असर रिपोर्ट 2021 : बिहार की स्कूली शिक्षा पुरे देश में बदहाल, 73. 5 प्रतिशत बच्चे करते है ट्यूशन से पढ़ाई
पटना। बिहार में स्कूली शिक्षा का हालत बहुत ही दयनीय है। पूरे देश भर में सबसे ज्यादा बिहार और बंगाल के बच्चे पढ़ाई के लिए स्कूल में मोटी रकम देने के बाद भी निजी ट्यूशन कर रहे हैं। पिछले तीन- चार साल में केरल को छोड़कर देश के सभी राज्यों में स्कूली बच्चों का निजी ट्यूशन लेने में वृद्धि हुई है। बुधवार को जारी हुए स्वयंसेवी संगठन असर 2021 की रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है। दरअसल स्वयंसेवी संगठन प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाली संगठन है। इस संघटन की तरफ से बुधवार को 2021 ASER report 2021 रिपोर्ट जारी की गई थी। इस रिपोर्ट के अनुसार बिहार में स्कूली शिक्षा बहुत ही चिंताजनक है।

असर की रिपोर्ट के मुताबिक स्कूल में मोटी फीस भरने के बावजूद निजी ट्यूशन लेने वाले बच्चों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। असर की रिपोर्ट के मुताबिक 2018 में राष्ट्रीय स्तर पर 30 फीसदी ही बच्चे ट्यूशन लेते थे। लेकिन साल 2021 में यह आंकड़ा बढ़कर 40 फीसदी पहुंच गया है।इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कम लिखे माता-पिता के बच्चों में ट्यूशन पढ़ने की प्रवृति अधिक है। ऐसे परिवारों के बच्चों में जहां 12.6 फीसदी की वृद्धि हुई है।
वहीं पढ़े-लिखे माता पिता के बच्चों भी निजी ट्यूशन लेने में पीछे नहीं है। ऐसे बच्चों के आंकड़े में 7.2 फीसदी की वृद्धि हुई है। वहीं अगर बात बिहार की करें तो बिहार विद्यालयों में नमांकित 64.3 फीसदी बच्चे वर्ष 2020 से ट्यूशन पढ़ रहे हैं। जबकि यह आंकड़ा 2021 में 73.5 प्रतिशत बच्चे ट्यूशन लेने लगे हैं। यानी मात्र 26.5 फीसदी बच्चे ऐसे हैं जिनका या तो स्कूल में होने वाली पढ़ाई पर भरोसा कायम है या खुद स्वाध्याय पर भरोसा करते हैं।

