देश की सुरक्षा से खिलवाड़ : बिहार के कतरीसराय में फर्जी सिम कार्ड का धंधा जोरों पर, पुलिस महकमे में मची खलबली
बिहारशरीफ। बिहार के नालंदा जिला के कतरीसराय का नाम समय-समय पर सामने आते रहता है। इसकी वजह है कि यह प्रखंड ठगों की नगरी के नाम से जाना जाता है। यहां अधिकांश लोगों का जीवन ठगी के धंधे पर ही टिकी है। कहा जाता है कि ठगी से संबंधित यहां कोई ऐसा काम नहीं बचा है, जो यहां नहीं होती हो। सीएम नीतीश के गृह जिला में बड़े पैमाने पर चल रहे ठगी के धंधे को जड़ से मिटाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कोई बड़ा एक्शन नहीं लिया गया है, बस दिखावे के लिए छापामारी की कार्रवाई कर इतिश्री कर ली जाती है। बताया जाता है कि उक्त प्रखंड के अधिकांश घरों में बेरोकटोक ठगी का धंधा चल रहा है, इसमें पढ़ी-लिखी लड़कियां व महिलाएं भी शामिल बतायी जाती है, ताकि पुलिस को इन पर शक न हो। अब जो खबर सामने आयी है वह फर्जी सिम से जुड़ी है। जो देश की सुरक्षा से जुड़ा है। फर्जी सिम के पर्दाफाश होने से पुलिस महकमें में खलबली मचने के साथ ही पुलिस अधिकारियों के कान खड़े हो गए हैं। मालूम हो कतरीसराय थाना क्षेत्र में इन दिनों फर्जी सिम का धंधा जोरों पर है। बिहार के अलावा असम, बंगाल जैसे कई अन्य राज्यों में फर्जी सिम की मांग बड़े पैमाने पर है। फर्जी आईडी प्रुफ का इस्तेमाल कर ठग सिम ला रहे हैं और उसकी बड़ी कीमत पर बिक्री की जा रही है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इसकी कीमत स्थानीय बाजार में पांच सौ से एक हजार रुपए तक है। मंगलवार को पुलिस ने सूचना के आधार पर कतरीसराय बाजार की एक मोबाइल दुकान में छापेमारी की। वहां से 725 फर्जी सिम बरामद किए गए। एक ही आदमी के दो अलग-अलग नामों से दो वोटर कार्ड, एक लैपटॉप, बजाज फाईनेंस एप्रूवल के कागजात व अन्य कंपनियों के ग्राहकों का नाम, पता व मोबाइल नंबर लिखा कागज, तीन मोबाइल एक पेनड्राइव तथा 53 हजार 400 रुपये नकद बरामद किए गए। थानाध्यक्ष अमरेश कुमार सिंह ने बताया कि गिरफ्तार दुकानदार की पहचान थाना क्षेत्र के लोहराजपुर निवासी अर्जुन प्रसाद के पुत्र सुजीत कुमार के रूप में की गई है। पकड़े गए लोगों को गिरफ्तार कर उन्हें जेल भेज दिया गया।


