बिहार के अभ्यर्थियों को मिलेगा आरक्षण का लाभ, डोमिसाइल नीति पर बोले मुख्य सचिव आमिर सुबहानी
पटना। प्रदेश में करीब 1.70 लाख शिक्षकों की नियुक्ति होनी है। परंतु, डोमिसाइल खत्म करने को लेकर शिक्षक अभ्यर्थी काफी आक्रोशित हैं। बता दे की डोमिसाइल नीति के विरोध में बीते दिन पटना के गांधी मैदान में सैकड़ों शिक्षक अभ्यर्थी बैनर-पोस्टर लेकर जमा हो गए थे और सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। वही इस दौरान उन पर लाठीचार्ज भी किया गया था। वही डोमिसाइल को खत्म करने की मांग शिक्षक अभ्यर्थी लगातार कर रहे हैं। इनके हंगामा और प्रदर्शन को देखते हुए सरकार ने डोमिसाइल नीति को लेकर सफाई दी है। वही आज नीतीश सरकार के मुख्य सचिव आमिर सुबहानी ने पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। वही इस मौके पर शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव के.के पाठक भी मौजूद रहे। पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षकों की बहाली को लेकर सरकार ने संशोधन कर बिहार राज्य के स्थायी निवासी होने की शर्त को हटाया है। अब जन्म और निवास के आधार पर कोई उम्मीदवार अयोग्य नहीं हो सकता है। राज्य के स्थायी निवासी होने की शर्त हटाई गयी है।

कानून के लिहाज से सरकार ने यह फैसला लिया है। आगे मुख्य सचिव ने पत्रकारों को बताया कि पड़ोसी राज्य यूपी में भी यही नियम लागू है। संविधान के अनुछेद 16 में इस बात का वर्णन है। मुख्य सचिव ने कहा कि BPSC के माध्यम से अच्छे शिक्षकों का चयन होगा। शिक्षकों की भर्ती के लिए BPSC ने पहले 3 बार परीक्षा ली थी। तीनों बार पूरे देश के लोगों को परीक्षा में शामिल होने की सुविधा मिली थी। एक लाख 68 हजार अभ्यर्थियों में मात्र 3 हजार अभ्यर्थी दूसरे प्रदेश के चयनित हुए थे। उसी के आधार पर इस बार भी BPSC परीक्षा ले रही है। इससे बिहार के छात्रों को किसी प्रकार का नुकसान नहीं होगा। बिहार के अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ मिलेगा। मुख्य सचिव ने बताया कि आर्टिकल 16 यह कहता है कि राज्य के अधीन केवल जाति, लिंग, जन्म स्थान, निवास या किसी के आधार पर तो कोई नागरिक अपात्र नहीं होगा। राज्य से बाहर किसी का जन्म स्थान है तो वे गैर कानूनी और असंविधानिक होगी। पूर्व में वर्ष 1994, 1999 और 2000 में BPSC ने परीक्षा ली थी। इससे पहले भी यही कानून था।

