राष्ट्रपति ने जगदीप धनखड़ का इस्तीफा किया मंजूर, नए उपराष्ट्रपति का ऐलान जल्द, दौड़ में नीतीश समेत कई नाम
नई दिल्ली। भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया है, जिसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को स्वीकार कर लिया। धनखड़ ने संविधान के अनुच्छेद 67(ए) के अंतर्गत अपने अधिकार का प्रयोग करते हुए स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया और तत्काल प्रभाव से पद त्याग दिया। उनके इस्तीफे के बाद न केवल उपराष्ट्रपति का पद खाली हो गया है, बल्कि राज्यसभा के सभापति की कुर्सी भी खाली हो गई है, जिससे संसदीय कार्यों पर भी असर पड़ा है।
राज्यसभा की कार्यवाही पर प्रभाव
भारत के उपराष्ट्रपति को राज्यसभा का एक्स-ऑफिसियो सभापति भी कहा जाता है। अतः जैसे ही उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देते हैं, राज्यसभा के सभापति का पद भी खाली हो जाता है। ऐसे में यह प्रश्न उठता है कि राज्यसभा की कार्यवाही का संचालन अब कौन करेगा। संविधान की प्रक्रिया के अनुसार जब तक नया उपराष्ट्रपति नहीं चुना जाता, तब तक राज्यसभा की कार्यवाही का संचालन डिप्टी चेयरमैन करते हैं। वर्तमान में यह जिम्मेदारी हरिवंश नारायण सिंह निभा रहे हैं, जो 2020 से इस पद पर हैं।
राजनीतिक हलचल और नए नामों की चर्चा
धनखड़ के इस्तीफे के बाद सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। देश भर में यह चर्चा तेज है कि अगला उपराष्ट्रपति कौन होगा। कई राजनीतिक चेहरों के नाम सामने आ रहे हैं, जिनमें बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान भाजपा विधायक हरिभूषण ठाकुर बचौल ने मीडिया से बातचीत में इस चर्चा पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अगर नीतीश कुमार देश के उपराष्ट्रपति बनते हैं, तो यह एक सकारात्मक और गर्व की बात होगी।
नीतीश कुमार का नाम क्यों है चर्चा में
नीतीश कुमार देश के एक अनुभवी और पुराने राजनेता माने जाते हैं। उन्होंने कई बार मुख्यमंत्री पद संभाला है और राष्ट्रीय स्तर पर भी उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है। पिछले कुछ वर्षों में उनका राजनीतिक रुख और केंद्र के साथ संबंध कई बार चर्चा में रहे हैं। इसी वजह से उनके नाम को उपराष्ट्रपति पद के संभावित उम्मीदवारों में शामिल किया जा रहा है।
संसदीय संतुलन की चुनौतियां
उपराष्ट्रपति का पद खाली होने से न केवल राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं, बल्कि संसद के कामकाज पर भी असर पड़ सकता है। मानसून सत्र के दौरान यह और भी संवेदनशील मसला बन गया है। ऐसे समय में जब विपक्ष कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी कर रहा है, राज्यसभा के सभापति की अनुपस्थिति एक संवैधानिक और प्रशासनिक चुनौती बन सकती है। हालांकि डिप्टी चेयरमैन हरिवंश नारायण सिंह कार्यवाही को संचालित कर रहे हैं, लेकिन स्थायी समाधान के लिए जल्द ही नए उपराष्ट्रपति के चयन की आवश्यकता है। जगदीप धनखड़ का अचानक इस्तीफा न केवल एक संवैधानिक प्रक्रिया की शुरुआत है, बल्कि इससे राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। अगले उपराष्ट्रपति के चयन को लेकर पूरे देश की नजरें राजनीतिक दलों पर टिकी हैं। नीतीश कुमार सहित कई नेताओं के नामों की चर्चा यह संकेत देती है कि आने वाले दिनों में केंद्र और राज्यों की राजनीति में बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। अब देखना यह है कि संसद का ऊपरी सदन कब तक स्थिरता पाता है और नए उपराष्ट्रपति की नियुक्ति कब होती है।


