February 16, 2026

बिहार की राजनीति में भारी बवंडर का संकेत : चुनिंदा नेताओं से वन-टू-वन मिले नीतीश, डैमेज कंट्रोल में जुटे सुशील मोदी

पटना। भले एनडीए के नेता कह रहे हो कि अरूणाचल प्रदेश की आंच बिहार के सियासत में नहीं पड़ेगी, लेकिन सीएम नीतीश की नाराजगी बिहार की राजनीति में आने वाले दिनों में भारी बवंडर का संकेत दे रहा है। अरूणाचल प्रदेश में जिस तरह से भाजपा ने अपने दोस्त (जदयू) के पीठ में छुरा घोंपते हुए उसके 7 में से 6 विधायकों को अपने पार्टी में शामिल कर लिया, उसे जदयू इतनी आसानी से नहीं पचा पा रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इससे काफी दुखी हैं।
रविवार को बिहार की राजनीति में उस समय अचानक भूचाल आ गया, जब जदयू की दो दिनों तक चली राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के दूसरे दिन सीएम नीतीश ने अरूणाचल प्रदेश को नाराजगी जाहिर की और कहा कि मुझे न सीएम बनने की चाहत थी और न बची। रविवार की रात भी मुख्यमंत्री आवास में अरुणाचल ही छाया रहा और अगले दिन सुबह के लिए तय हो गया कि नीतीश कुछ चुनिंदा नेताओं से एक-एक कर मिलेंगे। मुख्यमंत्री के निर्देश पर पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के कुछ नेताओं को सोमवार की बैठक के लिए रोक लिया गया था।
जदयू का स्टैंड आगे क्या होना चाहिए : सोमवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार रूटीन के तहत अपने सरकारी कामकाज को देखने के बजाए जदयू कार्यालय पहुंचे और राष्ट्रीय कार्यकारिणी के चुनिंदा नेताओं से वन-टू-वन बात किया। अरुणाचल प्रदेश में तेजी से घटे सियासी घटनाक्रम से सीख लेते हुए नीतीश कुमार ने पश्चिम बंगाल चुनाव का इंतजार करने की जगह अभी ही भाजपा के साथ भविष्य को लेकर रायशुमारी की। इन नेताओं से नीतीश कुमार ने सीधा जानना चाहा कि जदयू का स्टैंड आगे क्या होना चाहिए। बिहार को अलग रखकर देश की राजनीति आगे बढ़ानी चाहिए या अरुणाचल प्रदेश में अच्छा रिश्ता रखने के बावजूद धोखा मिलने पर भाजपा को कड़ी सीख दी जानी चाहिए। नीतीश इन सवालों के जवाब से अपनी आगे की रणनीति तय करना चाह रहे हैं और संभव है कि अब बहुत जल्द साफ कर देंगे कि अरुणाचल प्रदेश का बदला बिहार में लिया जाएगा या नहीं। वन-टू-वन के बाद डेढ़ बजे नीतीश कुमार जदयू के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह और मंत्री विजय कुमार चौधरी के साथ जदयू कार्यालय से निकले।
डैमेज कंट्रोल में जुटे सुशील मोदी : इधर, नीतीश कुमार के खफा होने की खबर जानकर सोमवार को भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी डैमेज कंट्रोल में जुट गए। उन्होंने कहा कि अरूणाचल की बिहार की राजनीति पर कोई असर नहीं होने वाला है। एनडीए सरकार अपना कार्यकाल पूरा करेगी। बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम और वर्तमान में भाजपा के राज्यसभा सांसद सुशील मोदी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की बातों का समर्थन करते हुए कहा कि हां वो मुख्यमंत्री नहीं बनना चाहते थे लेकिन भाजपा और जदयू के नेताओं ने कहा कि हमलोगों ने उनके नाम और विजन पर बिहार चुनाव लड़ा। लोगों ने उनके नाम पर हमें वोट दिया। इसके बाद उन्होंने जदयू, भाजपा और वीआईपी नेताओं के कहने पर सीएम पद स्वीकारा। चर्चा है कि सुशी मोदी को भाजपा हाईकमान ने आगे किया है, ताकि वे नाराज सीएम नीतीश को मना सके। वैसे भी नीतीश और मोदी की दोस्ती बिहार की सत्ता में किसी से छिपी हुई नहीं है।

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