January 26, 2026

रामविलास पासवान की जयंती के बहाने बिहार में चाचा-भतीजा में दिखी सीधी राजनीतिक टक्कर, भतीजा पास और चाचा हुए फेल

पटना। लोजपा जब से दो फाड़ हुई है तब से बिहार में चाचा-भतीजा के बीच राजनीति में शह-मात का खेल जारी है। दोनों में कोई खुद को कमतर नहीं आंकना चाह रहे, लेकिन सोमवार को दिवंगत रामविलास पासवान के निधन के बाद उनकी पहली जयंती पर चाचा पशुपति पारस और भतीजा चिराग पासवान के बीच पहली बार बिहार की जमीन पर सीधी राजनीतिक टक्कर हुई। रामविलास पासवान की विरासत पर अपनी-अपनी दावेदारी पेश करते हुए दोनों नेताओं के बीच आज ख्ुाद को साबित करने की होड़ दिखी। इस होड़ में चिराग पासवान शक्ति प्रदर्शन में चाचा से कहीं आगे दिखे, लेकिन ऐन मौके पर चाचा ने अपनी नई चाल चली और इसमें अमित शाह की एंट्री करा दी। बता दें दिवंगत रामविलास पासवान के की पहली जयंती (5 जुलाई) भव्य तरीके से मनाने का ऐलान चिराग पासवान और पशुपति पारस ने किया था।
शक्ति प्रदर्शन में आगे निकले चिराग
लोक जनशक्ति पार्टी में टूट के बाद पहली बार उतरे दिवंगत रामविलास पासवान के पुत्र चिराग को उम्मीद से बेहतर वेलकम मिला। 101 घोड़े की सलामी मिली तो हजारों समर्थकों ने जिंदाबाद के नारे लगाए। सुरक्षा के लिए लिहाज से अतिसंवेदनशील एयरपोर्ट पर हजारों की संख्या में समर्थकों का हुजूम दिखा। नारों के बीच चिराग का काफिला पटना की सड़कों पर निकला तो गाड़ियों का जाम लग गया। पोस्टरों से पटे पटना की सड़कों पर चिराग पासवान हाथ हिलाते हाजीपुर की ओर बढ़ चले। हाजीपुर के रास्ते में भी उनका भव्य स्वागत किया गया। जगह-जगह लोजपा नेता चिराग पासवान का स्वागत-अभिनंदन करते रहे।
चाचा पारस पड़े फीके, महज कुछ सौ लोग पहुंचे
वहीं रामविलास पासवान की जयंती को लोजपा के प्रदेश कार्यालय में भव्य तरीके से मनाने का ऐलान पशुपति पारस ने भी किया था। पारस के ऐलान के मुताबिक, 10 हजार लोगों को भोजन कराने से लेकर बिहार के कोने-कोने से लोगों को पटना बुलाकर भव्य आयोजन करने का था, लेकिन यह आयोजन पटना के लोजपा कार्यालय तक ही सीमित दिखा। पारस के कार्यक्रम में 10 हजार लोग तो नहीं आए, महज कुछ सौ लोग जरूर पहुंचे। जयंती में बड़े नेता के तौर पर पशुपति पारस ही थे, बाकी किसी बड़े नेता की उपस्थिति नहीं दिखी। इस बीच चाचा पारस ने मीडिया के जरिए ये खबर भी चिराग तक पहुंचाई कि अगर वो लोजपा कार्यालय आते हैं तो उन्हें रोकेंगे नहीं। लेकिन चिराग यहां नहीं गए और सीधे हाजीपुर के लिए रवाना हो गए।
पारस ने चल दी नई चाल
चिराग के शक्ति प्रदर्शन ने चाचा को भी चौंकाया, लेकिन राजनीति के माहिर खिलाड़ी पारस ने नया दांव चल दिया। चिराग के पटना उतरते ही राजनीतिक गलियारों में एक चर्चा तेजी से सामने आई कि पशुपति पारस को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने फोन किया है। फोन कॉल को इस बात से जोड़ा जाने लगा कि पशुपति पारस केंद्र में मंत्री बन रहे हैं और यह उसी का बुलावा है। इस चर्चा पर मीडिया ने पारस से सवाल किया तो उन्होंने इससे ना इनकार किया और ना इसे माना। सिर्फ कहा, राज को राज रहने दीजिए।

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