बिहार में 64 लाख से अधिक छात्रों का नहीं बनी अपार आईडी, वित्तीय भुगतान पर आया संकट

  • राज्य के 2 करोड़ से अधिक विद्यार्थियों को मिलनी है डिजिटल शैक्षणिक पहचान, अभी तक केवल 1.42 करोड़ का ही पंजीकरण
  • निजी विद्यालयों में स्थिति ज्यादा खराब, आधार सत्यापन और जानकारी के अभाव से प्रक्रिया धीमी

पटना। बिहार में स्कूली छात्रों के लिए अनिवार्य बनाए गए अपार कार्ड बनाने की प्रक्रिया अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पा रही है। शिक्षा विभाग के लगातार निर्देशों के बावजूद राज्य के लाखों विद्यार्थियों का अपार कार्ड अभी तक नहीं बन सका है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार राज्य के सरकारी और निजी विद्यालयों में पढ़ने वाले कुल 2 करोड़ 6 लाख 25 हजार 297 छात्र-छात्राओं का अपार कार्ड बनाया जाना है, लेकिन 10 मार्च तक केवल 1 करोड़ 42 लाख 16 हजार 873 विद्यार्थियों का ही अपार पहचान संख्या तैयार हो पाई है। इसका अर्थ है कि अभी भी 64 लाख 8 हजार 424 छात्रों के अपार कार्ड बनना बाकी हैं। अपार कार्ड नहीं बनने के कारण कई छात्र-छात्राओं को सरकारी योजनाओं और शैक्षणिक सुविधाओं का लाभ लेने में परेशानी हो सकती है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार लगभग 17 लाख ऐसे विद्यार्थी हैं जिनका आधार सत्यापन हो चुका है, फिर भी उनका अपार कार्ड तैयार नहीं हो पाया है। शिक्षा विभाग लगातार जिला स्तर के अधिकारियों को निर्देश दे रहा है कि सभी छात्रों का आधार और अपार कार्ड जल्द से जल्द तैयार कराया जाए। इसके बावजूद प्रक्रिया की रफ्तार धीमी बनी हुई है। आंकड़ों के अनुसार सरकारी विद्यालयों की तुलना में निजी विद्यालयों में अपार कार्ड बनाने की स्थिति अधिक चिंताजनक है। राज्य के सरकारी विद्यालयों में लगभग 1 करोड़ 65 लाख छात्र-छात्राएं नामांकित हैं। इनमें से करीब 1 करोड़ 26 लाख विद्यार्थियों के ही अपार कार्ड बने हैं, जबकि लगभग 24 प्रतिशत छात्रों का पंजीकरण अब भी शेष है। वहीं निजी विद्यालयों की स्थिति और भी खराब बताई जा रही है। निजी विद्यालयों में नामांकित 35 लाख 49 हजार विद्यार्थियों में से केवल 13 लाख 58 हजार छात्रों के ही अपार कार्ड बने हैं। इसका मतलब है कि निजी विद्यालयों के लगभग 68 प्रतिशत छात्रों का अपार पंजीकरण अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। अपार कार्ड भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक विशेष व्यवस्था है, जिसके तहत छात्रों को 12 अंकों की एक विशिष्ट डिजिटल पहचान संख्या दी जाती है। इसे वन नेशन वन स्टूडेंट आईडी के नाम से भी जाना जाता है। यह पहचान संख्या आधार कार्ड से जुड़ी होती है और इसके माध्यम से छात्रों के शैक्षणिक जीवन से जुड़े सभी रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रखे जाते हैं। इस प्रणाली के तहत छात्र के पूर्व प्राथमिक स्तर से लेकर उच्च शिक्षा तक के सभी शैक्षणिक दस्तावेज जैसे अंकपत्र, प्रमाणपत्र और शैक्षणिक क्रेडिट का पूरा विवरण सुरक्षित रखा जाता है। इससे छात्रों के दस्तावेजों का प्रबंधन आसान हो जाता है। शिक्षा विभाग के अनुसार अपार कार्ड नहीं बनने के पीछे कई कारण सामने आए हैं। सबसे बड़ा कारण यह है कि अभी भी सभी बच्चों का आधार कार्ड नहीं बन पाया है। चूंकि अपार कार्ड आधार से जुड़ा होता है, इसलिए आधार बनने के बाद ही अपार पहचान संख्या तैयार की जा सकती है। इसके अलावा आधार में किसी प्रकार की त्रुटि होने पर भी अपार कार्ड नहीं बन पाता। कुछ मामलों में अभिभावकों और विद्यालय प्रबंधन द्वारा आवश्यक जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं कराई जाती, जिससे प्रक्रिया प्रभावित होती है। अधिकारियों का कहना है कि अपार प्रणाली लागू होने से छात्रों को कई तरह की सुविधाएं मिलेंगी। इसके तहत सभी शैक्षणिक दस्तावेज डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेंगे और किसी भी विद्यालय या महाविद्यालय में नामांकन के समय दस्तावेजों का स्थानांतरण आसानी से हो सकेगा। इसके अलावा नौकरी या उच्च शिक्षा के लिए आवेदन करते समय छात्रों को भौतिक रूप से दस्तावेज साथ ले जाने की आवश्यकता नहीं होगी। शिक्षा विभाग ने सभी जिलों को निर्देश दिया है कि लंबित अपार कार्ड जल्द से जल्द बनवाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए, ताकि सभी छात्रों को इस डिजिटल शैक्षणिक पहचान का लाभ मिल सके।

You may have missed