हरियाली अमावस्या पर पौधरोपण से मिलती है आरोग्यता व शांति-उन्नति
पटना। सावन की तीसरी सोमवारी के साथ हरियाली अमावस्या पर 20 वर्षों के बाद सोमवती अमावस्या के पुण्य संयोग में कोरोना कहर के साथ-साथ भारी बारिश ने शिव भक्तों को मायूस कर दिया, फिर भी श्रद्धालुओं ने अपने घरों में ही शिव पूजन, रुद्रपाठ, पार्थिव निर्माण व अभिषेक, उपवास कर घर के बालकनी, छतों पर गमले में पौधा लगाकर हरियाली अमावस्या मनाया। तुलसी को सबसे पवित्र माना गया है, इसीलिए तुलसी के पौधा लगाकर जल, फूल, धूप, दीप से पूजा की गई।


सीमित संसाधनों में हुई रूद्र पूजा
ज्योतिषाचार्य राकेश झा ने बताया कि सावन सोमवारी पर सोम पुष्य योग के साथ सर्वार्थ सिद्धि योग होने से अत्यंत पुण्यप्रद हो गया था। कोरोना संक्रमण से बचाव के पालन हेतु समाजिक दूरी व मास्क का प्रयोग करते हुए समाजसेवी तथा ज्योतिष शास्त्र में शोध का अध्ययन कर रहे ज्योतिष प्रवीण अमित सिंह के आवास पर रुद्राभिषेक सह श्रृंगार पूजा सीमित संसाधनों में की गई।

पौधरोपण से आरोग्यता व शांति-उन्नति
धर्मशास्त्र की जानकारी रखने वाली सनातन प्रेमी मीरा देवी के मुताबिक हरियाली अमावस्या पर घर, मंदिर, धार्मिक स्थल या तीर्थ में पौधा लगाने से आरोग्यता, मानसिक शांति, मेधा तथा पारिवारिक उन्नति होती है, चूंकि मंदिर बंद है, इसीलिए इस पुण्य अवसर पर मैंने अपने आवास पर तुलसी का पौधा लगाकर पूजन-अर्चन की। इस कोरोना काल में तुलसी का पौधा रामवाण साबित हो रहा है। यह नकारात्मक ऊर्जा का ह्रास कर सकारात्मकता का प्रवाह भी करती है।

