दिलीप जायसवाल का बड़ा दावा, इंडिया गठबंधन में जल्द होगी बड़ी टूट, कई बड़े नेता हमारे साथ होंगे
- भाजपा मंत्री का मुकेश सहनी और आईपी गुप्ता की ओर इशारा, राजनीतिक चर्चाओं का बाजार गर्म
पटना। बिहार की राजनीति विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद तेजी से करवट बदलती नजर आ रही है। राजनीतिक हलकों में इस समय सबसे ज्यादा चर्चा इंडिया गठबंधन की संभावित टूट को लेकर है। शनिवार को बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने दावा किया कि इंडिया गठबंधन जल्द ही बिखरने वाला है और इसकी शुरुआत एक बड़ी पार्टी के एनडीए के संपर्क में आने से हो चुकी है। इस बयान ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है और कयासों का बाजार गर्म हो गया है।
पीएम मोदी के बयान से शुरू हुई चर्चा
14 नवंबर को चुनाव परिणाम आने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दिल्ली में बीजेपी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा था कि कांग्रेस में जल्द ही बड़ी टूट होने वाली है। उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि इंडिया गठबंधन में अंदरूनी खींचतान बढ़ रही है और कई सहयोगी नेतृत्व से नाखुश हैं। पीएम मोदी के इस बयान के बाद से ही राजनीतिक हलकों में अटकलें लग रही थीं, लेकिन दिलीप जायसवाल के ताजा बयान ने इन अटकलों को और बल दे दिया है।
एनडीए के संपर्क में एक बड़ी पार्टी होने का दावा
दिलीप जायसवाल ने अपनी प्रेसवार्ता में कहा कि पूरा इंडिया गठबंधन टूटने की कगार पर है और उनके कई घटक दल एनडीए के संपर्क में हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व से इंडिया गठबंधन के कई दल खुश नहीं हैं और उनके पास चुनाव में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन न होने से असंतोष बढ़ा है। जायसवाल ने दावा किया कि एक बड़ी सहयोगी पार्टी पहले ही एनडीए के साथ बातचीत शुरू कर चुकी है। बयान के बाद यह सवाल तेजी से उठने लगा कि आखिर वह कौन सी पार्टी है, जिसके एनडीए में शामिल होने की चर्चा हो रही है।
आईआईपी और वीआईपी के नाम सबसे आगे
राजनीतिक हलकों में दो पार्टियों का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है—इंडियन इंक्लूसिव पार्टी और विकासशील इंसान पार्टी। इन दोनों दलों और भाजपा के बीच बढ़ती नजदीकियों की चर्चाएं तेज हो गई हैं। इंडियन इंक्लूसिव पार्टी को बिहार विधानसभा चुनाव में एक सीट पर जीत हासिल हुई है और उसके प्रमुख आईपी गुप्ता सहरसा से विधायक चुने गए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि आईपी गुप्ता और एनडीए के बीच संवाद जारी है। हालांकि, आईपी गुप्ता ने गठबंधन में शामिल होने के लिए एक शर्त रखी है। उनकी मांग है कि तांती-ततवा समाज को केंद्र सरकार शेड्यूल कास्ट श्रेणी में शामिल करे। उन्होंने यह भी कहा कि अगर यह मांग पूरी होती है तो वह एनडीए में शामिल हो जाएंगे, लेकिन उससे पहले वे अपने वर्तमान गठबंधन यानी महागठबंधन के नेताओं और समर्थकों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगेंगे।
मुकेश सहनी भी चर्चा में, भाजपा के करीब आने की अटकलें
विकासशील इंसान पार्टी के प्रमुख मुकेश सहनी भी एनडीए में शामिल होने की संभावित सूची में शामिल हैं। सहनी कभी एनडीए का हिस्सा हुआ करते थे और 2020 के विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी के चार विधायक जीते थे। लेकिन बाद में जब वे महागठबंधन में गए तो उन्हें किसी भी चुनाव में अपेक्षित लाभ नहीं मिला। लोकसभा चुनाव हो या विधानसभा उपचुनाव, वीआईपी के उम्मीदवारों को सफलता नहीं मिली। ऐसे में राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि सहनी अब फिर से एनडीए के साथ आने का मन बना सकते हैं। यह भी कहा जा रहा है कि भाजपा उन्हें फिर से गठबंधन में शामिल करने पर विचार कर सकती है, क्योंकि निषाद वोट बैंक में मुकेश सहनी की अच्छी पकड़ मानी जाती है।
इंडिया गठबंधन में बढ़ती खींचतान
इंडिया गठबंधन में पहले से ही कई मुद्दों को लेकर मतभेद देखे जा रहे हैं। सीट बंटवारे की रणनीति, चुनाव अभियान की आक्रामकता और नेतृत्व को लेकर आंतरिक असहमति की खबरें बार-बार सामने आती रही हैं। कांग्रेस के कमजोर प्रदर्शन और क्षेत्रीय दलों की महत्वाकांक्षाओं ने गठबंधन की मजबूती पर सवाल खड़े किए हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि एक भी सहयोगी दल एनडीए में शामिल होता है तो इसका मनोवैज्ञानिक असर पूरे गठबंधन पर पड़ेगा और अन्य छोटे दलों के टूटने की संभावना भी बढ़ जाएगी।
गठबंधन बदलने की राजनीति परंपरा का हिस्सा
बिहार की राजनीति में दल बदल और गठबंधन परिवर्तन नई बात नहीं है। राज्य में कई बार सरकारें इसी आधार पर बनी या गिरी हैं। इसलिए वर्तमान परिदृश्य भी उसी राजनीतिक परंपरा का एक रूप माना जा रहा है। कई दल अवसरवादी राजनीति के तहत अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए समय-समय पर गठबंधन बदलते रहे हैं।
दिलीप जायसवाल के बयान से बढ़ी हलचल
दिलीप जायसवाल का बयान सिर्फ एक राजनीतिक दावा नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे भाजपा की नई रणनीति का हिस्सा कहा जा रहा है। भाजपा का लक्ष्य बिहार में अपनी राजनीतिक मजबूती बढ़ाना और पूरे विपक्ष में अस्थिरता पैदा करना है। इसी रणनीति के तहत एनडीए उन दलों के संपर्क में है जो अपने भविष्य को लेकर असमंजस में हैं।
आने वाले दिनों में राजनीतिक हलचल तेज होने की संभावना
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति और अधिक रोचक हो सकती है। यदि वास्तव में कोई पार्टी एनडीए में शामिल होती है, तो इससे राज्य की राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। यह देखना भी दिलचस्प होगा कि इंडिया गठबंधन इस स्थिति से कैसे निपटता है और अपने सहयोगियों को साथ बनाए रखने के लिए क्या रणनीति अपनाता है। दिलीप जायसवाल के बयान ने राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है और अब सबकी निगाहें उन दलों पर टिकी हैं जिनके बारे में चर्चा है कि वे जल्द ही एनडीए का हिस्सा बन सकते हैं।


