विपक्ष ने की ‘राज्य में जाली स्टांप घोटाला’ विषय पर सदन में विचार-विमर्श की मांग, लाया कार्यस्थगन प्रस्ताव
पटना। बिहार विधान परिषद में बजट सत्र के तीसरे दिन विपक्ष की ओर से परिषद की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमावली के नियम 103 के आलोक में मंगलवार को जनहित के महत्वपूर्ण विषय पर कार्यस्थगन प्रस्ताव लाया गया, जिसे अस्वीकृत कर दिया गया। एमएलसी सुबोध कुमार ने कार्यस्थगन प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि राज्य में चारों ओर लूट का छूट, भ्रष्टाचार, धांधली और अराजकता की स्थिति उत्पन्न हो गई है। राजधानी में खुलेआम जाली स्टांप पेपर के माध्यम से सरकारी खजाने को चूना लगाया जा रहा है एवं जनता को लूटा जा रहा है। इस बात का खुलासा एक निजी चैनल ने किया तो सरकार के आला अधिकारियों की नींद टूटी और आनन-फानन में 9 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। पकड़े गए लोग इस रैकेट की सबसे छोटी कड़ी हैं, असली मुजरिम सरकार की पहुंच से दूर है। सरकार के नाक के नीचे जाली स्टांप पेपर का काला धंधा बेरोकटोक चलता रहा और किसी सरकारी खुफिया तंत्र को इसकी हवा तक नहीं लग सकी, यह बात समझ से परे है। राज्य के सभी जिलों में जालसाजों का मजबूत नेटवर्क फैला हुआ है। आश्चर्य की बात है कि जिस अधिकारी की मिलीभगत से जालसाजी का खेल चल रहा है, जांच टीम का गठन कर उसे ही जांच पदाधिकारी बना दिया गया है, ऐसी स्थिति में क्या जांच होगी, समझा जा सकता है। यह सरकार की विफलता और सरकारी तंत्र की नाकामयाबी का ताजा उदाहरण है। ऐसे में कार्यकारी सभापति को सदन के कार्य सूची पर अंकित सारे विषयों को स्थगित करते हुए ‘राज्य में जाली स्टांप घोटाला’ विषय पर सदन में विचार-विमर्श की मांग की।


