सुपौल में रिश्वत लेते अमीन गिरफ्तार, निगरानी विभाग की टीम ने 20 हजार के साथ रंगे हाथ दबोचा
सुपौल। बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी अभियान के तहत निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने सुपौल जिले में बड़ी कार्रवाई करते हुए मरौना अंचल में पदस्थापित एक सर्वे अमीन को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। आरोपी अमीन की पहचान विक्रम कुमार राम के रूप में हुई है, जिसे निगरानी विभाग की टीम ने 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए उसके किराए के आवास से दबोचा। इस कार्रवाई के बाद राजस्व विभाग और स्थानीय प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई मंगलवार, 24 फरवरी 2026 की सुबह पटना मुख्यालय से आई विशेष टीम द्वारा की गई। आरोपी सर्वे अमीन विक्रम कुमार राम को निर्मली नगर पंचायत के वार्ड संख्या 01 स्थित राधा कृष्ण मंदिर के पास उसके किराए के घर से गिरफ्तार किया गया। उस समय वह एक व्यक्ति से जमीन से जुड़े सर्वे कार्य को पूरा करने के एवज में रिश्वत की राशि स्वीकार कर रहा था। जैसे ही आरोपी ने रिश्वत की रकम ली, पहले से मौजूद निगरानी टीम ने उसे तत्काल पकड़ लिया और उसके पास से रिश्वत की पूरी राशि बरामद कर ली। इस मामले की शुरुआत मरौना थाना क्षेत्र के खोरमा गांव निवासी जयनारायण यादव की शिकायत से हुई थी। शिकायतकर्ता ने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना में लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि उनकी जमीन से संबंधित सर्वे कार्य लंबे समय से लंबित था। जब उन्होंने इस कार्य को पूरा कराने के लिए सर्वे अमीन से संपर्क किया, तो आरोपी ने कार्य करने के बदले 20 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की। शिकायतकर्ता ने इसकी सूचना निगरानी विभाग को दी, जिसके बाद विभाग ने मामले की सत्यता की जांच की और कार्रवाई की योजना बनाई। निगरानी ब्यूरो ने शिकायत की पुष्टि होने के बाद एक विशेष जाल बिछाया और शिकायतकर्ता को निर्धारित रकम के साथ आरोपी के पास भेजा। जैसे ही आरोपी ने रिश्वत की रकम स्वीकार की, निगरानी टीम ने तत्काल छापा मारकर उसे गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को निगरानी ब्यूरो की टीम अपने साथ पटना ले गई, जहां उससे आगे की पूछताछ की जा रही है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2026 में भ्रष्टाचार के खिलाफ यह अब तक की महत्वपूर्ण कार्रवाई है। विभाग के अनुसार इस वर्ष अब तक कुल 22 और 23 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं, जिनमें यह 20वां और 21वां ट्रैप मामला है। इन मामलों में अब तक कुल 17 भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मियों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया जा चुका है। विभाग द्वारा इस वर्ष अब तक कुल 7 लाख 87 हजार रुपये की रिश्वत की राशि बरामद की जा चुकी है। राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए अधिकारियों और कर्मचारियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि रिश्वतखोरी किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। भूमि एवं राजस्व विभाग के मंत्री विजय सिन्हा ने भी विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया है कि भ्रष्टाचार में संलिप्त किसी भी कर्मचारी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। इस दिशा में निगरानी ब्यूरो लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहा है और शिकायत मिलने पर त्वरित कार्रवाई कर रहा है। इस कार्रवाई के बाद आम लोगों में भी सकारात्मक प्रतिक्रिया देखी जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी और आम नागरिकों को अपने कार्यों के लिए रिश्वत देने की मजबूरी से राहत मिलेगी। वहीं प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी किसी भी कार्य के लिए रिश्वत की मांग करता है, तो इसकी सूचना तुरंत निगरानी विभाग को दें, ताकि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सके। फिलहाल निगरानी अन्वेषण ब्यूरो आरोपी सर्वे अमीन के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी, ताकि प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।


