February 10, 2026

जदयू विधायक अनंत सिंह ने जेल से आकर ली विधायक पद की शपथ, सीएम नीतीश का पैर छूकर लिया आशीर्वाद

पटना। बिहार की राजनीति में मंगलवार को एक बार फिर ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने सत्ता, अपराध और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के आपसी संबंधों पर नई बहस छेड़ दी। बाहुबली छवि वाले जदयू विधायक अनंत सिंह ने जेल से विधानसभा पहुंचकर विधायक पद की शपथ ली और कुछ ही देर बाद फिर जेल लौट गए। यह पूरा घटनाक्रम न केवल राजनीतिक रूप से अहम रहा, बल्कि इसके प्रतीकात्मक अर्थों ने भी खूब ध्यान खींचा।
विधानसभा में शपथ का दृश्य
मंगलवार की सुबह कड़ी सुरक्षा के बीच अनंत सिंह को बेऊर जेल से एंबुलेंस के जरिए विधानसभा लाया गया। सदन में उनके प्रवेश के साथ ही हलचल तेज हो गई। शपथ ग्रहण के दौरान उनका माइक बंद था, लेकिन उन्होंने बिना किसी लिखित पाठ को देखे संविधान के प्रति निष्ठा और भारत की प्रभुता व अखंडता बनाए रखने की शपथ ली। शपथ का यह दृश्य औपचारिक जरूर था, लेकिन जेल से आए विधायक द्वारा संविधान के प्रति निष्ठा जताने की तस्वीर अपने आप में कई सवाल छोड़ गई।
स्पीकर और मुख्यमंत्री से मुलाकात
शपथ लेने के बाद अनंत सिंह सीधे विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार से मिले। इसके बाद वे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास पहुंचे और उनका पैर छूकर आशीर्वाद लिया। यह पल कैमरों में कैद हो गया और राजनीतिक गलियारों में इसकी चर्चा होने लगी। मुख्यमंत्री ने उनसे उनके तिलक के बारे में भी पूछा, जिसे लेकर सदन में मौजूद लोगों के बीच हल्की मुस्कान और फुसफुसाहट देखी गई। कुछ ही देर बाद अनंत सिंह अपनी सीट पर जाकर बैठ गए, मानो यह जताने के लिए कि कानूनी अड़चनों के बावजूद वे निर्वाचित प्रतिनिधि के तौर पर अपनी जगह कायम रखना चाहते हैं।
कम समय का प्रवास
करीब दस मिनट तक विधानसभा परिसर में रहने के बाद अनंत सिंह को वापस जेल ले जाया गया। कोर्ट की ओर से उन्हें केवल शपथ ग्रहण के लिए ही अनुमति दी गई थी। यही वजह रही कि न तो वे ज्यादा देर रुके और न ही किसी विस्तृत बातचीत में शामिल हुए। उनका यह सीमित प्रवास भी राजनीतिक संदेश देने के लिहाज से काफी माना जा रहा है।
मीडिया से बयान
विधानसभा से निकलते समय मीडिया से बातचीत में अनंत सिंह ने कहा कि उन्हें न्याय की पूरी उम्मीद है। उन्होंने बताया कि जांच चल रही है और उन्हें विश्वास है कि सौ फीसदी न्याय मिलेगा। विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि अब विरोधी बोलने की स्थिति में नहीं हैं और तेजस्वी यादव को किसी और पार्टी से टिकट लेकर चुनाव लड़ना होगा। हालांकि जब उनसे नीट छात्रा से जुड़े रेप-हत्या मामले पर सवाल किया गया, तो उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और चुपचाप आगे बढ़ गए।
सेहत और जमानत का सवाल
अनंत सिंह ने यह भी बताया कि उनकी तबीयत ठीक नहीं थी, इसी वजह से शपथ लेने में देरी हुई। मोकामा की जनता से मिलने के सवाल पर उन्होंने कहा कि जब अदालत अनुमति देगी, तभी वे जेल से बाहर आएंगे। उन्होंने जमानत के लिए आवेदन देने की बात भी दोहराई, लेकिन साफ किया कि फिलहाल दुलारचंद यादव हत्याकांड में उन्हें राहत नहीं मिली है।
मोकामा सीट की चुनावी तस्वीर
अनंत सिंह ने मोकामा विधानसभा सीट से 28,206 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की है। उन्हें कुल 91,416 वोट मिले, जबकि राजद प्रत्याशी वीणा देवी को 63,210 वोटों पर संतोष करना पड़ा। यह जीत उनके समर्थकों के लिए बड़ी राजनीतिक उपलब्धि मानी जा रही है। चुनाव परिणाम के बाद उनके पुराने बंगले में करीब 50 हजार लोगों के लिए भोज की व्यवस्था की गई थी, जिसने उनके जनाधार की ताकत को एक बार फिर दिखा दिया।
राजनीतिक मायने
जेल में रहते हुए भी विधानसभा की सदस्यता ग्रहण करना और मुख्यमंत्री से मुलाकात करना बिहार की राजनीति में असामान्य नहीं है, लेकिन हर बार यह लोकतंत्र और कानून के रिश्ते पर नए सवाल खड़े करता है। एक ओर संविधान की शपथ है, तो दूसरी ओर गंभीर आपराधिक मामले। यही द्वंद्व इस पूरे घटनाक्रम का मूल है। अनंत सिंह का यह शपथ ग्रहण केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि बिहार की सियासत का वह चेहरा है, जहां जनादेश, कानून और सत्ता एक साथ खड़े दिखाई देते हैं। आने वाले दिनों में अदालत के फैसले और राजनीतिक घटनाक्रम यह तय करेंगे कि यह अध्याय किस दिशा में आगे बढ़ता है।

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