तेजस्वी यादव का बड़ा ऐलान, कहा- सरकार बनी तो राज्य में डोमिसाइल नीति लागू होगी, युवाओं का कोई नहीं मारेगा
पटना। बिहार की राजनीति में डोमिसाइल नीति को लेकर नई बहस छिड़ गई है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने हाल ही में एक बड़ा बयान देकर राज्य की राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर घोषणा की है कि अगर उनकी पार्टी की सरकार बनती है तो राज्य में 100 प्रतिशत डोमिसाइल नीति लागू की जाएगी। यानी बिहार में सरकारी नौकरियों और योजनाओं में केवल बिहार के मूल निवासियों को प्राथमिकता दी जाएगी।
सोशल मीडिया पर तेजस्वी की घोषणा
तेजस्वी यादव ने एक्स पर अपनी घोषणा साझा करते हुए लिखा, “जो हमने कह दिया, समझो वह पूरा हुआ!” उनके समर्थकों ने भी इस घोषणा को हाथोंहाथ लिया और सोशल मीडिया पर उन्हें युवाओं का सबसे विश्वसनीय नेता बताया। समर्थकों का कहना है कि तेजस्वी यादव की यही स्पष्टता और वादों के प्रति ईमानदारी उन्हें बाकी नेताओं से अलग बनाती है। उनका दावा है कि यह नीति राज्य के युवाओं को रोजगार और योजनाओं में न्याय दिलाएगी।
डोमिसाइल नीति का उद्देश्य
इस नीति के पीछे का मुख्य मकसद यह है कि राज्य की सरकारी नौकरियों और योजनाओं में बाहर से आने वाले लोगों के मुकाबले बिहार के युवाओं को प्राथमिकता मिले। इससे राज्य की प्रतिभा का पलायन रुकेगा और युवाओं को अपने ही राज्य में रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जा सकेंगे। इसके माध्यम से स्थानीय विकास को भी गति मिलने की उम्मीद है।
विपक्ष का विरोध और सवाल
तेजस्वी यादव की इस घोषणा पर विपक्ष ने तीखा पलटवार किया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवक्ता प्रभाकर मिश्रा ने उनके बयान को ‘गुमराह करने वाला’ बताया। उन्होंने कहा कि जब सरकार बननी ही नहीं है, तो कोई भी कुछ भी बोल सकता है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि बिहार के युवा देशभर में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। अगर बिहार डोमिसाइल नीति लागू करता है, तो अन्य राज्य भी ऐसा कर सकते हैं, जिससे बिहार के लोगों को बाहर नौकरी पाने में दिक्कत हो सकती है।
राजनीतिक बहस और संभावनाएं
डोमिसाइल नीति को लेकर राजनीतिक दलों के बीच तीखी बहस शुरू हो चुकी है। एक ओर जहां राजद इसे युवाओं के लिए फायदे का सौदा बता रही है, वहीं भाजपा और अन्य दल इसे व्यावहारिक रूप से असंभव और सामाजिक दृष्टि से विभाजनकारी कदम बता रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस नीति को लागू किया गया, तो यह कानूनी और संवैधानिक स्तर पर कई चुनौतियां खड़ी कर सकती है।
युवाओं की प्रतिक्रिया
राज्य के युवाओं के बीच इस मुद्दे पर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ युवा इसे अपने हक की लड़ाई बता रहे हैं, तो कुछ इसे सीमित अवसरों की नीति करार दे रहे हैं। कई छात्र-नौजवान मानते हैं कि यदि राज्य में गुणवत्तापूर्ण अवसर मिलें तो उन्हें बाहर जाने की जरूरत नहीं होगी, लेकिन इसके लिए केवल डोमिसाइल नीति नहीं, बल्कि व्यापक रोजगार नीति की भी आवश्यकता है।
आगे की राह
तेजस्वी यादव की यह घोषणा आने वाले समय में चुनावी मुद्दा बन सकती है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अन्य राजनीतिक दल भी इस मुद्दे को अपने घोषणापत्र में शामिल करते हैं या इसके खिलाफ जनमत तैयार करते हैं। फिलहाल यह विषय बिहार की राजनीति और युवाओं के बीच बहस का बड़ा कारण बन चुका है।


