BIHAR : मांझी के बाद अब कुशवाहा भी जा सकते हैं एनडीए में, रालोसपा की हुई हाई लेवल मीटिंग
पटना। महीनों पूर्व से महागठबंधन में अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे रालोसपा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा राजद और कांग्रेस का साथ छोड़ हम प्रमुख जीतन राम मांझी की तरह एनडीए का दामन थाम सकते हैं। गुरूवार को पार्टी की हुई हाई लेवल बैठक में इस संभावना पर मुहर लगती नजर आयी। पार्टी नेताओं का कहना है कि जिस तरह महागठबंधन में जीतनराम मांझी की बात नहीं सुनी जा रही थी, उसी तरह कुशवाहा की एक बात भी नहीं सुनी जा रही थी। इसको लेकर उन्होंने काफी पहले ही मूड बना लिया था। वहीं सूत्रों की मानें तो एनडीए में जाने पर उन्हें 5 विधानसभा सीटें मिल सकती है। इसमें दो या तीन सीटें उनकी पसंद की होगी। हालांकि, इस बाबत अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। पार्टी के कुछ नेताओं का यह भी कहना है कि वे महागठबंधन छोड़ थर्ड फ्रंट में भी शामिल हो सकते हैं। लेकिन, इसकी संभावना न के बराबर दिखती है।
इधर, गुरुवार को हुई हाई लेवल मीटिंग में महागठबंधन में रहने या नहीं रहने को लेकर जिला, प्रदेश व राष्ट्रीय कमिटि ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर रालोसपा ने पार्टी अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा को अधिकृत कर दिया है। वे किसके साथ गठबंधन में रहेंगे, इसका निर्णय खुद उपेन्द्र कुशवाहा लेंगे। महागठबंधन में बने रहने को लेकर तमाम कोशिशों का उल्लेख करते हुए पार्टी ने कहा है कि राजद के व्यवहार के कारण ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है कि अब निर्णय लेने का अंतिम समय आ गया है। वहीं रालोसपा अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने कहा है कि महागठबंधन में अभी जो परिस्थिति है, उस पर विचार करते हुए पार्टी ने मुझे अधिकृत किया है। मैं सोच समझकर बिहार की जनता और अपने कार्यकर्ताओं के हित का ख्याल करते हुए निर्णय लूंगा।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, रालोसपा ने विधानसभा चुनाव के लिए महागठबंधन में 35 सीटों की मांग की थी और इसके लिए उपेंद्र कुशवाहा ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव से दो बार और राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह से भी उनके कायार्लय में मुलाकात की थी। बताया जाता है कि राजद रालोसपा को 10-12 सीट से अधिक देने को तैयार नहीं है। वहीं महागठबंधन के एक अन्य घटक विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) ने भी उपेंद्र कुशवाहा को महागठबंधन की ओर से मुख्यमंत्री का चेहरा बनाने का समर्थन किया है।
बता दें हम प्रमुख जीतन राम मांझी महागठबंधन में लंबे समय से सीट शेयरिंग को लेकर समन्वय समिति बनाने की मांग करते रहे लेकिन उनकी बातों को हमेशा अनसुना कर दिया गया। अंत में उन्होंने एनडीए का दामन थामने ही भलाई समझी। ठीक उसी रास्ते पर कुशवाहा भी चल पड़े हैं और जल्द ही एनडीए के अंग बन सकते हैं।


