27 जनवरी को बैंक कर्मियों की होगी देशव्यापी हड़ताल, चार दिनों तक सेवाएं होगी प्रभावित
नई दिल्ली। देश की बैंकिंग व्यवस्था एक बार फिर बड़े आंदोलन की ओर बढ़ती नजर आ रही है। पाँच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह की लंबे समय से लंबित मांग को लेकर 27 जनवरी को देशभर के सरकारी, निजी, ग्रामीण और सहकारी बैंकों में एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल का ऐलान किया गया है। इस हड़ताल का आह्वान यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) ने किया है, जिसमें बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों के लगभग सभी प्रमुख संगठन शामिल हैं। यूनियनों के अनुसार, इस हड़ताल का असर देश के कोने-कोने में देखने को मिलेगा और इससे करोड़ों बैंक उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। खास बात यह है कि 24 जनवरी से 27 जनवरी तक कुल चार दिनों तक बैंक शाखाओं में कामकाज बुरी तरह प्रभावित रहने की आशंका जताई जा रही है। इसमें एक ओर घोषित हड़ताल शामिल है, तो वहीं अन्य दिनों में अवकाश और सीमित सेवाओं का असर भी ग्राहकों पर पड़ेगा। ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (आईबोक) के राष्ट्रीय सचिव डी.एन. त्रिवेदी ने बताया कि बैंक कर्मियों का यह आंदोलन केवल पाँच दिवसीय कार्यसप्ताह तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष में आईडीबीआई बैंक के विनिवेश पर रोक, ग्रामीण बैंकों और एलआईसी के निजीकरण की प्रक्रिया पर विराम, नियमित कार्यालय समय लागू करने, पेंशन के अद्यतन और अन्य लंबित मांगें भी शामिल हैं। त्रिवेदी के अनुसार, सरकार की ओर से बार-बार इन मुद्दों की अनदेखी किए जाने के कारण कर्मचारियों में भारी असंतोष व्याप्त है। पाँच दिवसीय कार्यसप्ताह की मांग को लेकर देश के कई हिस्सों में बैंक यूनियनों ने धरना-प्रदर्शन और सभाओं का आयोजन किया। इन कार्यक्रमों में बैंक यूनियनों के कई वरिष्ठ नेता और कर्मचारी बड़ी संख्या में शामिल हुए। वक्ताओं ने केंद्र सरकार की बैंकिंग नीतियों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि बैंक कर्मी भी इंसान हैं और उन्हें भी संतुलित कार्यजीवन का अधिकार मिलना चाहिए। उनका कहना था कि लगातार बढ़ते कार्यभार और दबाव के बीच कर्मचारियों की सामाजिक और पारिवारिक जिंदगी प्रभावित हो रही है। यूनियन नेताओं ने तर्क दिया कि केंद्र और राज्य सरकार के कार्यालयों, रिजर्व बैंक, नाबार्ड, बीमा कंपनियों, सेबी और आयकर विभाग में पहले से ही पाँच दिवसीय सप्ताह लागू है। इसके बावजूद बैंकों में अब तक यह व्यवस्था लागू नहीं की गई है। जबकि डिजिटल बैंकिंग के विस्तार के चलते इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, यूपीआई और एटीएम जैसी सुविधाओं से अधिकांश लेन-देन अब ऑनलाइन हो रहे हैं। ऐसे में बैंक कर्मचारियों पर पारंपरिक कार्यदिवस का अतिरिक्त बोझ डालना न्यायसंगत नहीं है। हड़ताल के दौरान चेक क्लियरेंस, नकद निकासी-जमा, शाखा आधारित सेवाएं, ऋण स्वीकृति और अन्य नियमित कार्य ठप रहने की संभावना है। हालांकि एटीएम और ऑनलाइन सेवाएं सीमित रूप से चालू रह सकती हैं, लेकिन तकनीकी या नकदी संबंधी दिक्कतों से इन सेवाओं पर भी असर पड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों और वरिष्ठ नागरिकों को अधिक परेशानी झेलनी पड़ सकती है। यूनियनों ने सरकार से अपील की है कि वह टकराव की बजाय संवाद का रास्ता अपनाए और बैंक कर्मियों की जायज मांगों पर शीघ्र निर्णय ले। उनका कहना है कि यदि समय रहते सकारात्मक पहल नहीं की गई तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज किया जा सकता है। फिलहाल, देशभर के खाताधारकों को सलाह दी जा रही है कि वे हड़ताल से पहले अपने जरूरी बैंकिंग कार्य निपटा लें, ताकि असुविधा से बचा जा सके।


