अधिकारियों की मिलीभगत से बिहार में हुई हिंसा, मुख्यमंत्री को सब पता है : विजय सिन्हा
पटना। बिहार विधानसभा में विपक्ष ने बिहार के विभिन्न जिलों में हुए हिंसा के मामले को लेकर हंगामा किया। जिसके बाद सदन की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा। नेता प्रतिपक्ष विजय सिन्हा ने कहा कि सदन के अंदर हमने कार्यस्थन दिया कि तजिया का हम स्वागत करते हैं तो रामनवमी की शोभा यात्रा पर पत्थर क्यों? रामनवमी से पहले हर थाने के अंदर शांति समिति की बैठक हुई थी। बैठक में थाना प्रभारी, एसपी, डीएसपी मिल बैठकर रुट तय करते हैं। विजय सिन्हा ने कहा कि तुष्टिकरण की राजनीति करते हुए सरकार पत्थर बरसाने वाले पर कार्रवाई नहीं करके बहुसंख्यक हिंदुओं पर कार्रवाई करके उसे डराना चाहती है। सासाराम, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, बिहारशरीफ, गया में बार-बार हर साल ऐसी घटनाएं होती हैं। आखिर क्या कारण है कि सरकार ने पहले से इन स्थानों पर अर्द्धसैनिक बल नहीं लगाया। क्यों ऐसे मामलों में आग लगने तक का इंतजार किया जाता है। तुष्टिकरण की राजनीति के कारण एक पक्ष के लोगों को, मुस्लिमों को मेहमानबाजी कराके संरक्षित करने की कोशिश कामयाब नहीं होगी। यह 21वीं सदी का भारत है। तुष्टिकरण की राजनीति बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सबको समान अधिकार है और समान रूप से सबकी सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की है। बिहारशरीफ में जिसके घर में घटना घटित होती है, जिसके लोग मारे जाते हैं, जिसकी दुकान लूटी जाती है, उन्हीं पर एफआईआर हो रहा है और उनको ही जेल में डाला जा रहा है। साथ ही विजय सिन्हा ने कहा कि उच्च पद पर बैठा एक पदाधिकारी खुलकर अल्पसंख्यकों, मदरसों को संरक्षित कर रहा है।

विजय सिन्हा ने कहा की सासाराम में बम बनाते हुए घायल होने वाले लोग कौन हैं? बांका में मदरसे के अंदर बंम विस्फोट, भागलपुर के नाथनगर में विस्फोट का मामला दबा दिया गया। जब विजय सिन्हा से उस अधिकारी का नाम पूछा गया तो उन्होंने कहा कि सीएम नीतीश कुमार को सब मालूम है। न्यायालय ने भी साफ किया था कि कई मदरसे गलत तरीके से चल रहे हैं और इसके नाम घोटाला किया गया है, ऐसे मदरसे आतंकवादियों का पनाहगार बना हुआ है। कौन सा अधिकारी इस तरह से आतंकवादियो का मनोबल बढ़ा रहा है, इसकी जांच कराना सरकार की जिम्मेदारी है।”ऐसे लोगों को शर्म आनी चाहिए। सीएम गृह मंत्री भी हैं तो मामले की जांच कराएं। मैं पद की गरीमा रखने के कारण अधिकारी का नाम नहीं ले रहा हूं लेकिन जिस दिन बीजेपी की सरकार बनेगी, पुरानी फाइल खोली जाएगी। ऐसे लोगों को बक्शा नहीं जाएगा।

