कोटा में फिर बिहारी छात्र ने की आत्महत्या, नीट के स्टूडेंट ने फांसी लगाकर दी जान

पटना। कोटा में कोचिंग कर रहे छात्रों की आत्महत्या के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। हाल ही में एक और छात्र ने खुदकुशी कर ली, जिससे इस साल कोटा में सुसाइड करने वाले कोचिंग छात्रों की संख्या आठ तक पहुंच गई है। यह घटना जवाहर नगर थाना क्षेत्र की है, जहां एक 17 वर्षीय छात्र ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
छात्र की पहचान और पृष्ठभूमि
मृतक छात्र का नाम हर्षराज शंकर था और वह बिहार के नालंदा जिले का रहने वाला था। हर्षराज कोटा में रहकर मेडिकल प्रवेश परीक्षा (नीट) की तैयारी कर रहा था। वह अप्रैल 2024 से कोटा में रह रहा था और अपने चचेरे भाइयों के साथ एक हॉस्टल में ठहरा हुआ था।
घटना का विवरण
घटना की जानकारी तब सामने आई जब हॉस्टल मालिक ने पुलिस को सूचना दी कि छात्र अपने कमरे का दरवाजा नहीं खोल रहा है। जब पुलिस मौके पर पहुंची और दरवाजा तोड़ा, तो देखा कि हर्षराज ने कमरे में फांसी लगा ली थी। बताया जा रहा है कि कमरे के पंखे में एंटी-हैंगिंग डिवाइस लगी थी, जिससे फंदा लगाकर आत्महत्या करना संभव नहीं था। इसलिए छात्र ने किसी अन्य रॉड का सहारा लेकर अपनी जान दे दी।
कोई सुसाइड नोट नहीं मिला
पुलिस ने जब छात्र के कमरे की तलाशी ली, तो वहां कोई सुसाइड नोट नहीं मिला। इससे यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि आत्महत्या की वजह क्या थी। पुलिस अब मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि छात्र किन परिस्थितियों में यह कठोर कदम उठाने के लिए मजबूर हुआ।
कोटा में बढ़ते सुसाइड के मामले
कोटा, जो देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए जाना जाता है, वहां लगातार छात्रों की आत्महत्या के मामले सामने आ रहे हैं। इस साल कोटा में यह आठवीं घटना है, जिसने कोचिंग संस्थान और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर एक गंभीर बहस छेड़ दी है। पढ़ाई का अत्यधिक दबाव, अकेलापन, और असफलता का डर कई छात्रों को मानसिक रूप से परेशान कर रहा है।
पुलिस की आगे की कार्रवाई
पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया है और आगे की जांच कर रही है। इसके अलावा, छात्र के परिवारवालों को भी सूचना दे दी गई है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या छात्र किसी मानसिक तनाव या डिप्रेशन से जूझ रहा था।
समाज में चिंता और समाधान की आवश्यकता
कोटा में लगातार हो रही इस तरह की घटनाओं ने समाज को झकझोर कर रख दिया है। इस मुद्दे पर कोचिंग संस्थानों और सरकार को मिलकर काम करने की जरूरत है। छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने और उन्हें काउंसलिंग जैसी सुविधाएं प्रदान करने की आवश्यकता है ताकि वे दबाव में आकर आत्महत्या जैसा कठोर कदम न उठाएं। इस तरह की घटनाएं यह सवाल खड़ा करती हैं कि क्या छात्रों पर पढ़ाई का इतना दबाव होना सही है? क्या शिक्षा व्यवस्था को इस ओर ध्यान देने की जरूरत नहीं है कि छात्रों को परीक्षा के दबाव से बचाया जाए और उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाया जाए? अब समय आ गया है कि इस विषय पर गंभीरता से विचार किया जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
