बिहार राज्यसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने नियुक्त किए दो पर्यवेक्षक, विजय शर्मा और हर्ष मल्होत्रा को मिली जिम्मेदारी

पटना। देश के कई राज्यों में होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार 16 मार्च 2026 को मतदान कराया जाएगा और उसी दिन मतगणना के बाद परिणाम भी घोषित कर दिए जाएंगे। चुनाव प्रक्रिया के तहत नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि भी निर्धारित की जा चुकी है। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी ने विभिन्न राज्यों में होने वाले चुनाव की तैयारियों को लेकर अपने केंद्रीय पर्यवेक्षकों की नियुक्ति कर दी है। बिहार सहित कई राज्यों में होने वाले चुनाव को देखते हुए पार्टी ने रणनीतिक स्तर पर कदम उठाते हुए वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी है।
बिहार के लिए दो केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त
राज्यसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने बिहार के लिए दो केंद्रीय पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की है। पार्टी ने छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा को बिहार का पर्यवेक्षक बनाया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार दोनों नेताओं को चुनाव प्रक्रिया के दौरान बिहार में पार्टी की गतिविधियों पर नजर रखने की जिम्मेदारी दी गई है। इन पर्यवेक्षकों का मुख्य काम राज्य में पार्टी की चुनावी रणनीति को प्रभावी ढंग से लागू कराना और विधायकों के साथ समन्वय बनाए रखना होगा। इसके अलावा वे यह भी सुनिश्चित करेंगे कि पार्टी के सभी विधायक और नेता चुनावी प्रक्रिया में एकजुट होकर काम करें। पर्यवेक्षकों की भूमिका इस लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि राज्यसभा चुनाव में विधायकों के वोट ही उम्मीदवारों की जीत तय करते हैं।
अन्य राज्यों के लिए भी नियुक्त किए गए पर्यवेक्षक
भारतीय जनता पार्टी ने केवल बिहार ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों के लिए भी अपने पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की है। हरियाणा में होने वाले राज्यसभा चुनाव की निगरानी के लिए गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी को जिम्मेदारी दी गई है। वहीं ओडिशा के लिए महाराष्ट्र सरकार के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले को पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि इन वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी से चुनावी प्रक्रिया के दौरान बेहतर समन्वय और रणनीतिक संचालन सुनिश्चित किया जा सकेगा। इन सभी पर्यवेक्षकों की नियुक्ति भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन द्वारा की गई है। पार्टी की ओर से यह कदम चुनावी तैयारी को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
बिहार में चुनाव बना ऐतिहासिक
बिहार की राजनीति के लिहाज से इस बार का राज्यसभा चुनाव काफी महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक माना जा रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि लंबे समय तक राज्य की राजनीति के केंद्र में रहने वाले नेता अब राष्ट्रीय राजनीति की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। करीब दो दशक तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार ने इस बार राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल किया है। उनके इस कदम को राज्य की सक्रिय राजनीति से राष्ट्रीय स्तर की राजनीति की ओर बढ़ने के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति में उनकी भूमिका को और महत्वपूर्ण बना सकता है।
भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन ने भी भरा नामांकन
बिहार से राज्यसभा चुनाव को और अधिक दिलचस्प बनाने वाला एक और घटनाक्रम सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने भी बिहार से राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल किया है। नितिन नबीन का नामांकन पार्टी के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वे पार्टी संगठन में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। उनके राज्यसभा पहुंचने से पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व में बिहार की भूमिका और मजबूत होने की संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक हलकों में इसे भाजपा की रणनीतिक चाल के रूप में भी देखा जा रहा है।
बिहार में पांच सीटों पर हो रहा चुनाव
बिहार से राज्यसभा की कुल पांच सीटें इस बार खाली हो रही हैं, जिनके लिए नामांकन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इन सीटों के लिए विभिन्न दलों के उम्मीदवार मैदान में उतर चुके हैं। हालांकि राज्यसभा चुनाव प्रत्यक्ष मतदान के बजाय विधायकों द्वारा किए जाने वाले अप्रत्यक्ष मतदान के माध्यम से होते हैं, इसलिए राजनीतिक दल अपने विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश कर रहे हैं। राजनीतिक दलों के बीच इस चुनाव को लेकर अंदरूनी रणनीति और जोड़-तोड़ भी तेज हो गई है। सभी दल अपने-अपने उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने के लिए लगातार संपर्क और संवाद बनाए हुए हैं।
अन्य राज्यों में भी दिलचस्प मुकाबला
केवल बिहार ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों में भी राज्यसभा चुनाव को लेकर मुकाबला रोचक होता जा रहा है। ओडिशा में चार सीटों के लिए पांच उम्मीदवार मैदान में उतर चुके हैं, जिससे वहां चुनावी प्रतिस्पर्धा और बढ़ गई है। भारतीय जनता पार्टी ने यहां मनमोहन सामल और सुजीत कुमार को उम्मीदवार बनाया है। वहीं हरियाणा में दो सीटों के लिए होने वाले चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के संजय भाटिया और कांग्रेस के कर्मवीर सिंह बौद्ध के बीच सीधा मुकाबला माना जा रहा है। इन चुनावों को लेकर दोनों दलों ने अपनी-अपनी रणनीति तैयार कर ली है।
राज्यसभा के समीकरणों पर पड़ सकता है असर
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इन राज्यों में होने वाले राज्यसभा चुनाव के परिणाम का असर संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा के राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है। यदि कुछ सीटों पर परिणाम अप्रत्याशित आते हैं तो राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन और विपक्षी दलों के बीच संतुलन में बदलाव संभव है। इसी कारण सभी प्रमुख राजनीतिक दल इन चुनावों को गंभीरता से ले रहे हैं और अपने विधायकों के बीच निरंतर संपर्क बनाए हुए हैं। फिलहाल सभी की नजर 16 मार्च को होने वाले मतदान और उसी दिन आने वाले परिणामों पर टिकी हुई है, जो आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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