पटना के बड़े अस्पतालों में होता है मरीज व परिजनों का शोषण,जानिए आप भी बिग हॉस्पिटल के बारे में पीड़ित की आपबीती….
पटना।राजधानी में ‘फाइव स्टार’ कल्चर वाले बड़े निजी अस्पतालों के द्वारा मरीजों तथा उनके परिजनों के शोषण की खबरें तो बेहद आम है।मगर आज जिस अस्पताल के बारे में चर्चा चल रही है।उस अस्पताल से पद्मश्री पुरस्कार प्राप्त डॉ विजय प्रकाश का नाम जुड़ा है।डॉ विजय प्रकाश पटना के ही नहीं वरन देश के ख्याति प्राप्त डॉक्टरों में से हैं।उनकी बेहतरीन सेवा-उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें पद्मश्री पुरस्कार दिया गया था।मगर कंकड़बाग स्थित बिग हॉस्पिटल जिसको आरंभ डॉ विजय प्रकाश ने ही किया था, मगर आज अपोलो के साथ अनुबंध में संचालित हो रहा है।दूर से देखने में आलीशान अस्पताल वास्तव में मरीजों के साथ कैसा व्यवहार और इंतजामात करता है।इसकी जानकारी पटना से प्रकाशित एक बड़े दैनिक अखबार के पत्रकार उज्जवल कुमार ने अपने फेसबुक पोस्ट के माध्यम से दी।अपने फेसबुक पोस्ट में उज्जवल कुमार बिग हॉस्पिटल से जुड़े अपने अनुभव को शेयर करते हुए अपनी विवशता की दास्तान सुनाएं। उज्ज्वल अपनी आपबीती में कहते हैं कि नाम के अनुरूप भवन तो जरूर बिग है मगर अस्पताल में डॉक्टर तथा इलाज की बहुत कमी है।दरअसल उज्ज्वल उस अस्पताल में अपने चचेरे भाई को लेकर गए थे।जहां दो दिन रखने के बावजूद,डॉ विजय प्रकाश जिनके नाम के बदौलत उस अस्पताल तक वे लोग पहुंचे थे,देखने तक नहीं आए।उज्ज्वल के भाई लीवर की समस्या से पीड़ित थे।उज्ज्वल ने बताया कि एडमिट किए जाने के 5 घंटों तक कोई डॉक्टर मरीज को देखे तक नहीं पहुंचा। यहां तक कि मरीज के परिजनों को भी सच्चाई से दूर रखा गया।24 घंटे के बाद उनके मरीज के परिजन को डॉ विजय प्रकाश के द्वारा ही बताया गया कि मरीज को लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत है।जो यहां संभव नहीं है,दिल्ली में हो जाएगा मैं रेफर कर दूंगा।अपने फेसबुक पोस्ट में उज्ज्वल ने बहुत कुछ बिग हॉस्पिटल के बारे में कहा है।उन्होंने कहा है कि अस्पताल के बड़े भवन को देखकर ना जाइए।जरूरी नहीं कि वहां पर अच्छे डॉक्टर भी सुलभ होंगे।उन्होंने बताया कि बड़े महंगे अस्पताल के संचालकों का मरीजों तथा उनके परिजनों के प्रति व्यवहार बेहद ही आपत्तिजनक होता है। पटना के अधिकांश हस्पताल बस मरीज को भर्ती कर उसका दोहन करना जानते हैं। जब इलाज की बेहतर सुविधाएं अस्पताल में उपलब्ध नहीं है तो क्रिटिकल कंडीशन के मरीजों को किस आधार पर सिर्फ रेफर करने की सलाह देने के लिए एडमिट किया जाता है।साथ ही उस दौरान हजारों लाखों खर्च भी करवा दिए जाते हैं। बहरहाल उज्ज्वल ने अपने पोस्ट में बताया उनके पास तो काफी पैरवी थी। तब भी उन्हें इतना कुछ झेलना पड़ा। सोचिए जिनके पास पैरवी सिफारिश ना हो उनके साथ यह बड़े अस्पताल वाले क्या करते होंगे?


