सम्राट चौधरी पर प्रशांत किशोर का हमला, कहा- वे अगर शकुनी चौधरी के बेटे नहीं होते तो नहीं बनते डिप्टी सीएम
पटना। जन सुराज के संयोजक प्रशांत किशोर ने बिहार की राजनीति में परिवारवाद पर करारा हमला बोलते हुए कई नेताओं को निशाने पर लिया, जिनमें प्रमुख रूप से भाजपा के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी शामिल रहे। प्रशांत किशोर ने कहा कि भाजपा ने जब बिहार में कोई अन्य नेता नहीं पाया तो उन्होंने सम्राट चौधरी को उपमुख्यमंत्री बना दिया, जो परिवारवाद की उपज हैं। उनका इशारा सम्राट चौधरी के पिता शकुनी चौधरी की राजनीतिक पृष्ठभूमि की ओर था। प्रशांत किशोर ने परिवारवाद को लेकर सम्राट चौधरी की ताजपोशी को बिहार की राजनीति में व्याप्त परिवारवाद का एक उदाहरण बताया। प्रशांत किशोर ने कहा कि पिछले 20 वर्षों से बिहार की राजनीति 1200-1250 परिवारों के इर्द-गिर्द घूम रही है। ये वही परिवार हैं जिनसे विधायक, सांसद, और मंत्री बनते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन परिवारों ने राज्य में ऐसा भ्रम फैला रखा है कि बिहार में राजनीति करनी है तो जाति और धनबल होना आवश्यक है। प्रशांत किशोर ने जोर देकर कहा कि इन्हीं राजनीतिक परिवारों के लोग अलग-अलग दलों के साथ राजनीति करते हुए अपनी शक्ति बनाए रखते हैं। चाहे वह भाजपा हो, जेडीयू हो या फिर राजद, इन दलों में इन परिवारों की मौजूदगी हमेशा बनी रहती है। सम्राट चौधरी का उदाहरण देते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि उनके पिता शकुनी चौधरी ने हर सत्ता में अपनी जगह बनाए रखी है। कांग्रेस के शासनकाल में वह विधायक और मंत्री थे। इसके बाद लालू प्रसाद यादव के राज में भी उन्होंने अपनी राजनीतिक ताकत बनाए रखी और विधायक एवं मंत्री बने। जब नीतीश कुमार की सरकार सत्ता में आई, तब भी शकुनी चौधरी ने मंत्री पद हासिल कर लिया। अब भाजपा के उभार के बाद, सम्राट चौधरी को उपमुख्यमंत्री बनाकर परिवारवाद को और बढ़ावा दिया गया है। प्रशांत किशोर ने बताया कि यह सिर्फ एक उदाहरण नहीं है, बल्कि बिहार की राजनीति में ऐसे कई परिवार हैं, जो लगातार सत्ता के विभिन्न रूपों में बने रहते हैं। हर विधानसभा क्षेत्र में कुछ गिने-चुने परिवार ही चुनाव लड़ते हैं, हारते और जीतते हैं, लेकिन राजनीति में बने रहते हैं। यही वजह है कि बिहार की राजनीति में नए चेहरों और विचारों का अभाव देखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि इन परिवारों के कब्जे में होने के कारण राजनीति सिर्फ जातिवाद और धनबल तक सीमित हो गई है। प्रशांत किशोर ने यह भी आरोप लगाया कि बिहार की जनता को इन राजनीतिक परिवारों ने भ्रमित कर रखा है। उन्होंने कहा कि बिहार में विकास और राजनीति को लेकर जनता को गुमराह किया गया है। जनता को बताया गया है कि बिना जाति या पैसे के राजनीति में सफलता पाना संभव नहीं है, जबकि सच्चाई यह है कि ये परिवार अपनी सत्ता बनाए रखने के लिए इस तरह की धारणा फैलाते हैं। किशोर ने कहा कि जन सुराज का उद्देश्य इस परिवारवादी राजनीति को खत्म करना और बिहार में नई राजनीतिक सोच और दृष्टिकोण लाना है। उनका मानना है कि अगर राजनीति में परिवारवाद को खत्म किया जाए, तो राज्य में बेहतर नेतृत्व और विकास की संभावना है। प्रशांत किशोर की ये टिप्पणियां बिहार की वर्तमान राजनीति के प्रति उनकी गहरी असहमति को दर्शाती हैं और वे इसे बदलने का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहे हैं।


