीगढ़ मेयर चुनाव में बीजेपी ने खिलाया कमल, सौरभ जोशी की जीत, बने शहर के नए मेयर
चंडीगढ़। नगर निगम के मेयर चुनाव में इस बार सियासी तस्वीर पूरी तरह साफ नजर आई। वर्ष 2026 के मेयर चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर जीत दर्ज करते हुए शहर की सत्ता पर अपना कब्जा बरकरार रखा है। भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार सौरभ जोशी चंडीगढ़ के नए मेयर चुने गए हैं। त्रिकोणीय मुकाबले में उन्होंने कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के उम्मीदवारों को पीछे छोड़ते हुए स्पष्ट बहुमत हासिल किया।
मेयर चुनाव में बीजेपी की स्पष्ट जीत
चंडीगढ़ नगर निगम में हुए मेयर चुनाव में कुल मतों की गणना के बाद भारतीय जनता पार्टी के पार्षद सौरभ जोशी को 18 वोट मिले। इसके साथ ही वे चंडीगढ़ के नए मेयर घोषित किए गए। कांग्रेस उम्मीदवार गुरप्रीत सिंह गब्बी को 7 वोट मिले, जबकि आम आदमी पार्टी के योगेश ढींगरा को 11 वोटों से संतोष करना पड़ा। नतीजों से साफ हो गया कि इस बार बीजेपी ने बिना किसी गठबंधन के दम पर चुनाव जीत लिया है।
वोटिंग की प्रक्रिया और चुनाव का माहौल
मेयर, वरिष्ठ उप महापौर और उप महापौर पदों के लिए मतदान की प्रक्रिया सुबह 11 बजे शुरू हुई। चुनाव की पूरी प्रक्रिया हाथ उठाकर मतदान के तरीके से कराई गई। इस पद्धति में हर पार्षद ने खुले तौर पर अपने समर्थन का इजहार किया। नगर निगम अधिनियम के तहत यह प्रावधान भी है कि अगर वोट बराबर होते, तो फैसला टॉस यानी पर्ची के जरिए किया जाता, लेकिन इस बार ऐसी स्थिति पैदा नहीं हुई।
कौन-कौन थे मैदान में
मेयर पद के लिए भारतीय जनता पार्टी ने सौरभ जोशी को उम्मीदवार बनाया था। कांग्रेस की ओर से गुरप्रीत सिंह गब्बी मैदान में थे, जबकि आम आदमी पार्टी ने योगेश ढींगरा को अपना प्रत्याशी घोषित किया था। इसके अलावा वरिष्ठ उप महापौर और उप महापौर पदों के लिए तीनों पार्टियों के उम्मीदवारों के साथ एक निर्दलीय प्रत्याशी भी चुनावी मुकाबले में शामिल था। हालांकि मुख्य मुकाबला मेयर पद को लेकर ही केंद्रित रहा।
पार्षदों की संख्या ने तय किया नतीजा
चंडीगढ़ नगर निगम की वर्तमान स्थिति पर नजर डालें तो भारतीय जनता पार्टी के पास कुल 18 पार्षद हैं। आम आदमी पार्टी के पास 11 पार्षद हैं, जबकि कांग्रेस के पास 6 पार्षद हैं। इसके अलावा कांग्रेस को सांसद का एक अतिरिक्त वोट भी मिलता है। इस तरह कांग्रेस के खाते में कुल 7 वोट आए। मतदान के दौरान भारतीय जनता पार्टी के सभी पार्षदों ने एकजुट होकर सौरभ जोशी के पक्ष में वोट दिया, जिससे उनकी जीत आसान हो गई।
पिछले साल से अलग रहा चुनावी समीकरण
पिछले वर्ष के मुकाबले इस बार चुनावी समीकरण पूरी तरह बदले हुए नजर आए। पहले कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने मिलकर चुनाव लड़ा था, जिससे मुकाबला कड़ा हो गया था। लेकिन इस बार दोनों पार्टियों ने अलग-अलग उम्मीदवार उतारे। इसका सीधा फायदा भारतीय जनता पार्टी को मिला। विपक्ष का वोट बंट गया और बीजेपी ने इसका पूरा लाभ उठाते हुए मेयर पद पर कब्जा कर लिया।
हाथ उठाकर मतदान से हुआ फैसला
इस बार का मेयर चुनाव हाथ उठाकर मतदान की प्रक्रिया से कराया गया। इस प्रक्रिया को हिंदी में खुला मतदान कहा जाता है। इसमें किसी प्रकार की गुप्त मतपेटी का इस्तेमाल नहीं होता। सभी पार्षदों ने खुले तौर पर अपना समर्थन दिखाया। इससे मतदान की पारदर्शिता बनी रही और परिणाम तुरंत सामने आ गया।
जीत के बाद राजनीतिक संदेश
सौरभ जोशी की जीत को भारतीय जनता पार्टी के लिए एक बड़ी राजनीतिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है। यह जीत न केवल नगर निगम में पार्टी की स्थिति को मजबूत करती है, बल्कि आने वाले समय में स्थानीय राजनीति पर भी इसका असर पड़ सकता है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह जीत विकास कार्यों और संगठन की मजबूती का नतीजा है।
नए मेयर से उम्मीदें
नए मेयर के रूप में सौरभ जोशी के सामने शहर की साफ-सफाई, ट्रैफिक व्यवस्था, बुनियादी सुविधाओं और विकास योजनाओं को आगे बढ़ाने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। चंडीगढ़ के नागरिकों को उम्मीद है कि नई नगर निगम टीम शहर के विकास को नई दिशा देगी। मेयर चुनाव के नतीजों के साथ ही अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले समय में नगर निगम किस तरह से अपने वादों को जमीन पर उतारता है। चंडीगढ़ मेयर चुनाव 2026 में भारतीय जनता पार्टी की जीत ने यह साफ कर दिया है कि नगर निगम की राजनीति में फिलहाल पार्टी की पकड़ मजबूत बनी हुई है, जबकि विपक्ष को आने वाले समय में अपनी रणनीति पर नए सिरे से विचार करना होगा।


