January 23, 2026

सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट के स्ट्रक्चर में बदलाव करेगी बीसीसीआई, हटेगा ‘ए प्लस’ ग्रेड, कई दिग्गजों की घटेगी सैलरी

नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट में एक बार फिर बड़े बदलाव की आहट सुनाई दे रही है। दुनिया के सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड माने जाने वाले भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट के ढांचे में अहम फेरबदल करने की तैयारी कर ली है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बीसीसीआई अब सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम से ए प्लस ग्रेड को पूरी तरह खत्म करने पर विचार कर रही है। अगर यह फैसला लागू होता है तो इसका सीधा असर भारतीय क्रिकेट के कई बड़े सितारों की सैलरी पर पड़ेगा।
सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम में क्या है बदलाव की योजना
फिलहाल बीसीसीआई के सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट चार श्रेणियों में बंटे हुए हैं, जिनमें ए प्लस, ए, बी और सी ग्रेड शामिल हैं। ए प्लस ग्रेड सबसे ऊंची श्रेणी मानी जाती है और इसमें शामिल खिलाड़ियों को सालाना 7 करोड़ रुपये की सैलरी मिलती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक बीसीसीआई अब इस टॉप ग्रेड को हटाकर केवल तीन कैटेगरी ए, बी और सी को ही बनाए रखना चाहती है। इसका मकसद कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम को सरल बनाना और प्रदर्शन आधारित ढांचे को और स्पष्ट करना बताया जा रहा है।
ए प्लस ग्रेड के दिग्गजों पर पड़ेगा असर
वर्तमान समय में ए प्लस ग्रेड में चार बड़े नाम शामिल हैं। इनमें कप्तान रोहित शर्मा, विराट कोहली, तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह और ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा आते हैं। ए प्लस ग्रेड हटने के बाद इन खिलाड़ियों को दूसरे ग्रेड में शिफ्ट किया जाएगा, जिससे उनकी सालाना आय में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। खासकर रोहित शर्मा और विराट कोहली के लिए यह फैसला आर्थिक रूप से बड़ा झटका माना जा रहा है।
रोहित और विराट की सैलरी में संभावित कटौती
रिपोर्ट्स की मानें तो रोहित शर्मा और विराट कोहली को बी ग्रेड में रखा जा सकता है। फिलहाल बी ग्रेड के खिलाड़ियों को सालाना 3 करोड़ रुपये मिलते हैं। ऐसे में अगर यह बदलाव लागू होता है तो दोनों दिग्गजों की सैलरी 7 करोड़ से घटकर 3 करोड़ रुपये रह जाएगी। यानी सीधे तौर पर 4 करोड़ रुपये की कटौती। लंबे समय से टीम इंडिया की रीढ़ माने जाने वाले इन खिलाड़ियों के लिए यह फैसला भावनात्मक और प्रतीकात्मक रूप से भी अहम माना जा रहा है।
बुमराह और जडेजा का भविष्य किस ग्रेड में
जहां रोहित और विराट को बी ग्रेड में शिफ्ट किए जाने की चर्चा है, वहीं जसप्रीत बुमराह को ए ग्रेड में रखा जा सकता है। फिलहाल ए ग्रेड के खिलाड़ियों को सालाना 5 करोड़ रुपये मिलते हैं। हालांकि अगर बीसीसीआई ए ग्रेड की राशि में भी बदलाव करती है, तो बुमराह को भी आर्थिक नुकसान हो सकता है। रवींद्र जडेजा को लेकर भी कयास लगाए जा रहे हैं कि उन्हें बी ग्रेड में डाला जा सकता है, जिससे उनकी सैलरी भी कम हो जाएगी।
बीसीसीआई का मौजूदा सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट ढांचा
वर्तमान में भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने कुल 34 खिलाड़ियों को सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट दे रखा है। इनमें से सबसे ज्यादा खिलाड़ी सी ग्रेड में हैं, जिनकी संख्या 19 है। बी ग्रेड में फिलहाल पांच खिलाड़ी शामिल हैं, जबकि ए ग्रेड में छह खिलाड़ी मौजूद हैं। ए प्लस ग्रेड में केवल चार चुनिंदा खिलाड़ियों को रखा गया है, जिन्हें भारतीय क्रिकेट का सबसे भरोसेमंद और स्थायी चेहरा माना जाता रहा है।
कौन-कौन खिलाड़ी किस ग्रेड में हैं
मौजूदा व्यवस्था के अनुसार ए प्लस ग्रेड में रोहित शर्मा, विराट कोहली, जसप्रीत बुमराह और रवींद्र जडेजा शामिल हैं। ए ग्रेड में मोहम्मद सिराज, केएल राहुल, शुभमन गिल, हार्दिक पंड्या, मोहम्मद शमी और ऋषभ पंत का नाम आता है। बी ग्रेड में सूर्यकुमार यादव, कुलदीप यादव, अक्षर पटेल, यशस्वी जायसवाल और श्रेयस अय्यर हैं। वहीं सी ग्रेड में युवा और उभरते खिलाड़ियों की लंबी सूची है, जिसमें रिंकू सिंह, तिलक वर्मा, ऋतुराज गायकवाड़, शिवम दुबे, संजू सैमसन, ईशान किशन और कई अन्य नाम शामिल हैं।
बदलाव के पीछे संभावित वजहें
क्रिकेट जानकारों का मानना है कि बीसीसीआई यह कदम खिलाड़ियों के मौजूदा प्रदर्शन, फिटनेस और उपलब्धता को ध्यान में रखकर उठा रही है। हाल के वर्षों में टीम इंडिया में युवा खिलाड़ियों की मजबूत एंट्री हुई है और बोर्ड शायद सीनियर और जूनियर खिलाड़ियों के बीच का अंतर नए तरीके से परिभाषित करना चाहता है। इसके अलावा बोर्ड पर वित्तीय अनुशासन और संतुलन बनाए रखने का दबाव भी एक कारण हो सकता है।
आगे क्या होगा असर
अगर ए प्लस ग्रेड को हटाने का फैसला औपचारिक रूप से लागू हो जाता है, तो यह भारतीय क्रिकेट के सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम का सबसे बड़ा बदलाव माना जाएगा। इससे न केवल दिग्गज खिलाड़ियों की सैलरी घटेगी, बल्कि भविष्य में नए खिलाड़ियों के लिए ग्रेड में प्रमोशन का रास्ता भी अलग तरीके से तय होगा। अब सभी की नजरें बीसीसीआई की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि यह बदलाव कब और किस रूप में लागू होगा।

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