जदयू शीर्ष नेतृत्व पर बांका सांसद का पलटवार, कहा- जब सवाल करेंगे, तो सारे जवाब दूंगा
पटना। बिहार की राजनीति में इन दिनों जनता दल (यूनाइटेड) यानी जदयू के भीतर उभरता विवाद चर्चा का विषय बना हुआ है। बांका से सांसद गिरधारी यादव के खिलाफ पार्टी नेतृत्व ने सख्त रुख अपनाते हुए उनकी लोकसभा सदस्यता रद्द कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह कार्रवाई पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोपों के आधार पर की जा रही है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर गिरधारी यादव ने संयमित प्रतिक्रिया दी है और कहा है कि वे उचित मंच पर ही अपना पक्ष रखेंगे।
सवालों पर सांसद का जवाब
जब इस मामले को लेकर गिरधारी यादव से सवाल किया गया तो उन्होंने साफ कहा कि जब लोकसभा अध्यक्ष उनसे इस संबंध में सवाल करेंगे, तभी वे विस्तृत जवाब देंगे। फिलहाल उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि पार्टी के वरिष्ठ नेता दिलेश्वर कामत ने उनके खिलाफ क्या टिप्पणी की है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके पास ऐसी कोई जानकारी या रिकॉर्ड नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि उन्होंने पार्टी विरोधी कोई गतिविधि की है।
मतदाता सूची विवाद से शुरू हुआ मतभेद
दरअसल, गिरधारी यादव और पार्टी नेतृत्व के बीच मतभेद की शुरुआत पिछले वर्ष हुई थी, जब बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर उन्होंने सवाल उठाए थे। उनका तर्क था कि यदि लोकसभा चुनाव के दौरान मतदाता सूची सही मानी गई थी, तो कुछ ही महीनों बाद होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए वही सूची गलत कैसे हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा था कि क्या इसका मतलब यह है कि वे खुद गलत मतदाता सूची के आधार पर निर्वाचित हुए हैं। उनके इस बयान को पार्टी लाइन से अलग माना गया और तभी से उनके खिलाफ कार्रवाई की अटकलें तेज हो गई थीं।
विधानसभा चुनाव में परिवार का अलग रुख
साल 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान भी गिरधारी यादव के परिवार का रुख पार्टी के लिए असहज करने वाला रहा। उनके बेटे चाणक्य प्रकाश रंजन ने राष्ट्रीय जनता दल के टिकट पर बेलहर सीट से चुनाव लड़ा। हालांकि वे जदयू उम्मीदवार मनोज यादव से हार गए, लेकिन इस घटनाक्रम ने पार्टी नेतृत्व को नाराज कर दिया। माना जा रहा है कि इसी के बाद से गिरधारी यादव के खिलाफ कार्रवाई की जमीन तैयार होने लगी थी।
लंबे राजनीतिक अनुभव वाले नेता
गिरधारी यादव बिहार की राजनीति के अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत युवा कांग्रेस से की थी। बाद में वे वी. पी. सिंह की राजनीति से प्रभावित होकर जनता दल से जुड़ गए और धीरे-धीरे अपनी मजबूत पहचान बनाई। वे लोकसभा और बिहार विधानसभा दोनों सदनों में चार-चार बार चुने जा चुके हैं। लोकसभा में वे 1997, 2004, 2019 और 2024 में बांका से सांसद बने। वहीं विधानसभा में उन्होंने 1997 में कटोरिया और 2010 तथा 2015 में बेलहर सीट से जीत दर्ज की। हाल ही में हुए 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने राजद उम्मीदवार जयप्रकाश नारायण यादव को एक लाख से अधिक मतों के अंतर से हराया था, जो उनकी मजबूत जनाधार को दर्शाता है।
संसद में भी रहे विवादों में
गिरधारी यादव का नाम पहले भी कुछ विवादों में सामने आ चुका है। वर्ष 2023 में तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा से जुड़े ‘नकद लेकर सवाल पूछने’ मामले में उन्होंने लोकसभा की आचार समिति की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि जांच सही तरीके से नहीं हुई और बैठक बहुत कम समय में समाप्त कर दी गई। इसी दौरान उन्होंने संसद में यह भी स्वीकार किया था कि वे खुद प्रश्न तैयार नहीं करते, बल्कि उनके निजी सहायक या स्टाफ यह काम करते हैं, क्योंकि उन्हें कंप्यूटर चलाने में दिक्कत होती है। इस बयान को लेकर भी राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा हुई थी।
आगे क्या होगा
अब जबकि जदयू नेतृत्व ने उनके खिलाफ कड़ा कदम उठाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठ रहा है कि आगे क्या होगा। यदि पार्टी की ओर से लोकसभा अध्यक्ष को औपचारिक शिकायत दी जाती है, तो गिरधारी यादव की सदस्यता पर खतरा मंडरा सकता है। हालांकि अंतिम फैसला संवैधानिक प्रक्रिया के तहत ही लिया जाएगा। वहीं, गिरधारी यादव के रुख से यह साफ है कि वे अभी खुलकर टकराव की स्थिति में नहीं आना चाहते और उचित मंच पर ही अपनी बात रखने की रणनीति अपना रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह राजनीतिक टकराव किस दिशा में जाता है और इसका बिहार की राजनीति पर क्या असर पड़ता है।


