August 11, 2022

पटना के अखंडवासिनी मंदिर के सेवा शिविर में शिवभक्तों की सेवा..भंडारा भी जारी..11 वर्षों से लगातार

पटना।विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला को लेकर सुलतानगंज से जल लेकर देवघर बाबा धाम अर्पण करने के लिए जाने वाले कावड़ यात्रियों के लिए पटना के अखंड वासिनी मंदिर के तत्वावधान में कमरशार में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी कांवरिया सेवा शिविर लगाया गया है।जहां कांवर यात्रा करने वाले लोगों के लिए हर प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध है।अखंड वासिनी मंदिर गोलघर पटना के द्वारा सेवा शिविर लगाया गया है। पटना के गोलघर स्थित अखंड वासिनी मंदिर के पुजारी विशाल तिवारी द्वारा शिव भक्तों के लिए रात्रि विश्राम, शरबत, चाय भोजन आदि की व्यवस्था की गई है। हर साल श्रावणी मेले के दौरान बिहार के मुंगेर जिले में कांवरिया पथ कमरसार के पास पटना के गोलघर पार्क रोड स्थित माँ अखण्डवासिनी मंदिर की ओर से कई तरह के इंतजाम किए जाते हैं।अखण्डवासिनी मंदिर परिवार की ओर से कांवरियों के लिए भंडारा, शर्बत, जागरण, स्वास्थ्य कैम्प की व्यवस्था की जाती है।इस बारे में अधिक जानकारी देते हुए अखण्डवासिनी मंदिर की ओर से बाबा विशाल तिवारी बताते हैं कि हम लोग पिछले 11 सालों से कमरसार में कांवरियों के लिए शर्बत, भंडारा और स्वास्थ्य कैम्प की व्यवस्था करते रहे हैं।शिविर में नींबू पानी, गर्म जल का सेक, शर्बत, रात में विश्राम एवं भोजन मुहैया कराया जा रहा है। इसके तहत सुबह में 6 बजे से हमलोग शर्बत पिलाते हैं।फिर 9 बजे प्रसाद स्वरूप पूरी बुंदिया, दोपहर 1 से 3 बजे तक चावल-दाल, सब्जी रायता, शाम में 7 बजे तक चना-हलवा और रात पूरी-सब्जी की व्यवस्था करते हैं।विशाल तिवारी का कहना है कि उनलोगों की ओर से यहाँ शर्बत और विश्राम स्थल का इंतजाम पूरे एक महीने के लिए किया जाता है लेकिन भंडारा और जागरण की व्यवस्था पांच दिनों के लिए होती है।इस बार 20 जुलाई से हमलोगों का यह कार्यक्रम शुरू हुआ है।वहीं इस बार से हमलोगों ने श्रद्धालुओं के लिए जागरण की भी व्यवस्था की है ताकि कांवरिया पथ पर कांवर यात्रा कर रहे भक्तों को बाबा भोलेनाथ के भजन सुनकर ऊर्जा प्राप्त हो सके।

उल्लेखनीय है कि पटना के गोलघर स्थित अखंड वासिनी मंदिर की अखंड ज्योति की महिमा अपरंपार है। पटना का यह पहला मंदिर होगा, जहां तीन पीढ़ियों से एक ही परिवार के लोग माता की सेवा में लगे हैं। मौजूदा व्यवस्थापक व पुजारी विशाल तिवारी ने बताया कि 1914 में उनके बाबा आमी स्थान निवासी आयुर्वेदाचार्य डॉ. विश्वनाथ तिवारी ने इस अखंड दीप को कामाख्या से लाकर यहां स्थापित किए थे। तब से दो अखंड दीप मंदिर में लगातार जल रहे हैं। नवरात्र के नौ दिनों में यहां अखंड दीप में पांच से छह किलो घी और सरसों तेल की खपत होती है। नवरात्रि में इस मंदिर में दर्शन करने हेतु लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं

Report by-Ban Bihari

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